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लेबनान: अस्पताल पर हमला, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को लेकर गम्भीर चिन्ता

दक्षिणी लेबनान के तेबनीन में एक सड़क युद्ध से क्षतिग्रस्त इमारतों के मलबे और कचरे से भरी हुई है। पृष्ठभूमि में, तेबनीन सरकारी अस्पताल एक रेड क्रॉस के प्रतीक के साथ खड़ा है, जिसकी संरचना और आसपास का क्षेत्र संघर्ष से हुए नुकसान के संकेत दिखा रहे हैं।
© UNICEF लेबनान में युद्धविराम के बावजूद इसराइल के हमले जारी रहे हैं जिनमें सैकड़ों लोगों की मौतें हुई हैं और लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.

लेबनान: अस्पताल पर हमला, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को लेकर गम्भीर चिन्ता

शान्ति और सुरक्षा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), लेबनान के दक्षिणी शहर टायर (tyre) के एक अस्पताल पर सोमवार को हुए हमले की ख़बरों की जाँच कर रहा है. यह घटना ऐसे समय हुई है, जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा प्रतिष्ठानों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिन्ता गहरा रही है.

लेबनानी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जबल आमेल अस्पताल पर हुए हमलों में स्वास्थ्यकर्मियों सहित कम से कम 86 लोग घायल हुए हैं.

लेबनान में WHO के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दिनासिर अबुबकर ने बताया कि इन हमलों से अस्पताल के आपात विभाग और गहन चिकित्सा इकाई (ICU) को भारी क्षति पहुँची है.

उन्होंने मंगलवार को बेरूत से जानकारी देते हुए कहा कि जबल आमेल, दक्षिणी लेबनान में वर्तमान में संचालित कुछ गिने-चुने अस्पतालों में से एक है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमले

WHO के अनुसार, पिछले 3 महीनों में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगभग 190 हमलों की पुष्टि की गई है, जिनमें 128 स्वास्थ्यकर्मियों की मृत्यु हुई और 332 अन्य घायल हुए हैं. केवल पिछले एक सप्ताह में ही ऐसे 11 हमले दर्ज किए गए हैं.

डॉक्टर अब्दिनासिर अबुबकर ने कहा, “ये हमले न केवल लोगों की जान लेते हैं और उन्हें घायल करते हैं, बल्कि उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से भी वंचित कर देते हैं.”

उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में हिज़बुल्लाह और इसराइल के बीच बढ़े युद्ध का सबसे अधिक असर टायर प्रान्त की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा है. 

यहाँ के 3 प्रमुख अस्पतालों में से 2 - जबल आमेल और हिराम अस्पताल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जबकि तीसरा अस्पताल बढ़ती संख्या में घायल लोगों को इलाज प्रदान करने के कारण अत्यधिक दबाव में है.

डॉक्टर अबुबकर ने आगाह किया कि विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच गम्भीर रूप से प्रभावित हुई है, और अनेक मरीज़ों को अन्य बेहतर अस्पतालों तक पहुँचने में 48 घंटे तक की देरी का सामना करना पड़ रहा है.

लेबनान के तेबनीन में एक सड़क पर मलबे के बीच एक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त सफेद एम्बुलेंस टूटी खिड़कियों और गोली के छेदों के साथ खड़ी है, जो आपातकालीन सेवाओं पर संघर्ष के प्रभाव को दर्शाता है।
© UNICEF दक्षिणी लेबनान में एक क्षतिग्रस्त एम्बुलेंस बेकार पड़ी है.

जीवन और मृत्यु का सवाल

WHO प्रतिनिधि ने ज़ोर देकर कहा कि 6 अस्पताल अब भी प्रसूति सेवाएँ बहाल नहीं कर पाए हैं और फ़िलहाल केवल आपातकालीन उपचार प्रदान कर रहे हैं. 

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए उपचार में देरी, जीवन और मृत्यु के बीच का अन्तर साबित हो सकती है.”

उन्होंने विस्थापित लोगों के आश्रय स्थलों में बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर भी चिन्ता जताई, जहाँ मौजूदा समय में लगभग 1 लाख 30 हज़ार लोग युद्ध से बचकर इन आश्रयों में रह रहे हैं.

इसराइल की हालिया बेदख़ली चेतावनियों के बाद विस्थापन के मामलों में और वृद्धि हुई है.

इस बीच, WHO आश्रय स्थलों और मेज़बान समुदायों में संक्रामक रोगों की निगरानी कर रहा है. एजेंसी ने गम्भीर जलीय दस्त के मामलों में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति दर्ज की है.

बीमारियों का बढ़ता ख़तरा

डॉक्टर अबुबकर ने चेतावनी दी, “हम अब गर्मियों के मौसम में प्रवेश कर चुके हैं और ऐसे में हैज़ा फैलने का ख़तरा बढ़ सकता है.”

मानवीय ज़रूरतें मौजूदा सहायता प्रयासों से कहीं अधिक हैं, इसलिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वित्तीय समर्थन बनाए रखना बेहद ज़रूरी है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले बन्द होने चाहिए और स्वास्थ्यकर्मियों व चिकित्सा संस्थानों की सक्रिय सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए.”

साथ ही, उन्होंने स्थाई युद्धविराम और टिकाऊ शान्ति की अपील दोहराई.

2 मार्च से इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच मौजूदा युद्ध तेज़ होने के बाद से, लेबनान में लगभग 3 हज़ार 400 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और क़रीब 10 हज़ार 400 लोग घायल हुए हैं, जिनमें अधिकांश आम नागरिक हैं.

यूएन अधिकारी ने कहा, “अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से, वर्ष 2026 के ये महीने लेबनान के लिए सबसे अधिक घातक महीनों में रहे हैं.”

ग़ौरतलब है कि लेबनान और इसराइल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में 17 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसका पूरी तरह पालन किसी भी पक्ष ने नहीं किया. 

इस युद्धविराम की अवधि दो बार बढ़ाई गई, जिनमें सबसे हालिया विस्तार 16 मई को 45 दिनों के लिए किया गया था.