स्थिरता के आभास के बावजूद, अफ़ग़ानिस्तान 'मानवीय व आर्थिक चुनौतियों की चपेट में'
अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि तालेबान प्रशासन के दौरान देश में सुरक्षा हालात अपेक्षाकृत बेहतर हुए हैं, लेकिन मानवीय स्थिति अब भी निरन्तर बिगड़ रही है, महिलाओं व लड़कियों पर पाबन्दियों से उनका जीवन दूभर है और आर्थिक दबावों की वजह से भविष्य अनिश्चित नज़र आ रहा है.
अफ़ग़ानिस्तान में यूएन मिशन (UNAMA) की विशेष उप प्रतिनिधि जॉर्जेट गैगनॉन ने सोमवार को सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए सदस्य देशों को वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराया.
उन्होंने देश के विभिन्न इलाक़ों का दौरा करने के बाद अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि स्थानीय समुदाय विशाल कठिनाई से जूझ रहे हैं.
विशेष उप प्रतिनिधि के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में तथ्यत: प्रशासन (de facto) तालेबान ने क्षेत्रीय व प्रशासनिक नियंत्रण को मज़बूती दी है और अब देश में कोई सशस्त्र या राजनैतिक चुनौती नहीं है. मगर, दिखाई दे रहे इस स्थिरता के भाव के पीछे गहरे जोखिम छिपे हुए हैं.
जॉर्जेट गैगनॉन ने कहा कि यहाँ जनसांख्यिकी व आर्थिक दबाव बढ़ रहे हैं, जोकि बड़ी चिन्ता का विषय हैं. 59 लाख अफ़ग़ान नागरिक वर्ष 2023 के बाद ईरान, पाकिस्तान व अन्य देशों से वापिस लौटे हैं और 28 लाख इस वर्ष वापसी कर सकते हैं.
हालांकि यहाँ सीमित अवसर हैं और स्थानीय समुदाय पहले से ही भीषण दबाव से गुज़र रहे हैं.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि अफ़ग़ानिस्तान, विश्व के सबसे बड़े मानवीय संकटों में है और इस वर्ष 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी.
महिलाओं व लड़कियों पर अंकुश
विशेष उप प्रतिनिधि ने कहा कि दैनिक जीवन में महिलाओं व लड़कियों पर पाबन्दियाँ गहरा रही हैं, जिसके दीर्घकाल में हानिकारक नतीजे हो सकते हैं. 7 से 18 वर्ष की 38 लाख लड़कियाँ स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर हैं.
“हर वर्ष, 2.5 लाख अतिरिक्त लड़कियों को स्थाई रूप से माध्यमिक शिक्षा के दायरे से बाहर कर दिया जाता है, जिससे प्रतिभाओं व सम्भावनाओं से परिपूर्ण एक पीढ़ी को वंचित किया जा रहा है.”
जॉर्जेट गैगनॉन के अनुसार, बढ़ती पाबन्दियों की वजह से अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था को भी क्षति पहुँची है और स्वास्थ्य व शिक्षा समेत अन्य क्षेत्र कमज़ोर हुए हैं.
उन्होंने तालेबान प्रशासन से महिलाओं को प्रभावित करने वाली पाबन्दियों को वापिस लेने की अपील की है, जिसमे यूएन कार्यालय परिसर से अफ़ग़ान महिला कर्मचारियों को प्रवेश की अनुमति देना भी है.
आधी आबादी की सहायता
यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) में संकट मामलों में कार्रवाई के लिए विभाग की निदेशक ऐडेम वोसोर्नु ने आगाह किया कि अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय स्थिति निरन्तर बिगड़ रही है. हिंसक टकराव, भूख, जलवायु व्यवधान जैसी चुनौतियाँ गहरा रही हैं जबकि वित्तीय संसाधनों की कमी है.
“अफ़ग़ानिस्तान, विश्व के सबसे विशाल और सबसे जटिल मानवीय संकटों में है. देश की लगभग आधी आबादी को मदद की ज़रूरत है.”
उन्होंने बताया कि इस वर्ष के आरम्भ में, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर लड़ाई फिर से भड़क उठी थी, जिसकी वजह से 1 लाख से अधिक लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए. पहले से ही सम्वेदनशील परिस्थितियों में जीवन गुज़ार रहे समुदाय कई स्पताह के लिए सहायता से कट गए.
निदेशक वोसोर्नु के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में भूख बढ़ती जा रही है, 47 लाख लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं, जोकि पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है. वहीं 37 लाख बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं.
विशेष उप प्रतिनिधि गैगनॉन ने ज़ोर देकर कहा कि देश में सीमित स्तर पर ही प्रगति दर्ज की गई है, लेकिन निरन्तर सम्पर्क व बातचीत ज़रूरी है, तब भी जब बेहतरी की ओर धीमी गति से ही बढ़ा जा रहा हो.