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'ऐल नीन्यो' जलवायु प्रभाव की दस्तक, चरम मौसम की आशंका गहराई - WMO

एथियोपिया के एक सूखे और रेगिस्तानी परिदृश्य में, एक महिला एक बड़े, पत्तों से रहित पेड़ के नीचे एक कुपोषित बच्चे को पकड़े हुए है।
OCHA/Charlotte Cans इथियोपिया में ऐल नीन्यो प्रभाव के कारण सूखा पड़ा है, जिससे हर परिवार प्रभावित हुआ है.

'ऐल नीन्यो' जलवायु प्रभाव की दस्तक, चरम मौसम की आशंका गहराई - WMO

जलवायु और पर्यावरण

प्रशान्त महासागर में ‘ऐल नीन्यो’ नामक जलवायु प्रभाव के कारण समुद्री जल का तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है, जिससे विश्व भर में तापमान और वर्षा सम्बन्धी रुझानों पर गहरा असर होने की आशंका प्रबल है. इसके मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों से समय पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मज़बूती देने का आग्रह किया है ताकि चरम मौसम घटनाओं के जोखिम की तैयारी की जा सके. 

हाल के दिनों में ऐसे जलवायु प्रभावों की पुष्टि हुई है, जिससे लगभग हर स्थान पर औसत से अधिक तापमान होने की सम्भावना है यह यह रुझान चरम मौसम को हवा दे सकता है.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने बताया है कि इस बात की 80 प्रतिशत सम्भावना है कि इस वर्ष जून और अगस्त महीने के दौरान ‘ऐल नीन्यो’ (El Niño) परिस्थितियाँ उभरेंगी, जबकि इस अवधि के बाद ऐसा होने की सम्भावना 90 फ़ीसदी तक बताई गई है.

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‘ऐल नीन्यो’, पृथ्वी पर जलवायु प्रणाली के मुख्य वाहकों में है. ‘ऐल नीन्यो’ प्रभाव तब उभरता है जब मध्य व पूर्वी विषुवतीय प्रशान्त महासागर (central and eastern Equatorial Pacific) की सतह का तापमान बढ़ता है, जोकि मोटे तौर पर हर 2 से 7 वर्ष के दौरान हो सकता है और इसका 9 से 12 महीनों के लिए जारी रहता है.

यह मार्च और जून के दौरान शुरू होता है और सबसे अधिक गहनता नवम्बर या फ़रवरी में दर्ज की जाती है. जिस वर्ष यह पनपता है उसके दूसरे वर्ष में इसके प्रभाव सबसे अधिक नज़र आते हैं.   

विश्व मौसम विज्ञान एजेंसी की महासचिव सेलेस्ते साउलो ने कहा कि यह अपडेट मायने रखता है, चूँकि ‘ऐल नीन्यो’ वैश्विक मौसम व जलवायु का एक बड़ा वाहक है. इसका असर, प्रशान्त महासागर से कहीं दूर तक पहुँचता है और यह कृषि, ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार, जल संसाधनों, सप्लाई चेन, आजीविकाओं पर असर डाल सकता है. 

अत्यधिक गर्मी की आशंका

प्रशान्त महासागर के उष्णकटिबन्धीय क्षेत्र में तापमान, औसत से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है, जिससे यह चिन्ता बढ़ी है कि ‘ऐल नीन्यो’ प्रभाव इस अत्यधिक गर्मी को और अधिक बढ़ाए. विश्व भर में पहले से ही सम्वेदनशील परिस्थितियों में जीवन गुज़ार रहे समुदायों के लिए यह जोखिम भरी स्थिति होगी.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने WMO ऐलर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दुनिया को इसे एक तात्कालिक जलवायु चेतावनी के तौर पर देखना होगा. 

इससे पहले, ‘ऐल नीन्यो’ प्रभाव को 2023-24 में देखा गया था, जोकि अब तक रिकॉर्ड पर दर्ज किए गए पाँच सर्वाधिक शक्तिशाली परिस्थितियों में है. इस वजह से, 2024 में वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड तापमान दर्ज किए गए थे.

WMO के अनुसार, अभी ऐसे साक्ष्य मौजूद नहीं हैं, जिनके आधार पर यह कहा जा सके कि जलवायु परिवर्तन के कारण ‘ऐल नीन्यो’ घटनाओं की आवृत्ति या गहनता बढ़ती है. मगर, यह उससे जुड़े हुए प्रभावों को और गहरा अवश्य बना सकती है, चूँकि अपेक्षाकृत गर्म महासागर और वातावरण में अतिरिक्त ऊर्जा व नमी पनपती है, जिससे ताप लहरें और अत्यधिक वर्षा समेत चरम मौसम घटनाएँ होती हैं. 

‘ऐल नीन्यो’ के लिए तैयारी

यूएन एजेंसी महासचिव सेलेस्ते साउलो ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि हम ‘ऐल नीन्यो’ को समझते हैं. “हम विज्ञान और अनेक देशों द्वारा बेहतर तैयारी में किए गए निवेश के परिणामस्वरूप कहीं बेहतर तैयारी कर सकते हैं.”

लेकिन ‘ऐल नीन्यो’ से इतर, चरम मौसम घटनाएँ होती हैं और उनसे निपटने के लिए और अधिक स्तर पर निवेश की आवश्यकता होगी.

WMO, विश्व भर में मौसम विज्ञान एजेंसियों के साथ मिलकर, आगामी महीनों में उभरती परिस्थितियों की निगरानी का कार्य जारी रखेगी, ताकि सरकारों, मानवीय सहायता एजेंसियों और अन्य जलवायु सम्वेदनशील क्षेत्रों में साक्ष्य आधारित निर्णय लिए जा सकें.

उन्होंने कहा कि समय से पहले मौसमी पूर्वानुमान और समय पूर्व चेतावनी, जीवनरक्षा के लिए अति-आवश्यक हैं और इससे अर्थव्यवस्थाओं व समुदायों पर होने वाले असर को कम किया जा सकता है.