‘हेट स्पीच’ अमानवीकरण की राह पर पहला क़दम, मुक़ाबला करने की अपील
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने, ऑनलाइन मंचों पर कमज़ोर समुदायों के ख़िलाफ़ वास्तविक दुनिया में हिंसा को बढ़ावा दिए जाने के सन्दर्भ में आगाह किया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग, कभी भी नफ़रत भरी भाषा को सही ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता.
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नफ़रत भरी भाषा का मुक़ाबला करने के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस (18 जून) पर अपने सन्देश में घोषणा भरे शब्दों में कहा, “नफ़रत भरी भाषा अमानवीकरण की राह पर पहला क़दम है.”
उन्होंने कहा कि ‘हेट स्पीच’ अक्सर राजनैतिक लाभ के लिए महिलाओं, प्रवासियों, शरणार्थियों, LGBTQIA+ लोगों, विकलांग व्यक्तियों और कई अल्पसंख्यक समूहों सहित विशिष्ट समूहों को निशाना बनाने का एक “विभाजन उपकरण” है.
“हमारे डिजिटल युग मेंनफ़रत भरी भाषा, अनियंत्रित मंचों द्वारा बढ़ाए जाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा उसकी गहनता बढ़ाए जाने के कारण, पहले से कहीं अधिक तेज़ी से फैलती है.”
एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “बहुत सारे ऐल्गोरिदम, आक्रोश और विभाजन को बढ़ावा देते हैं, 'Likes' के लिए झूठ को प्रोत्साहित करते हैं और 'Views' के लिए हिंसा को बढ़ावा देते हैं. ऑनलाइन गुमनामी भी अपराधियों को जवाबदेह ठहराना और कठिन बना देती है.”
स्त्री द्वेष पर क़ाबू पाना ज़रूरी
महिला कल्याण के लिए यूएन महिला संगठन - UN-Women में, महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को समाप्त करने वाले अनुभाग की प्रमुख कल्लियोपी मिंगेइरू ने यूएन न्यूज़ को बताया कि तेज़ी से हो रहे तकनीकी विकास, नफ़रत भरी भाषा और महिलाओं के बारे में ऑनलाइन मंचों पर साझा किए जाने वाले रूढ़िवादी व प्रतिगामी विचारों के प्रसार को आसान बना रहे हैं.
उन्होंने कहा, “मैनोस्फ़ीयर (Manosphere) कोई एक वेबसाइट या समुदाय नहीं है. यह ऐल्गोरिदम-संचालित सामग्री का एक व्यापक स्थान है, जो स्त्री-द्वेष (Misogyny) और लैंगिक समानता व महिलाओं के अधिकारों के विरोध को बहुत तेज़ी से फैला सकता है, और इसे काफ़ी सामान्य या स्वीकार्य बना देता है.”
कल्लियोपी मिंगेइरू ने यह स्वीकार किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने स्त्री-द्वेष को उत्पन्न नहीं किया है, यह भी माना कि यह महिलाओं के ख़िलाफ़ नफ़रत को बढ़ा रही है.
“उत्पीड़न करने वाले अब डीपफ़ेक, यौनिक कृत्रिम चित्र (sexualised synthetic images), किसी के व्यक्तिव या चेहरे की नक़ल करके तैयार की गई सामग्री (impersonation content) और छवि-आधारित दुर्व्यवहार के अन्य रूपों को तेज़ी से, सस्ते में और कम तकनीकी कौशल के साथ बना और फैला सकते हैं.”
हेट स्पीच पर यूएन रणनीति
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने लम्बे समय से इस तर्क को ख़ारिज किया है कि इस मुद्दे पर कड़ा रुख़ अपनाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है.
उन्होंने, वर्ष 2019 में, दुनिया भर में नफ़रत भरी भाषाओं में चिन्ताजनक वृद्धि के जवाब में, नफ़रत भरी भाषा पर संयुक्त राष्ट्र की रणनीति और कार्य योजना शुरू की थी.
इस रणनीति का उद्देश्य अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का सम्मान करते हुए नफ़रत भरी भाषा की पहचान करने, उन्हें रोकने और उनका मुक़ाबला करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के प्रयासों में समन्वय स्थापित करना है.
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश कहते हैं, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कभी भी हानिकारक सन्देश व सामग्री फैलाने के लिए बहाना नहीं होने चाहिए.”
हाल ही में, सूचना अखंडता के लिए संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक सिद्धान्त (UN Global Principles for Information Integrity) एक ऐसी दुनिया का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं जिसमें वैश्विक सूचना प्रवाह, अब कुछ देशों में स्थित मुट्ठी भर कम्पनियों के वर्चस्व में न रहे.
ये सिद्धान्त इस बात की हिमायत करते हैं कि लोगों का, अपनी पसन्द के मीडिया, अपने ऑनलाइन अनुभवों और उनके व्यक्तिगत डेटा के उपयोग पर अधिक नियंत्रण होना चाहिए.
प्रमुख कार्यक्रम
संयुक्त राष्ट्र, नफ़रत भरी भाषा का मुक़ाबला करने के अन्तरराष्ट्रीय दिवस से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित कर रहा है:
- बुधवार, 17 जून: नफ़रत के चक्र को तोड़ना: योरोप में रोमा के अधिकर और आवाज़ें - इसका उद्देश्य योरोप में रोमा आबादी के ऐतिहासिक और वर्तमान भेदभाव की ओर ध्यान आकर्षित करना और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान रोमा समुदाय के ख़िलाफ़ किए गए जघन्य अपराधों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.
- गुरूवार, 18 जून: हेट स्पीट का मुक़ाबला करने में साझेदारी की शक्ति: यह नफ़रत भरी भाषा का मुक़ाबला करने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण और उपकरणों पर ज़ोर देने के साथ-साथ, साझेदारी और गठबन्धन बनाने पर केन्द्रित है.
- शुक्रवार, 19 जून: कला स्मृतियाँ: संस्कृति गवाह और रोकथाम के रूप में - यह एक वर्चुअल चर्चा होगी जिसमें यह तलाश करने की कोशिश की जाएगी कि कला किस तरह कठिन इतिहासों से जुड़ती है और स्मृति, न्याय व रोकथाम में योगदान देती है. यह यहूदी जनसंहार (Holocaust), अटलांटिक पार दास व्यापार, रवांडा में तुत्सी समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ जनसंहार और स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार से जुड़े कलाकारों और विशेषज्ञों को एक साथ लाएगा.