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विश्व बैंक समूह बेहतर सेवाओं, आधुनिक सिंचाई और जलवायु सहनक्षमता के ज़रिए भारत की जल सुरक्षा मज़बूत करने में सहयोग दे रहा है.

भारत: जल सुरक्षा है रोज़गार और समृद्धि का आधार

© World Bank Group विश्व बैंक समूह बेहतर सेवाओं, आधुनिक सिंचाई और जलवायु सहनक्षमता के ज़रिए भारत की जल सुरक्षा मज़बूत करने में सहयोग दे रहा है.

भारत: जल सुरक्षा है रोज़गार और समृद्धि का आधार

एसडीजी

जल भारत की अर्थव्यवस्थाखाद्य सुरक्षारोज़गार और विकास के लिए बेहद ज़रूरी है, मगर बढ़ती माँगसीमित संसाधनों और जलवायु परिवर्तन से, देश के जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है. विश्व बैंक समूह, भारत को जल एवं स्वच्छता सेवाएँ बेहतर बनानेसिंचाई का आधुनिकीकरण करनेबाढ़ व सूखे से निपटने और निवेश जुटाने में सहयोग दे रहा हैताकि करोड़ों लोगों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

किसी भी अन्य देश की तरह, भारत में भी जल, रोज़गार और लोगों की आजीविका के लिए बेहद अहम है. जल पर निर्भर क्षेत्र, देश के लगभग 70 प्रतिशत लोगों को रोज़गार देते हैं और अर्थव्यवस्था में क़रीब आधा योगदान करते हैं.

वैसे तो भारत में दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी रहती है, जबकि उसके पास वैश्विक जल संसाधनों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा है. देश की लगभग 70 प्रतिशत बारिश केवल तीन महीनों में होती है और वर्ष 1970 से प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता आधी रह गई है.

लगभग 60 करोड़ लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं. बढ़ती शहरी आबादी, औद्योगिक माँग और जलवायु परिवर्तन से जल संसाधनों पर दबाव और बढ़ रहा है. 

वर्ष 2050 तक भारत के शहरों में 41 करोड़ 60 लाख दीगर लोगों के बसने का अनुमान है, जिससे भरोसेमन्द एवं टिकाऊ जल प्रबन्धन पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गया है.

विश्व बैंक समूह पूरे भारत में जल सुरक्षा मज़बूत करने के प्रयासों में सहयोग दे रहा है.
© World Bank Group विश्व बैंक समूह पूरे भारत में जल सुरक्षा मज़बूत करने के प्रयासों में सहयोग दे रहा है.

बुनियादी ढाँचे से बेहतर सेवाओं की ओर

भारत की केन्द्र और प्रान्तीय सरकारों ने जल जीवन मिशन, अमृत और स्वच्छ भारत जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए पेयजल, स्वच्छता, सिंचाई और जल ढाँचे में बड़ा निवेश किया है.

विश्व बैंक समूह के अनुसार, अब अगला क़दम केवल नई सुविधाएँ बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को भरोसेमन्द, कुशल और टिकाऊ जल सेवाएँ मिलें.

इसके लिए जल संस्थानों को अधिक पेशेवर और जवाबदेह बनाना होगा, साथ ही उनकी वित्तीय व्यवस्था भी मज़बूत करनी होगी.

विश्व बैंक समूह, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे देश के जल सुरक्षा प्रयासों में सहयोग दे रहा है.

यह सहयोग वित्त वर्ष 2026 से 2031 की देश साझेदारी रूपरेखा और विश्व बैंक समूह की वैश्विक ‘वॉटर फ़ॉरवर्ड’ रणनीति पर आधारित है.

इस रणनीति के तीन प्रमुख आधार हैं - लोगों के लिए जल, भोजन के लिए जल और पृथ्वी के लिए जल. इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक दुनिया भर में 40 करोड़ लोगों की जल सुरक्षा बेहतर बनाना है.

भरोसेमन्द जल आपूर्ति समुदायों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को बेहतर बना रही है.
© World Bank Group भरोसेमन्द जल आपूर्ति समुदायों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को बेहतर बना रही है.

इस लक्ष्य में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है. वित्त वर्ष 2025 से 2030 के बीच देश में 10 करोड़ लोगों की जल सुरक्षा सुधारने का लक्ष्य रखा गया है, जो वैश्विक लक्ष्य का लगभग एक-चौथाई है.

सुरक्षित और भरोसेमन्द जल सेवाएँ

विश्व बैंक समर्थित कार्यक्रम शहरों और गाँवों में जल सेवाओं को अधिक पेशेवर, भरोसेमन्द और लोगों की ज़रूरतों के अनुरूप बनाने में मदद कर रहे हैं.

हिमाचल प्रदेश के शिमला में जल आपूर्ति का प्रबन्धन सरकारी विभाग से हटाकर स्वायत्त संस्था, शिमला जल प्रबन्धन निगम लिमिटेड, को सौंपा गया है.

इसके बाद मीटर आधारित बिलिंग, वित्तीय स्वायत्तता और जवाबदेही में सुधार हुआ है. स्वतंत्र प्रयोगशालाएँ लगातार जल गुणवत्ता की जाँच कर रही हैं और लागत वसूली भी बेहतर हुई है. इस व्यवस्था को अन्य शहरों के लिए एक उपयोगी मॉडल माना जा रहा है.

उत्तराखंड के शहरों से लगे इलाक़ों में लगभग सभी घरों को प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे दबाव के साथ जल आपूर्ति मिल रही है.

कर्नाटक में गाँवों की जल आपूर्ति प्रणालियों के टिकाऊ संचालन और रखरखाव को मज़बूत किया गया है. 

कर्नाटक में चौबीसों घंटे जल आपूर्ति का भी विस्तार किया जा रहा है. वर्ष 2005 में तीन मध्यम आकार के शहरों में शुरू हुई विश्व बैंक समर्थित परियोजनाओं से चयनित क्षेत्रों के दो लाख से अधिक लोगों को लगातार जल आपूर्ति मिली है.

भारत के उत्तर प्रदेश में एक हरे-भरे खेत में छतरी वाला एक लाल ट्रैक्टर खड़ा है।
World Bank भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में छोटे किसान का एक खेत.

अब इन शहरों में पूरे शहरी क्षेत्र तक यह सेवा पहुँचाने के लिए जल कम्पनियाँ स्थापित की जा रही हैं. राज्य के 500 गाँवों में भी चौबीसों घंटे जल आपूर्ति शुरू करने की दिशा में काम हो रहा है.

कम पानी में अधिक पैदावार

भारत में कुल जल उपयोग का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा कृषि में ख़र्च होता है. यह चीन और ब्राज़ील की तुलना में दो से तीन गुना अधिक है.

सिंचाई के लिए भूजल पर किसानों की निर्भरता बढ़ी है और अब यह देश में सिंचाई का प्रमुख स्रोत है. लेकिन इसके अत्यधिक दोहन से कई क्षेत्रों में भूजल स्तर तेज़ी से गिर रहा है.

विश्व बैंक समूह के अनुसार, सतही जल और भूजल का मिलकर बेहतर प्रबन्धन करना ज़रूरी है. नहरों के आधुनिकीकरण, ड्रिप और छिड़काव वाली सिंचाई तथा डिजिटल तकनीकों से किसान कम पानी में अधिक फ़सल उगा सकते हैं. साथ ही, भूजल निकासी की नियमित निगरानी भी आवश्यक है.

पश्चिम बंगाल में किसानों के खेतों तक बेहतर सिंचाई सेवाएँ पहुँचाने के लिए स्वतंत्र निजी सेवा प्रदाताओं को शामिल किया गया है. कार्य कुशलता और ठोस प्रदर्शन आधारित अनुबन्धों से, जल की उपलब्धता, जवाबदेही और सेवाओं की विश्वसनीयता में सुधार हुआ है.

हरियाणा में विश्व बैंक समर्थित एक प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत विभिन्न कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के प्रदर्शन को मापा जाएगा और उसकी तुलना की जाएगी. 

इसका उद्देश्य धान और गेहूँ की खेती के कारण भूजल पर बढ़ते दबाव के बीच पानी के अधिक टिकाऊ इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.

ड्रोन सहित नई तकनीकें सिंचाई को अधिक कुशल बनाने में मदद कर रही हैं.
© World Bank Group ड्रोन सहित नई तकनीकें सिंचाई को अधिक कुशल बनाने में मदद कर रही हैं.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लाभ

उत्तर प्रदेश में धान और गन्ने की खेती में वैश्विक औसत से दो से तीन गुना अधिक पानी इस्तेमाल होता है. इसलिए किसानों को जलवायु के अनुकूल और कम पानी वाली खेती अपनाने में मदद दी जा रही है.

2030 जल संसाधन समूह ने उत्तर प्रदेश सरकार और माइक्रोसॉफ़्ट के साथ मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परियोजनाएँ शुरू की हैं.

इनमें उपग्रह चित्रों, मिट्टी की सेहत से जुड़े आँकड़ों और मौसम की ताज़ा जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है. इसके आधार पर किसानों को सिंचाई, उर्वरकों और कीट नियंत्रण के बारे में उनकी ज़रूरत के अनुसार सलाह मिलती है.

विश्व बैंक बिहार और हरियाणा में भी नई सिंचाई परियोजनाओं का समर्थन कर रहा है. इनका उद्देश्य सिंचाई व्यवस्था का आधुनिकीकरण, जल भंडारण बढ़ाना, बाढ़ और सूखे का बेहतर प्रबन्धन करना और बदलते मौसम में किसानों की मदद करना है.

विश्व बैंक आधुनिक तकनीक और बेहतर सुरक्षा मानकों के ज़रिए भारत में बाँधों की सुरक्षा और प्रबन्धन सुधारने में सहयोग दे रहा है.
© World Bank Group विश्व बैंक आधुनिक तकनीक और बेहतर सुरक्षा मानकों के ज़रिए भारत में बाँधों की सुरक्षा और प्रबन्धन सुधारने में सहयोग दे रहा है.

बाढ़ और सूखे से सुरक्षा

बाढ़ और सूखे के प्रबन्धन में बाँध अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन भारत के कई बड़े बाँध अब काफ़ी पुराने हो चुके हैं.

देश के लगभग 5 हज़ार बड़े बाँधों में से क़रीब 300 बाँध, सौ वर्ष से अधिक पुराने हैं. इनमें से कई को उच्च जोखिम वाली संरचनाओं में गिना जाता है.

वर्ष 2012 से विश्व बैंक आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा मानकों और बदलते मौसम के अनुरूप दिशानिर्देशों के ज़रिए भारत को बाँधों की सुरक्षा और प्रबन्धन सुधारने में सहयोग दे रहा है.

विश्व बैंक असम, कर्नाटक और बिहार में बाढ़ और सूखे से निपटने की क्षमता भी मज़बूत कर रहा है. इन प्रयासों में तटबन्ध और जल निकासी जैसी पारम्परिक व्यवस्थाओं के साथ प्रकृति-आधारित समाधान और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

बेंगलुरु में योजनाकारों को बाढ़ की सम्भावित स्थितियों का आकलन करने और अधिक प्रभावी बचाव उपाय तैयार करने में मदद दी जा रही है.

इन कार्यक्रमों में सरकारी एजेंसियों और प्रान्तों के बीच बेहतर तालमेल पर भी ज़ोर है, क्योंकि बाढ़ और सूखे का असर अक्सर पूरे नदी क्षेत्र पर पड़ता है.

भारत में गंगा नदी पर सूर्योदय, नदी के किनारे मंडपों और दीपक स्तंभों से सुसज्जित एक घाट के साथ।
© UNEP विश्व बैंक गंगा नदी तंत्र के पुनर्जीवन के उद्देश्य से भारत के प्रमुख ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम को सहयोग दे रहा है.

नदियों को पुनर्जीवन और बेहतर जल आँकड़े

भारत ने नदियों की पुनर्बहाली के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं. इनमें गंगा नदी भी शामिल है, जिसके विशाल नदी क्षेत्र पर 50 करोड़ से अधिक लोग निर्भर हैं.

विश्व बैंक ‘नमामि गंगेकार्यक्रम को समर्थन दे रहा है. इसका उद्देश्य जल गुणवत्ता सुधारना, नदी में आवश्यक जल प्रवाह बनाए रखना और प्रदूषण कम करना है.

कार्यक्रम के तहत प्रदूषण नियंत्रण में निजी पूँजी का इस्तेमाल किया जा रहा है और यह सुनिश्चित करने पर ज़ोर है कि अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र लम्बे समय तक प्रभावी ढंग से काम करें.

इस अनुभव से भारत को अन्य प्रमुख नदियों के पुनर्जीवन और प्रबन्धन के लिए भी उपयोगी मॉडल विकसित करने में मदद मिल सकती है.

विश्व बैंक समर्थित राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के तहत देशभर में स्वचालित और वास्तविक समय पर आधारित जल निगरानी प्रणाली भी विकसित की गई है.

इस प्रणाली में सतही जल, भूजल, जल गुणवत्ता और मौसम से जुड़ी जानकारी को एक साथ जोड़ा गया है. इससे बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने, जलाशयों का बेहतर संचालन करने और नदी क्षेत्रों की योजना बनाने में मदद मिलती है.

अब 1 लाख 19 हज़ार से अधिक जल और मौसम निगरानी स्टेशन राष्ट्रीय मंच से जुड़े हैं. वहीं, 18 से अधिक प्रान्तों ने जल सूचना केन्द्र स्थापित किए हैं या उन्हें मज़बूत कर रहे हैं.

जल सेवाओं में निवेश से समुदायों को अधिक सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है.
© World Bank Group जल सेवाओं में निवेश से समुदायों को अधिक सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है.

जल क्षेत्र में निजी निवेश

भारत के जल क्षेत्र को बड़े निवेश की ज़रूरत है. केवल शहरी जल व्यवस्था के लिए अगले 15 वर्षों में लगभग 150 अरब डॉलर की धनराशि की ज़रूरत होगी, जबकि जल भंडारण, सिंचाई और बाढ़ प्रबन्धन के लिए भी अतिरिक्त धन आवश्यक है.

फ़िलहाल यह क्षेत्र सरकारी सहायता पर बहुत निर्भर है और उपभोक्ता शुल्क, अक्सर संचालन व रखरखाव की लागत भी पूरी नहीं कर पाते.

विश्व बैंक समूह भारत सरकार के साथ मिलकर निजी निवेश और व्यावसायिक वित्त जुटाने में सहयोग कर रहा है.

महाराष्ट्र में विश्व बैंक और अन्तरराष्ट्रीय वित्त निगम नगरपालिका बॉन्ड, सार्वजनिक-निजी साझेदारियों और शोधित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं. इससे जल सेवाएँ अधिक टिकाऊ होंगी और पानी पर दबाव कम होगा.

बेहतर जल सेवाओं से समुदायों को सुरक्षित और भरोसेमन्द पानी मिल रहा है.
© World Bank Group बेहतर जल सेवाओं से समुदायों को सुरक्षित और भरोसेमन्द पानी मिल रहा है.

जल से समृद्धि की ओर

भारत में विकसित किए जा रहे ये मॉडल, लाखों लोगों के लिए जल सेवाएँ बेहतर बना रहे हैं और अन्य विकासशील देशों के लिए भी उपयोगी सीख दे सकते हैं.

विश्व बैंक समूह ने सफल पहलों का विस्तार करने, निवेश जुटाने और सभी नागरिकों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत के साथ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है.

रोज़गार, कृषि, शहरों, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जल की अहम भूमिका को देखते हुए, इसका बेहतर प्रबन्धन भारत के दीर्घकालिक विकास और समृद्धि के लिए निर्णायक होगा.

एक ग्रामीण गांव के परिवेश में, गुलाबी साड़ी पहने एक मुस्कुराती हुई भारतीय महिला धातु के नल से पीले और सफेद रंग के पानी के पात्र में पानी भर रही है, और बच्चे पास ही में यह सब देख रहे हैं।
© World Bank Group भरोसेमन्द जल आपूर्ति समुदायों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को बेहतर बना रही है.

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