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तालेबानी फ़रमान से बाल विवाह को वैधता मिलने, महिलाओं की व्यथा बढ़ने की आशंका

अफगानिस्तान के एक क्लिनिक में बुर्का पहने दो महिलाओं और लड़कियों सहित अन्य महिलाएं और लड़कियां इंतजार कर रही हैं।
© UNFPA अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन ने महिलाओं व लड़कियों पर अनेक तरह की पाबन्दियाँ लगाई हुई हैं.

तालेबानी फ़रमान से बाल विवाह को वैधता मिलने, महिलाओं की व्यथा बढ़ने की आशंका

मानवाधिकार

अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान प्रशासन द्वारा पति-पत्नी के अलगाव, या वैवाहिक सम्बन्ध समाप्त करने की शर्तों पर जारी किए गए आधिकारिक आदेश से न केवल बाल विवाह को लाइसेंस मिलेगा, बल्कि महिलाओं और लड़कियों के लिए दुर्व्यवहार व पीड़ा भरे रिश्तों को छोड़ पाना भी कठिन हो जाएगा. संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है. 

अफ़ग़ानिस्तान में तथ्यत: प्रशासन (de facto authorities) तालेबान ने अप्रैल में फ़रमान संख्या 18 के तहत ये नियम तय किए थे कि महिलाएँ व लड़कियाँ, किन परिस्थितियों में अपने पति और विवाह से अलग होने की मांग कर सकती हैं.

इनमें गुमशुदगी, एक दूसरे से मेल नहीं बैठना, हठधर्मिता या धार्मिक आधार समेत अन्य कारण हैं, जिनकी क़ानूनी व्याख्या नहीं की गई है.

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मगर, विशेष रैपोर्टेयर के समूह का मानना है कि इस आदेश से महिलाओं व लड़कियों के दुर्व्यवहार या शोषण का शिकार होने का जोखिम बढ़ेगा. इससे शिया अल्पसंख्यक और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर भी असर पड़ने की आशंका है.

उनके अनुसार, नया फ़रमान दिसम्बर 2021 में जारी हुए आधिकारिक आदेश के विपरीत है, जिसमें विवाह के लिए एक वयस्क महिला की सहमति होने पर बल दिया गया था.

स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिन्ता जताई है कि लड़कियों का कम उम्र में विवाह, अतीत की सरकारों के दौरान भी एक चुनौती रहा है, लेकिन इस नए फ़रमान बाल विवाह को वैधता मिलने की सम्भावना प्रतीत होती है.

मानवाधिकार विशेषज्ञों के समूह का मानना है कि इस आधिकारिक आदेश से वैवाहिक सम्बन्धों समेत, संरक्षकों द्वारा ताक़त के ग़लत इस्तेमाल की आशंका बढ़ेगी और घरेलू दुर्व्यवहार मामलों में लड़कियों के लिए अपनी व्यथा व्यक्त करना मुश्किल हो जाएगा.

अगस्त 2021 में सत्ता पर तालेबान की वापसी के बाद से ही, अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर असर डालने वाले क़दम उठाए गए हैं. 

लड़कियों की माध्यमिक व उच्चतर शिक्षा पर प्रतिबन्ध है, सार्वजनिक जीवन में उनकी भागेदारी सीमित कर दी गई है, महिलाओं के कामकाज पर पाबन्दियाँ थोपी गई हैं और लाखों अफ़ग़ान महिलाएँ व लड़कियाँ शिक्षा के अधिकार से वंचित हो गई हैं. 

शारीरिक, मनोवैज्ञानिक हानि

फ़रमान में यह भी कहा गया है कि यौवनावस्था प्राप्त करने के बाद लड़की की चुप्पी को विवाह के लिए उसकी सहमति माना जा सकता है. 

इस फ़रमान के कुछ प्रावधानों के अनुसार, लड़कियों के लिए, यौवनावस्था में पहुँचने के बाद, वैवाहिक सम्बन्ध से अलग होने की कोशिश करने की अनुमति होगी. मगर इस व्यवस्था से प्रकट होता है कि कम उम्र में उनके विवाह को रोक पाना सम्भव नहीं होगा.

इससे उन्हें कई वर्षों तक शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, यौन और आर्थिक नुक़सान को झेलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिसके बाद ही वे किसी राहत की गुहार लगा सकती हैं.

स्वतंत्र विशेषज्ञों के अनुसार, हमें चिन्ता है कि तालेबान का यह फ़रमान, अपने पति या सास-ससुर की वजह से पीड़ित हो रही महिलाओं व लड़कियों की मदद को कठिन बना देगा. न तो वे ऐसे दुर्व्यवहार की जानकारी दे पाएंगी और न ही अलग होने की अनुमति मिलेगी.

विशेष रैपोर्टेयर के समूह ने ध्यान दिलाया है कि अफ़ग़ानिस्तान, महिलाओं और बच्चों के साथ बर्ताव के विषय में, अनेक सन्धियों का हिस्सा है और इनका पालन किया जाना आवश्यक है.

इनमें महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव का उन्मूलन, बाल अधिकार सन्धि, यातना व अन्य क्रूर, अमानवीय, अपमानजनक बर्ताव या दंड पर सन्धि समेत अन्य अन्तरराष्ट्रीय पहल हैं.

स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ

ध्यान दिला दें कि जिनीवा स्थित यूएन मानवाधिकार परिषद, मानवाधिकार विशेषज्ञों को, किसी देश में विशेष मानव अधिकार स्थिति या वैश्विक स्तर पर विशेष मानवाधिकार स्थिति से सम्बन्धित मामलों की जाँच-पड़ताल करके रिपोर्ट सौंपने के लिए नियुक्त करती है. 

विशेष रैपोर्टेयर संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं, उन्हें अपने काम के लिए संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन नहीं मिलता है और वे किसी सरकार या संगठन से स्वतंत्र होकर काम करते हैं.