सूडान युद्ध में यौन हिंसा के क्रूर और बड़े पैमाने पर प्रयोग को लेकर चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कहा है कि सूडान में अप्रैल 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से, युद्ध से जुड़ी यौन हिंसा व्यापक और बेहद क्रूर रूप धारण कर चुकी है, जिसके पीड़ितों, उनके परिवारों और समुदायों पर गहरे व दीर्घकालिक प्रभाव पड़ रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, सूडान में युद्ध की शुरुआत से इस वर्ष अप्रैल मध्य तक 18 में से 16 प्रान्तों में यौन हिंसा की 546 घटनाओं की पुष्टि की गई है. इनमें कम से कम 838 लोग प्रभावित हुए, जिनमें 15 को छोड़कर सभी महिलाएँ और लड़कियाँ थीं.
हालाँकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आँकड़े वास्तविक स्थिति का केवल एक छोटा हिस्सा हैं.
रिपोर्ट में पाया गया कि यौन हिंसा, युद्ध और विस्थापन के साथ-साथ फैली है और नागरिकों को भयभीत व मानसिक रूप से आहत करने के लिए लगातार इसका इस्तेमाल किया गया है.
यौन हिंसा का हथियार के रूप में इस्तेमाल
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि निष्कर्ष उनकी उस चेतावनी की पुष्टि करते हैं कि सूडान में यौन हिंसा का उपयोग युद्ध के हथियार के रूप में किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि यह एक युद्ध अपराध है और यदि इसे व्यापक या व्यवस्थित हमलों के हिस्से के रूप में अंजाम दिया गया हो, तो यह मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है.
रिपोर्ट में विशेष रूप से दारफ़ूर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वहाँ नागरिक आबादी के विरुद्ध व्यापक और व्यवस्थित हमलों के दौरान किए गए कुछ यौन हिंसा के कृत्य मानवता के विरुद्ध अपराध माने जा सकते हैं.
यौन हिंसा की अधिकांश पुष्टि की गई घटनाओं के लिए त्वरित सहयोग बल (RSF), उससे जुड़े लड़ाके और अरब मिलिशिया ज़िम्मेदार पाए गए.
कुछ मामलों में सूडानी सशस्त्र बलों और अन्य सशस्त्र समूहों का भी नाम सामने आया है.
सामूहिक बलात्कार के मामले
रिपोर्ट में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दासता, जबरन विवाह, जबरन वेश्यावृत्ति, यौन यातना और यौन शोषण के लिए मानव तस्करी जैसी गम्भीर घटनाओं को दर्ज की गई है. लगभग एक-चौथाई मामलों में सामूहिक बलात्कार शामिल था.
इसके अलावा, नागरिकों की आवाजाही नियंत्रित करने, अपहरण, हिरासत और यौन दासता के लिए यौन हिंसा के इस्तेमाल का लगातार चलन भी दर्ज किया गया है.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने कम से कम 85 महिलाओं और लड़कियों के ऐसे मामले दर्ज किए हैं, जिन्हें यौन दासता में रखकर घरेलू काम करने या आय अर्जित करने के लिए मजबूर किया गया.
बच्चों के साथ यौन हिंसा का मामला
रिपोर्ट के अनुसार, यौन हिंसा के पीड़ितों में बच्चे भी शामिल हैं और सबसे कम उम्र की पीड़िता केवल 9 वर्ष की थी.
साथ ही, कम से कम 13 पीड़ितों की मृत्यु हुई, जिनमें अधिकांश सामूहिक बलात्कार की घटनाओं के बाद जान से हाथ धो बैठे.
अनेक पीड़ितों को, स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव के कारण, गम्भीर चिकित्सीय जटिलताओं का सामना करना पड़ा, जबकि कम से कम 59 महिलाएँ और लड़कियाँ बलात्कार के बाद गर्भवती हुईं या उन्होंने बच्चों को जन्म दिया.
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि यौन हिंसा का इस्तेमाल कथित राजनैतिक या जातीय पहचान के आधार पर प्रतिशोध लेने के लिए किया गया.
पश्चिमी दारफ़ूर के मसालित समुदाय के अनेक पीड़ितों ने बताया कि हमलावर, बलात्कार करने से पहले उनकी जातीय पहचान पूछते थे.
मानवाधिकार प्रमुख ने इन घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराने तथा सभी दोषियों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि दंडमुक्ति का माहौल हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों के चक्र को और गहरा कर रहा है.