UNEP: भीषण गर्मी से निपटने के लिए 50 से अधिक शहरों की साझा पहल
दुनिया भर के 50 से अधिक शहर भीषण गर्मी से लोगों को बचाने के लिए साथ आए हैं. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की इस नई पहल का उद्देश्य शहरों की तैयारी को मज़बूत करना है, ताकि वे जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और ताप लहरों से अधिक प्रभावी ढंग से निपट सकें.
विश्व पर्यावरण दिवस से पहले, Heat Action Day पर शुरू किए गए 50@50 अभियान के तहत अन्ताल्या, लागोस, मेलबॉर्न, मेंडोज़ा, पेरिस और यांगझोउ सहित कई शहर साथ आए हैं.
इस पहल का उद्देश्य शहरों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने, व्यावहारिक समाधान साझा करने और ख़तरनाक गर्मी से निपटने के लिए अपनी तैयारी को मज़बूत करने में मदद करना है.
यह पहल संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और पेरिस शहर ने साथ मिलकर शुरू की है. यह बड़े स्तर पर चलाए जा रहे Beat the Heat अभियान का हिस्सा है, जिसे बेलें में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP30) के दौरान शुरू किया गया था.
इसका उद्देश्य शहरों में भीषण गर्मी से बचाव और टिकाऊ शीतलन से जुड़ी कार्रवाई को तेज़ करना है.
यह कार्यक्रम ऐसे उपायों पर केन्द्रित है, जो सीधे लोगों को राहत पहुँचा सकें. इनमें सार्वजनिक स्थानों पर “शीतलन द्वीप” (cooling island) बनाना, हरित क्षेत्र बढ़ाना, पानी के फ़व्वारे और शीतलन केन्द्र स्थापित करना, पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मज़बूत करना, अधिक छायादार स्थान बनाना, साइकिल चलाने के लिए बेहतर ढाँचा तैयार करना, तथा गर्मी कम सोखने वाली परावर्तक सामग्री व शहरी डिज़ाइन का इस्तेमाल शामिल है.
भीषण गर्मी से बढ़ता जोखिम
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडरसन ने कहा है, “भीषण गर्मी से पहले ही दुनिया भर के शहरों में लोगों के दैनिक जीवन में बदलाव हो रहे हैं. लगभग हर जलवायु परिदृश्य में शहरों को ख़तरनाक स्तर की गर्मी का सामना करना पड़ेगा. इससे छोटे किसानों और समुदाय के निर्बल लोगों के लिए विशेष जोखिम पैदा हो रहा है.”
उन्होंने कहा कि 50@50 पहल, स्थानीय नेताओं को तेज़ी से कार्रवाई करने में मदद करती है, ताकि वे ऐसे व्यावहारिक समाधान अपना सकें जो लोगों की रक्षा करें, असमानता कम करें और शहरों को भीषण गर्मी के लिए अधिक सहनसक्षम बनाएँ.
वैश्विक तापमान बढ़ने के साथ, शहरों में गर्म लहरें ज़्यादा लम्बी, ज़्यादा तेज़ और ज़्यादा बार आ रही हैं. भीषण गर्मी से हर साल लगभग पाँच लाख लोगों की मौतें होती हैं.
इससे दिन के सबसे गर्म घंटों में स्कूल, परिवहन प्रणालियाँ, घर और सार्वजनिक स्थान, सभी असुरक्षित हो जाते हैं.
इससे बिजली और शीतलन की माँग भी बढ़ती है, असमानताएँ गहरी होती हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ता है. वायु प्रदूषण, ऊर्जा ढाँचे पर दबाव और शहरी अर्थव्यवस्थाओं की चुनौतियाँ इस संकट को और गम्भीर बना देती हैं.
शहरों के बीच अनुभव साझा करने की कोशिश
पेरिस के मेयर, इमैनुएल ग्रेगोआर ने कहा है, “भीषण गर्मी दुनिया भर के शहरों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. पेरिस में किए गए 50°C डिग्री तापमान में किए गए अभ्यास के तहत इस पहल से स्पष्ट सन्देश मिलता है - शहरों को भीषण गर्मी का पहले से अनुमान लगाने और अपने निवासियों की रक्षा करने के लिए मिलकर काम करना होगा. सहयोग हमारा सबसे शक्तिशाली साधन है.”
अगले एक वर्ष में, लगभग एक दर्जन शहर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), C40 शहरी जलवायु नेतृत्व समूह और पेरिस शहर के सहयोग से, भीषण गर्मी से निपटने की अपनी तैयारी का परीक्षण करेंगे. इसे लेकर पेरिस में पहले ही परीक्षण किया जा चुका है.
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 और उसके बाद भी जारी रहने वाली 50@50 पहल का उद्देश्य ऐसे शहरों का एक समुदाय बनाना है, जो शहरी गर्मी से निपटने और लोगों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करें.
इसका लक्ष्य शहरों को केवल गर्मी की आपात स्थितियों से निपटने तक सीमित न रखकर, उनकी व्यवस्थाओं को पहले से अधिक सुरक्षित और तैयार बनाना है.
भाग लेने वाले शहरों की पूरी सूची, विश्व पर्यावरण दिवस की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी.