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सूडान: अल ओबेद पर हमले के ख़तरा, अत्याचारों को रोकने की अपील

सूडान में एक अस्थायी बस्ती में शरणार्थी और विस्थापित लोग रह रहे हैं, जहां अस्थायी तंबू और सामान एक शुष्क भूभाग में फैले हुए हैं।
© UNOCHA/Mohamed Elgoni इस युद्ध ने अफ़्रीका के सबसे बड़े देशों में से एक सूडान को दुनिया के सबसे गम्भीर मानवीय संकटों में धकेल दिया है.

सूडान: अल ओबेद पर हमले के ख़तरा, अत्याचारों को रोकने की अपील

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने सूडान के उत्तर कोर्दोफ़ान प्रान्त की राजधानी अल ओबेद पर हमले की आशंका के बारे में गम्भीर चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि यह हमला गम्भीर अन्तरराष्ट्रीय अपराधों का जोखिम उत्पन्न कर सकता है और पहले से ही भयावह मानवीय संकट को दीगर गहरा सकता है.

मानवाधिकार प्रमुख ने गुरूवार को कहा कि शहर के आसपास त्वरित समर्थन बल (RSF) लड़ाके और उनके सहयोगी बलों की बड़ी तैनाती की ख़बरों से स्थिति बेहद चिन्ताजनक हो गई है.

इसके साथ ही ड्रोन हमलों और तोप की गोलाबारी में भी तेज़ी आई है.

ग़ौरतलब है कि सूडान अप्रैल 2023 से युद्ध की चपेट में है, जब अतीत में सहयोगी रहे सूडानी सशस्त्र बलों और RSF के बीच लड़ाई भड़क उठी थी.

इस युद्ध ने अफ़्रीका के सबसे बड़े देशों में से एक सूडान को दुनिया के सबसे गम्भीर मानवीय संकटों में धकेल दिया है.

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करोड़ों लोग विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के कार्यालय (OCHA) के अनुसार, इस युद्ध के कारण अब तक 1 करोड़ 30 लाख से अधिक लोग देश के भीतर ही विस्थापित हो चुके हैं और लाखों लोग भुखमरी के कगार पर पहुँच गए हैं, जबकि देश के बड़े हिस्सों में मानवीय सहायता पहुँचाना बेहद सीमित हो गया है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को अपने प्रवक्ता के माध्यम से सम्भावित “आसन्न ज़मीनी हमले” को लेकर गम्भीर चेतावनी जारी की है.

उन्होंने कहा कि इस युद्ध में अनेक बार स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से समन्वित और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है.

महासचिव ने सभी प्रभावशाली पक्षों से अपील की है कि वे अपने प्रभाव का प्रयोग करके दीगर रक्तपात को रोकें.

उन्होंने चेतावनी दी कि अल फ़शर में हुई भयावह घटनाओं को अल ओबेद में दोहराने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

नागरिक ढ़ाँचों पर हमले

अल ओबेद पर पिछले दो सप्ताहों में अनेक ड्रोन हमले हुए हैं, जिनमें विशेष रूप से ईंधन स्टेशनों और ट्रकों को निशाना बनाया गया है.

इन हमलों में आम नागरिकों की मौत हुई है और बुनियादी सेवाओं तक पहुँच भी बाधित हो गई है.

वोल्कर टर्क ने कहा कि अल ओबेद पर सम्भावित सैन्य कार्रवाई गम्भीर अन्तरराष्ट्रीय अपराधों के होने के ख़तरे को जन्म देती है और पहले से ही कठिन स्थिति में फँसी नागरिक आबादी पर भयावह प्रभाव को और गहरा करती है.

उन्होंने कहा कि जिन देशों का इस स्थिति पर प्रभाव है, उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके इस विनाश को रोकने के लिए तुरन्त क़दम उठाएँ.

अल ओबेद की आबादी पिछले 18 महीनों से घेराबन्दी जैसी परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही है.

सुरक्षित आवाजाही की अपील

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अल फ़शर और उत्तरी दारफ़ूर के ज़मज़म विस्थापन शिविर में पिछले वर्ष दर्ज किए गए अत्याचारों का सीधा हवाला देते हुए कहा है कि अब वही प्रवृत्ति उत्तर कोर्दोफ़ान में दोहराई जा रही है.

उन्होंने कहा, “हमने यह प्रवृत्ति पहले भी देखी है. हम उन रोके जा सकने वाले अत्याचारों को दोबारा होने की अनुमति नहीं दे सकते, जिन्हें हमने पिछले वर्ष अल फ़शर और ज़मज़म शरणार्थी शिविर में दर्ज किया था.”

उच्चायुक्त ने सभी पक्षों से अपील की कि वे आम नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करें, जिन्हें बार-बार हिंसा से बचने के लिए अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है.

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यह स्थिति दुनिया के लिए एक गम्भीर संकेत है कि एक बड़ा मानवाधिकार संकट और गहरा मानवीय आपदा सामने आ सकती है.

यूएन प्रमुख ने कहा है कि बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बावजूद मानवीय सहायता कर्मी कोर्दोफ़ान क्षेत्र में राहत पहुँचाने का काम जारी रखे हुए हैं.

उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह अल ओबेद के रिहायशी इलाक़ों में हुए ड्रोन हमलों में एक मानवीय सहायता कर्मी समेत अनेक नागरिकों की मौत हुई है.

महासचिव ने बल देकर कहा कि मानवीय सहायता कर्मियों व राहत सामग्री की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए और राहत अभियानों को संरक्षण और सहयोग मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि व्यापक कोर्दोफ़ान क्षेत्र में राहत प्रयासों के लिए अल ओबेद एक महत्वपूर्ण केन्द्र है.