भारत: आवासीय स्कूलों में ख़सरे से बच्चों की सुरक्षा
भारत के छत्तीसगढ़ प्रदेश के चार आदिवासी ज़िलों में त्वरित निगरानी और स्कूल-आधारित टीकाकरण अभियान से, 51 हज़ार से अधिक बच्चों को ख़सरे से सुरक्षा मिली है. इससे उन इलाक़ों में ख़सरे के प्रकोपों पर क़ाबू पाने में मदद मिली, जहाँ बच्चों के लिए जोखिम सबसे अधिक था.
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के घने जंगलों में बसे गाँवों के लिए आवासीय स्कूल जीवनरेखा की तरह हैं. कठिन भूभाग और सुरक्षा चुनौतियों के कारण यहाँ कई जगहों तक पहुँचना आसान नहीं होता.
इन आवासीय स्कूलों को आश्रम स्कूल भी कहा जाता है और ये स्कूल, बहुत से आदिवासी परिवारों के लिए, बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ स्थिरता और बेहतर अवसर भी देते हैं. लेकिन 2024 में इन्हीं स्कूलों में एक गम्भीर स्वास्थ्य जोखिम सामने आया.
ऐसे स्कूलों और छात्रावासों में, जहाँ बच्चे साथ रहते, पढ़ते और रोज़मर्रा की गतिविधियाँ साझा करते हैं, संक्रामक बीमारियाँ तेज़ी से फैल सकती हैं, ख़ासतौर पर जब बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी हो.
जनवरी से अक्टूबर 2024 के बीच, चार ज़िलों के आवासीय स्कूलों में ख़सरे के 18 प्रकोपों की पहचान हुई, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों की चिन्ता बढ़ गई.
त्वरित निगरानी, लक्षित कार्रवाई
राज्य सरकार के नेतृत्व में तेज़ और समन्वित कार्रवाई शुरू की गई. ज़िला स्वास्थ्य अधिकारियों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से बुख़ार और चकत्तों की निगरानी प्रणाली को मज़बूत किया.
WHO के राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य समर्थन नैटवर्क ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर संक्रमण की जल्द पहचान में सहयोग दिया.
जाँच दलों ने ज़िला अधिकारियों के साथ मिलकर उच्च जोखिम वाले समूहों की पहचान की, संक्रमण के फैलाव का आकलन किया और ज़मीनी कार्रवाई को दिशा दी.
इस प्रयास में स्वास्थ्य, आदिवासी कल्याण और शिक्षा विभागों की संयुक्त भूमिका अहम रही. इन विभागों ने राज्य सरकार के नेतृत्व में सुनिश्चित किया कि उच्च जोखिम वाले आवासीय स्कूलों के बच्चों को ख़सरा-रूबेला, यानि MR वैक्सीन की अतिरिक्त ख़ुराक मिले.
टीकाकरण टीमें, बच्चों को दूर स्थित टीकाकरण केन्द्रों तक लाने के बजाय, सीधे स्कूलों और छात्रावासों तक पहुँचीं. इस तरह स्कूल और छात्रावास ही टीकाकरण केन्द्र बन गए, जिससे दूरी या अन्य चुनौतियों के कारण बच्चों के छूटने की आशंका कम हुई.
बच्चों तक सीधी पहुँच
फ़रवरी से अक्टूबर 2024 के बीच, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और बस्तर ज़िलों के आठ सबसे प्रभावित प्रशासनिक क्षेत्रों में लक्षित प्रकोप-प्रतिक्रिया टीकाकरण अभियान चलाया गया.
इस अभियान के तहत इन क्षेत्रों के सभी आवासीय स्कूलों के बच्चों को MR वैक्सीन की अतिरिक्त ख़ुराक दी गई.
आवासीय संस्थानों में रहने वाले 51 हज़ार से अधिक स्कूली उम्र के बच्चों को इस अभियान से सुरक्षा मिली. बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से स्कूलों और आसपास के समुदायों में संक्रमण आगे फैलने के जोखिम को कम करने में मदद मिली.
इस अभियान से शिक्षकों, बच्चों और परिवारों का भरोसा भी मज़बूत हुआ.
एक आवासीय स्कूल के शिक्षक ने कहा, “जब टीकाकरण टीमें सीधे स्कूल पहुँचीं, तो हमें और बच्चों के परिवारों को भरोसा मिला कि यहाँ रहने वाले बच्चे सुरक्षित हैं.”
कठिन परिस्थितियों में बच्चों की सुरक्षा
भारत में WHO के प्रतिनिधि डॉक्टर यवान जे-एफ़ ह्यूटिन ने कहा कि इस कार्रवाई ने मज़बूत निगरानी और तेज़, लक्षित प्रयासों का महत्व दिखाया.
“बस्तर के ज़िला अधिकारियों के साथ हमने मिलकर सीखा है कि मज़बूत निगरानी और तेज़, लक्षित कार्रवाई सबसे कठिन चुनौतियों का सामना कर सकती है और बच्चों तक टीके सीधे वहाँ पहुँचा सकती है जहाँ वे रहते हैं, ताकि प्रकोप के समय वे सुरक्षित रह सकें.”
छत्तीसगढ़ में यह प्रयास दिखाता है कि जटिल परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य प्रणालियाँ तेज़ी से काम कर सकती हैं और बच्चों तक सीधे पहुँच सकती हैं.
निगरानी, स्थानीय नेतृत्व एवं स्कूल-आधारित टीकाकरण को साथ लाकर, इस अभियान ने बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करने और उनके लिए अधिक सुरक्षित भविष्य की सम्भावना मज़बूत करने में मदद की.
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