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इंडोनेशिया: विश्वसनीय और मज़बूत ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की राह पर

इंडोनेशिया के हरे-भरे उष्णकटिबंधीय जंगल में लगे सौर पैनलों का हवाई दृश्य, जिसके आसपास कई इमारतें दिखाई दे रही हैं।
UN Indonesia जावा, मदुरा और बाली द्वीपों पर सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग.

इंडोनेशिया: विश्वसनीय और मज़बूत ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की राह पर

जलवायु और पर्यावरण

ऊर्जा की बढ़ती क़ीमतों, आपूर्ति में व्यवधान और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, दुनिया भर के देशों के लिए चिन्ता का एक प्रमुख विषय बन गई है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, इंडोनेशिया में अधिक विश्वसनीय और मज़बूत ऊर्जा प्रणाली विकसित करने में सहयोग कर रही हैं, जिससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ रही है बल्कि स्थानीय समुदायों को बदलती जलवायु के प्रभावों के अनुरूप ढलने में भी मदद मिल रही है.

ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक विश्वसनीय बिजली ग्रिड बेहद अहम है. संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (UNOPS) बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, इंडोनेशिया में सरकारी बिजली कम्पनी पीएलएन के साथ मिलकर दो गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता की पहचान कर रहा है, जिसे राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जा सकता है.

सौर ऊर्जा और एक नए नियंत्रण केन्द्र की मदद से बिजली ग्रिड की स्थिरता मज़बूत होगी, बिजली कटौती में कमी आएगी और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी.

ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा

ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत करने का एक प्रभावी तरीक़ा बिजली वितरण के दौरान होने वाले नुक़सान को कम करना है.

UNOPS ने सरकारी साझीदारों के साथ मिलकर ऊर्जा-दक्षता आकलन और नीतिगत सुधारों में सहयोग दिया है. 

इन प्रयासों से घरों, व्यवसायों और उद्योगों को बिजली के अधिक कुशल उपयोग में मदद मिल रही है, जिससे कुल मांग घटती है और अधिक स्थिर व किफ़ायती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है.

एक नियंत्रण कक्ष में बैठा व्यक्ति कई स्क्रीनों पर डेटा की निगरानी कर रहा है, जिसमें पृष्ठभूमि में एक बड़ा डिजिटल डिस्प्ले ग्रिड मेट्रिक्स दिखा रहा है।
UN Indonesia इंडोनेशिया बिजली ग्रिड को उन्नत बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहा है.

खपत कम करने के प्रयास

इंडोनेशिया का औद्योगिक क्षेत्र, देश में ऊर्जा का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, इसलिए इस क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता बढ़ाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) अत्यधिक ऊर्जा प्रयोग करने वाले उद्योगों को ऊर्जा खपत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में सहायता प्रदान कर रहा है.

उर्वरक क्षेत्र में संसाधन-कुशल और स्वच्छ उत्पादन उपायों के ज़रिए भागीदार कम्पनियाँ, हर वर्ष अनुमानित 3 लाख 28 हज़ार टन कार्बन उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ परिचालन लागत में भी कमी ला रही हैं.

इसके अलावा, UNIDO उद्योग मंत्रालय के सहयोग से पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक पार्क विकसित करने में मदद कर रहा है, जहाँ ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और बेहतर कचरा प्रबन्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है.

वित्त जुटाने की पहल

इंडोनेशिया ने 2034 तक लगभग 43 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनुमानित 188 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से, सरकार के साथ मिलकर नवाचारी वित्तीय तंत्र विकसित कर रहा है.

इनमें सार्वजनिक और निजी निवेश को एक साथ जोड़ने वाली मिश्रित वित्तीय सहायता (blended finance) व्यवस्था भी शामिल है, ताकि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जा सके.

इंडोनेशिया के एक तटीय गांव के पास पानी में तैरती दो सौर ऊर्जा से चलने वाली नावों का हवाई दृश्य।
© UNDP ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत करने का एक प्रभावी तरीक़ा बिजली वितरण के दौरान होने वाले नुक़सान को कम करना है.

श्रमिकों को सहयोग

सुरक्षित ऊर्जा भविष्य का निर्माण केवल तकनीक और बुनियादी ढाँचे पर निर्भर नहीं करता, बल्कि लोगों पर भी आधारित है.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इंडोनेशिया के विभिन्न क्षेत्रों को ऊर्जा परिवर्तन के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के लिए तैयार करने में सहायता दे रहा है.

इसके तहत नए रोज़गार अवसरों की पहचान, कौशल विकास को बढ़ावा देने और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव से प्रभावित होने वाले श्रमिकों की आजीविका की सुरक्षा पर काम किया जा रहा है.

इन पहलों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता परिवर्तन समुदायों को मज़बूत बनाए और कोई भी श्रमिक पीछे नहीं छूटे.

तटीय समुदायों तक पहुँच

इंडोनेशिया के द्वीपीय क्षेत्रों में रहने वाले अनेक मछुआरा समुदायों के लिए ईंधन की बढ़ती क़ीमतें आजीविका पर सीधा असर डालती हैं.

UNDP ने 2,400 से अधिक छोटे मछुआरों को स्वच्छ प्रौद्योगिकियाँ अपनाने में सहायता प्रदान की है. इनमें सौर ऊर्जा से चलने वाले नौका इंजन, पर्यावरण-अनुकूल शीत भंडारण बॉक्स और बेहतर कोल्ड-स्टोरेज प्रणालियाँ शामिल हैं.

इन पहलों से ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ मछुआरा समुदायों की आय और जलवायु परिवर्तन के प्रति उनकी अनुकूलन क्षमता को भी मज़बूती मिल रही है.

इन नवाचारों से ईंधन की खपत और परिचालन लागत में कमी आई है, साथ ही मछुआरों की आय, ऊर्जा क़ीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति कम संवेदनशील हुई है.

मछुआरों को इन उपकरणों के संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि उनके लाभ लम्बे समय तक जारी रह सकें.

मज़बूत समुदायों का निर्माण

इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में अब भी कई समुदाय राष्ट्रीय बिजली ग्रिड की पहुँच से दूर हैं.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम  - UNDP ने इस चुनौती से निपटने के लिए, 22 दूरस्थ गाँवों में 1.1 मेगावाट क्षमता वाले सौर मिनी-ग्रिड स्थापित करने में सहयोग दिया है.

इससे 3,400 से अधिक परिवारों और सार्वजनिक संस्थानों को विश्वसनीय बिजली उपलब्ध हो रही है.

इन प्रणालियों से ऊर्जा लागत में 40 प्रतिशत तक की कमी आई है, जबकि प्रति वर्ष अनुमानित 1,800 टन कार्बन उत्सर्जन भी घटा है.

स्थानीय संचालकों को इन प्रणालियों के संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें आधी संख्या महिलाओं की भी है. इससे दीर्घकालिक रूप से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सकेगी.

इसी के साथ, UNOPS ने दक्षिण सुमात्रा में पर्यावरण मंत्रालय की ‘जलवायु गाँव’ पहल को भी सहयोग दिया है, जहाँ लगभग 2.85 लाख लोगों को नवीकरणीय ऊर्जा, कम उत्सर्जन वाली तकनीकों और सर्कुलर अर्थव्यवस्था से जुड़े तरीक़ों का प्रशिक्षण दिया गया है.

इंडोनेशिया के पश्चिम नुसा तेंगारा में सौर ड्रायर के प्रोटोटाइप के साथ लोगों का एक समूह फोटो खिंचवा रहा है।
© KUMPUL इंडोनेशिया के ऊर्जा परिवर्तन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है.

महिलाओं का सशक्तिकरण

इंडोनेशिया के ऊर्जा परिवर्तन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है.

संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था - यूएन वीमैन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने 400 से अधिक महिला उद्यमियों को हरित वित्त तक पहुँच और जलवायु-अनुकूल तकनीकों को अपनाने में सहायता प्रदान की है.

इन तकनीकों में सौर ड्राइंग सिस्टम, बायोगैस कुकिंग समाधान और सौर ऊर्जा से चलने वाले पानी के पम्प शामिल हैं, जो ऊर्जा लागत घटाने के साथ-साथ सतत आजीविका को भी बढ़ावा देते हैं.

इन पहलों का उद्देश्य आर्थिक अवसरों का विस्तार करना और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुँच बढ़ाना है, ताकि ऊर्जा परिवर्तन का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके.

ऐतिहासिक पहल

इंडोनेशिया में संयुक्त राष्ट्र रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर गीता सभरवाल कहती हैं कि संयुक्त राष्ट्र सरकार के साथ मिलकर, ग्रिड के आधुनिकीकरण से लेकर औद्योगिक दक्षता बढ़ाने, वित्तीय संसाधन जुटाने और समुदाय आधारित सौर प्रणालियों तक, देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए “ऐतिहासिक कार्य” कर रहा है.

उन्होंने कहा कि ये पहलें अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर निर्भरता कम करती हैं, आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाती हैं और सुनिश्चित करती हैं कि बड़े औद्योगिक केन्द्रों से लेकर दूरदराज़ गाँवों तक के समुदाय, एक अधिक सहनसक्षम और टिकाऊ भविष्य में योगदान दे सकें.