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बांग्लादेशी राजनयिक ख़लीलुर रहमान, महासभा के 81वें सत्र के लिए अध्यक्ष निर्वाचित

खलीलुर रहमान संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक सत्रसभा को संबोधित कर रहे हैं।
UN Photo/Eskinder Debebe बांग्लादेश के विदेश मंत्री ख़लीलुर रहमान, यूएन महासभा के 81वें सत्र के लिए अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं, जिसके बाद उन्होंने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया.

बांग्लादेशी राजनयिक ख़लीलुर रहमान, महासभा के 81वें सत्र के लिए अध्यक्ष निर्वाचित

यूएन मामले

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ख़लीलुर रहमान को संयुक्त राष्ट्र महासभा के आगामी 81वें सत्र के लिए अध्यक्ष चुना गया है. उन्होंने निर्वाचित होने के बाद कहा कि वह इस दायित्व को एक ऐसे क्षण में सम्भालेंगे जब अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था दबाव में है, और इसके मद्देनज़र, उनका कार्यकाल भरोसे की बहाली, रूपान्तरकारी बदलावों के प्रबन्धन और सर्वजन के लिए वादों को साकार करने पर केन्द्रित होगा.

जनरल असेम्बली हॉल में मंगलवार को हुए गोपनीय मतदान में बांग्लादेश के विदेश मंत्री को 99 वोट मिले, जबकि साइप्रस के उनके प्रतिद्वंद्वी आन्द्रेयास काकोरिस को 91 मत हासिल हुए. 193 सदस्य देशों वाली यूएन महासभा में कुल 190 वोट डाले गए और कोई मत अमान्य नहीं था.

यूएन महासभा की वार्षिक अध्यक्षता, भौगोलिक आधार पर 5 क्षेत्रीय समूहों के बीच बारी-बारी से साझा की जाती है और सितम्बर 2026 से आरम्भ होने वाले 81वें सत्र की बागडोर की उम्मीदवारी इस वर्ष एशिया-प्रशान्त समूह के पास थी. 

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विदेश मंत्री ख़लीलुर रहमान अपना एक वर्षीय कार्यकाल 8 सितम्बर को शुरू करेंगे, और उनकी अध्यक्षता के दौरान ही यूएन में नए महासचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा. वर्तमान महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कार्यकाल 31 दिसम्बर 2026 को समाप्त हो रहा है.

ख़लीलुर रहमान ने चार दशकों से अधिक समय से एक राजनयिक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान की है और इस वर्ष फ़रवरी में ही उन्होंने बांग्लादेश के विदेश मंत्री का दायित्व सम्भाला था. इससे पहले, वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रोहिंग्या मुद्दे पर उच्च प्रतिनिधि रह चुके हैं.

अन्तरराष्ट्रीय प्रणाली पर दबाव

बांग्लादेशी राजनयिक ने निर्वाचित होने की घोषणा के बाद अपने सम्बोधन में कहा कि वह इस पद को विनम्रता व सम्मान के साथ ग्रहण करेंगे, एक ऐसे क्षण में जब अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास पर दबाव बढ़ रहा है.

उन्होंने सचेत किया कि संयुक्त राष्ट्र अपनी स्थापना का 9वाँ दशक एक ऐसे समय में शुरू करेगा, जब संगठन अनेक मोर्चों पर परीक्षाओं का सामना कर रहा है.

“एक साथ मिलकर, ये चुनौतियाँ, अपने वादों को साकार करने के लिए हमारे संगठन की क्षमता पर सार्वजनिक भरोसे व विश्वास को कमज़ोर करती हैं.”

अहम प्राथमिकताएँ

विदेश मंत्री ख़लीलुर रहमान ने कहा कि उनका वादा, सभी सदस्य देशों के साथ सम्पर्क व बातचीत, पुलों के निर्माण और दरारों के बावजूद साझा ज़मीन की तलाश करना है.

साथ ही, उन्होंने यूएन चार्टर को सर्वोपरि रखने का संकल्प जताते हुए कहा कि उनके कार्यालय में भौगोलिक व लैंगिक सन्तुलन को बनाए रखा जाएगा और छोटे प्रतिनिधिमंडल की आवश्यकताओं को समर्थन प्रदान किया जाएगा. 

महासभा के 81वें सत्र के लिए उनकी थीम है: विश्वास की पुनर्स्थापना, परिवर्तन का प्रबन्धन: ऐसा संयुक्त राष्ट्र, जो सर्वजन की आवश्यकताओं को पूरा करे.

उन्होंने अपने कार्यकाल में छह विशिष्ट प्राथमिकताओं पर ध्यान केन्द्रित करने पर बल दिया है:

  • शान्ति व सुरक्षा
  • टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति में तेज़ी
  • जलवायु कार्रवाई व पर्यावरण संरक्षण
  • मानवाधिकार
  • उभरती टैक्नॉलॉजी की संचालन व्यवस्था
  • यूएन सुधार

राजनयिक रहमान ने शान्तिरक्षा में बांग्लादेश के अनुभव का उल्लेख करते हुए, टकरावों की रोकथाम के लिए कूटनीति, शान्तिनिर्माण व नागरिक संरक्षण प्रयासों के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान एक मंच पर बोल रहे हैं।
UN Photo/Eskinder Debebe यूएन महासभा का एक विहंगम दृश्य.

बढ़ती चुनौतियों का दौर 

यूएन महासभा के 80वें सत्र के लिए प्रमुख, ऐनालेना बेयरबॉक ने मतदान के बाद अपने सम्बोधन में कहा कि बहुपक्षीय कूटनीति के लिए यह असाधारण रूप से एक कठिन समय है. यूएन को न केवल चुनौतियों के तेज़ झोंको का सामना करना पड़ रहा है बल्कि संगठन पर अपार दबाव भी है. 

मुद्दों पर आम राय क़ायम करना निरन्तर मुश्किल होता जा रहा है और यूएन चार्टर का बचाव एक दैनिक आवश्यकता बन रहा है. उनके अनुसार, यूएन महासभा के अध्यक्ष की भूमिका अब केवल प्रक्रिया सम्बन्धी होने तक सीमित नहीं बची है और आगामी दिनों में भी अन्तरराष्ट्रीय माहौल के सरल होने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इन्हीं चिन्ताओं को दोहराते हुए कहा कि दुनिया, हिंसक टकरावों, दरारों, बढ़ती असमानताओं और जलवायु व्यवधान के दौर से गुज़र रही है. 

उनके अनुसार, टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेंडा को साकार करने की दिशा में प्रगति धीमी हो रही है, मानवीय सहायता उद्देश्यों व विकास के लिए वित्तीय क़िल्लत है और अन्तरराष्ट्रीय संस्थाएँ, वर्तमान वास्तविकताओं को परिलक्षित किए बग़ैर, 1945 के दौर में ही अटकी हैं.

महासचिव गुटेरेश ने नव-निर्वाचित अध्यक्ष की 81वें सत्र के लिए थीम को बहुपक्षवादी व्यवस्था में कार्रवाई की एक प्रेरणास्पद पुकार बताया है, जोकि उनके अनुसार, वैश्विक सहयोग को मज़बूती देने के संकल्प को दर्शाती है.