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ईरान-अमेरिका सहमति पर ब्यौरे की प्रतीक्षा, होर्मुज़ जलमार्ग में सहायता गलियारे का आग्रह

होर्मुज जलडमरूमध्य का उपग्रह दृश्य, जो अरब प्रायद्वीप और ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप के बीच संकीर्ण जलमार्ग दिखाता है।
© NASA/GSFC/Jacques Descloitres 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' की सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीर.

ईरान-अमेरिका सहमति पर ब्यौरे की प्रतीक्षा, होर्मुज़ जलमार्ग में सहायता गलियारे का आग्रह

मानवाधिकार

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच हिंसक टकराव को समाप्त करने पर सहमति बन गई है और इस सप्ताह के अन्त तक एक नए शान्ति समझौते पर हस्तारक्षर होने की सम्भावना है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने ज़ोर देकर कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों की आवाजाही को जल्द से जल्द फिर शुरू किए जाने की आवश्यकता है, और वैश्विक भूख संकट को टालने के लिए एक सहायता गलियारे को भी स्थापित किया जाना होगा.   

स्विट्ज़रलैंड के जिनीवा शहर में मानवाधिकार परिषद में मानवाधिकार मामलों के लिए उप उच्चायुक्त अवा डाबो ने सोमवार को बताया कि संकरे होर्मुज़ जलमार्ग में असुरक्षा व्याप्त है. इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बन्दरगाहों का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों की नाकेबन्दी की हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति नैटवर्क में उथलपुथल मची हुई है.

वर्तमान परिस्थितियों की वजह से हवाई यातायात और मानवीय सहायता के प्रवाह पर भी गम्भीर असर हुआ है, और इसने एक ऐसे व्यापक संकट को जन्म दिया है, जिससे मध्य पूर्व क्षेत्र और उससे इतर भी लोग प्रभावित हैं. तेल, गैस, उर्वरक समेत खाद्य सामग्री की भी क़िल्लत हो रही है और महंगाई बढ़ रही है.

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उप उच्चायुक्त अवा डाबो ने आगाह किया कि अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि होर्मुज़ जलमार्ग को नहीं खोला गया तो विश्व में सबसे नाज़ुक अर्थव्यवस्थाओं में खलबली मच सकती है, निर्धनता बढ़ेगी और लाखों-करोड़ों लोग भूख के गर्त में धँस जाएंगे.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP), यूएन खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) को संसाधन मुहैया कराए जाने होंगे ताकि वैश्विक खाद्य सुरक्षा संकट की रोकथाम की जा सके.

यूएन के जिनीवा कार्यालय में संयुक्त अरब अमीरात के स्थाई प्रतिनिधि जमाल अल मुशारख़ ने भरोसा जताया कि मध्य पूर्व संकट पर जारी वार्ताओं से हमलों पर विराम लग सकेगा.

28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर बमबारी की गई थी, जिसके बाद ईरान ने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर ड्रोन व मिसाइल हमले किए थे. संयुक्त अरब अमीरात को 3 हज़ार से अधिक बैलेस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल व ड्रोन से निशाना बनाया गया.

वहीं, ईरान के राजदूत अली बाहरेनी ने अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत उनके देश ने ताबड़तोड़ हवाई बमबारी के बीच आत्म-रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल किया है. 

उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने चुनौतियों के बावजूद अन्तत: युद्धविराम को स्वीकार किया है तो सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्रीय दायित्व के लिए अपने एहसास की वजह से. युद्ध का अन्त हो जाने से अब दुनिया को फिर स्कूलों व छात्रों पर अत्याधुनिक हथियारों की दहाड़ को नहीं सुनना पड़ेगा.

समझौते के लिए समर्थन

यूएन मानवाधिकार उच्चायुकत वोल्कर टर्क ने शान्ति समझौते पर सहमति का स्वागत किया और सभी पक्षों से टकराव का अन्त करने और एक स्थाई युद्धविराम के लिए प्रयासों का आग्रह किया.

उन्होंने सोमवार को मानवाधिकार परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस नाज़ुक क्षण में, सभी पक्षों को अधिकतम संयम बरतना होगा, युद्धविराम को मज़बूती देने की कोशिशें करनी होंगी और इसे एक व्यापक शान्ति समझौते में बदलना होगा. 

उच्चायुक्त टर्क ने ध्यान दिलाया कि युद्ध के पहले दिन, ईरान के मिनाब में स्थित एक स्कूल पर हुए हमले में 150 से अधिक लोग मारे गए थे, जिनमें एक बड़ी संख्या बच्चों की थी. उन्होंने अमेरिका से इस घटना की जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का आग्रह किया है.

इससे पहले, यूएन महासचिव ने रविवार को जारी अपने एक वक्तव्य में इस सहमति की घोषणा का स्वागत करते हुए, इसे हिंसक टकराव पर विराम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम बताया था.

उनके अनुसार, यह सहमति तत्काल व स्थाई युद्धविराम को अमल में लाने, होर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग को फिर से खोलने और वार्ता को आगे बढ़ाने का फ़्रेमवर्क प्रदान करती है. 

नाविकों की व्यथा

इस बीच, अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने शान्ति समझौते पर सहमति को, इस महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग में जहाज़ों और समुद्री नाविकों की सुरक्षा को बहाल करने के लिए उठाया गया एक अहम क़दम बताया है.

साथ ही, इससे आवाजाही की स्वतंत्रता के बुनियादी सिद्धान्त की रक्षा करने में भी मदद मिलेगी.

इस टकराव के दौरान, फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाले होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर जहाज़ों की आवाजाही ठप हो गई थी, जिससे बड़े पैमाने पर तेल, गैस, उर्वरक व अन्य सामान की आपूर्ति पर गहरा असर हुआ.

यह समुद्री मार्ग तेल व द्रव्यीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इस व्यवधान की वजह से अनेक देशों में अर्थव्यवस्था पर भीषण असर हुआ था और महंगाई उछाल पर थी. 

लेबनान में हिज़बुल्लाह द्वारा ईरान के समर्थन में इसराइल पर रॉकेट हमले किए जाने के बाद, वहाँ इसराइली सैन्य बलों ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की थी, जिससे लाखों आम नागरिक विस्थापित, सैकड़ों हताहत हुए थे और देश एक गहरे संकट में धँस गया था.