यूक्रेन: हमलों से जूझ रहा ख़ारकीव शहर, बेहतर भविष्य के निर्माण में भी जुटा है
यूक्रेन के ख़ारकीव शहर में हर एक दिन अनिश्चितता के साथ शुरू होता है. हवाई हमलों के सायरन लोगों को नींद से जगा देते हैं, और ड्रोन व मिसाइलें रिहायशी इलाक़ों, औद्योगिक स्थलों व सड़कों को निशाना बनाते हैं. बमबारी के दौरान लोग घबराकर मेट्रो स्टेशनों में शरण लेते हैं, जबकि बच्चे भूमिगत स्थानों में शरण लेकर पढ़ाई करते हैं.
इस बर्बादी के बीच भी, यूक्रेन का दूसरा सबसे बड़ा शहर एक ऐसे काम में जुटा है, जो युद्ध के समय लगभग असम्भव लग सकता है - यानि बेहतर भविष्य की तैयारी.
ख़ारकीव के मेयर इगोर तेरेख़ोव कहते हैं, “हमें युद्ध के बावजूद पुनर्निर्माण करना होगा, क्योंकि अगर पुनर्निर्माण नहीं हुआ, तो केवल खंडहर बचेंगे, और जो लोग शहर छोड़कर गए हैं, वे वापस नहीं लौटेंगे.”
यूक्रेन में पूर्वोत्तर में सीमा के पास स्थित ख़ारकीव कभी उद्योग, विज्ञान, शिक्षा और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केन्द्र था. मगर 24 फ़रवरी 2022 को, रूस द्वारा पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से यह देश के सबसे अधिक क्षतिग्रस्त शहरों में से एक बन चुका है.
इगोर तेरेख़ोव के अनुसार, शहर में लगभग 13 हज़ार इमारतें क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुकी हैं, जिनमें लगभग 10 हज़ार रिहायशी इमारतें हैं. लगभग 1.60 लाख लोग अपने घर खो चुके हैं. “हर दिन गोलाबारी होती है, और यह भयावह है. लोग केवल जीवित रहने की जद्दोजहद से थक चुके हैं.”
रोज़ाना हो रहे हमलों के बीच, शहरी योजनाकार, वास्तुकार, इंजीनियर और अन्तरराष्ट्रीय संगठन, यूक्रेनी अधिकारियों के साथ मिलकर यह योजना बना रहे हैं कि युद्ध के बाद ख़ारकीव को किस रूप में फिर से बसाया जा सकता है.
प्रतीक्षा, विकल्प नहीं
इस प्रयास के केन्द्र में, योरोपीय क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग (UNECE) के नेतृत्व वाली एक पहल (UN4UkrainianCities) है, जो ख़ारकीव और दक्षिणी शहर मिकोलाइव के पुनर्बहाली एवं आधुनिकीकरण में मदद कर रही है.
इस परियोजना का उद्देश्य केवल आपात ज़रूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि शहरों को अधिक हरित बनाना, समझदारी व सहनसक्षम तरीक़े से फिर से बसाने में सहयोग देना भी है.
हालाँकि बहुत से बाहरी लोगों को, युद्ध के बीच दीर्घकालिक शहरी योजना बनाना जल्दबाज़ी लग सकता है. लेकिन ज़मीन पर काम कर रहे लोगों के लिए, इन्तज़ार करना कोई विकल्प नहीं है.
इस परियोजना की वास्तुकार और कार्यक्रम प्रबन्धक थमारा फ़ोर्टेस कहती हैं, “देश अब भी हमलों का सामना कर रहा है, और आपात कार्रवाई की बेहद ज़रूरत है. लेकिन साथ-साथ पुनर्बहाली एवं पुनर्निर्माण का काम होना भी ज़रूरी है.”
उनके अनुसार, आपात मरम्मत से, भविष्य के विकास में मदद मिलेगी. “अगर आप अभी कुछ ऐसा बनाते हैं, जिसमें दीर्घकालिक सोच शामिल नहीं है, तो दस साल बाद वह शहर की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा.”
“इसलिए हम शहरों की मदद कर रहे हैं कि वे केवल आपात स्थिति पर ही ध्यान न दें, बल्कि यह भी सोचें कि आज किए जा रहे काम, किस तरह भविष्य की योजना का हिस्सा बनेंगे.”
नई योजना
ख़ारकीव के भविष्य को एक नई मास्टर योजना के ज़रिये आकार दिया जा रहा है. इसमें टिकाऊ बुनियादी ढाँचे, किफ़ायती आवास, नए सार्वजनिक स्थलों और आर्थिक पुनर्बहाली पर ध्यान दिया गया है. इस परियोजना में दीर्घकालिक योजना को ऐसी पायलट परियोजनाओं से जोड़ा गया है, जिनमें नए विचारों को वास्तविक इलाक़ों में परखा जा रहा है.
इनमें सबसे महत्वाकाँक्षी प्रयासों में से एक उत्तरी साल्तिव्का पर केन्द्रित है - यह एक रिहायशी इलाक़ा है, जिसे युद्ध में भारी नुक़सान पहुँचा है.
यह काम एक वास्तुशिल्प प्रतियोगिता से शुरू हुआ था, लेकिन अब तकनीकी क्रियान्वयन के चरण में पहुँच गया है. पाँच रिहायशी इलाक़ों व एक किंडरगार्टन को ऊर्जा-कुशल ऊष्मा रोधन (insulation), मॉड्यूलर विस्तार और ढाँचागत मज़बूती के साथ दोबारा डिज़ाइन किया जा रहा है.
इसका लक्ष्य बहुत व्यावहारिक है - ऐसा विस्तृत तकनीकी दस्तावेज़ तैयार करना, जिसे शहरी प्रशासन धनराशि उपलब्ध होते ही दानदाताओं, निवेशकों या विकास बैंकों के सामने पेश कर सके.
थमारा फ़ोर्टेस फ़ोर्टेस कहती हैं, “हम अब अवधारणाओं से आगे बढ़कर क्रियान्वयन की ओर जा रहे हैं. हमारा काम केवल विश्लेषण और आकलन करना नहीं है, बल्कि शहरों को कुछ ऐसा देना भी है, जिसे वे सचमुच बना सकें.”
महत्वाकाँक्षी पहलें
ख़ारकीव के लिए बनाई जा रही योजना में पाँच बड़ी पायलट परियोजनाएँ शामिल हैं. इनका मक़सद शहर की विरासत को बचाना, उसे अधिक टिकाऊ बनाना और नए विचारों को अपनाना है.
एक परियोजना युद्ध में क्षतिग्रस्त ऐतिहासिक इलाक़े को फिर से सँवारने पर केन्द्रित है. इसमें पुराने भवनों को ऐसे रूप में तैयार किया जाएगा, ताकि उनका इस्तेमाल नागरिक और साँस्कृतिक गतिविधियों के लिए किया जा सके.
एक अन्य परियोजना के तहत, शहर की 25 किलोमीटर लम्बी नदी के किनारों को हरित सार्वजनिक स्थानों में बदलने की योजना है.
प्रमुख विश्वविद्यालयों के पास विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ा एक नया क्षेत्र विकसित करने की भी योजना है, ताकि युवजन को शहर में रोका जा सके और अर्थव्यवस्था को अधिक विविध बनाया जा सके.
इसके अलावा, कोयले पर निर्भर औद्योगिक क्षेत्रों को नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले स्वच्छ विनिर्माण केन्द्रों के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है.
यह काम केवल इमारतों और बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं है. UNECE और यूक्रेनी साझीदार राष्ट्रीय स्तर पर आवास नीतियों में सुधार पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें किराये के सामाजिक आवास तथा आवासीय भवनों के बेहतर प्रबन्धन से जुड़े क़ानून शामिल हैं.
निरन्तर ख़तरा
इस बीच, स्थानीय अधिकारी युद्ध की कठोर वास्तविकताओं का सामना कर रहे हैं. इहोर तेरेख़ोव धीमे स्वर में कहते हैं, “इसकी आदत डालना असम्भव है. लोग लगातार ख़तरे में जी रहे हैं.”
फिर भी, उनका मानना है कि शहर को फिर से बसाने और उसके भविष्य के बारे में सोचने का यही समय है. “लोग आज इस उम्मीद के साथ जी रहे हैं कि हम सब कुछ फिर से बनाएँगे.”
यह उम्मीद ख़ारकीव जैसे शहर में और भी अहम है, जो अपनी वास्तुकला विरासत के लिए जाना जाता है. शहर के संग्रहालयों, पुस्तकालयों और ऐतिहासिक इमारतों को भारी नुक़सान पहुँचा है.
इगोर तेरेख़ोव, प्रसिद्ध कोरोलेन्को राजकीय वैज्ञानिक पुस्तकालय और कला संग्रहालय के पास स्थित ऐतिहासिक इमारतों पर हुए हमलों को याद करते हैं.
“ये यूक्रेन की अनमोल धरोहरें हैं. कुछ इमारतों को बिल्कुल पहले जैसा बहाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन पर कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला हुआ था. लेकिन हम इस वास्तुकला को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.”
युद्ध के दौरान पुनर्निर्माण की कोशिशें भी बदलती रही हैं. थमारा फ़ोर्टेस के अनुसार, सबसे बड़ी सीख लचीलापन रही है. “कभी बिजली नहीं होती. कभी इंटरनैट नहीं होता. कभी लोग भूमिगत आश्रय स्थलों में होते हैं. इसलिए हमने सीखा कि परियोजना को शहरों की वास्तविकताओं के अनुसार लगातार ढालना पड़ता है.”
‘शहरों को तैयार रहना होगा’
यूक्रेन में युद्ध ने वास्तुकारों और योजनाकारों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि शहरों को संकट के समय किस तरह सुरक्षित बनाया जाए. ख़ारकीव में नई आवासीय परियोजनाओं में अब ऐसे भूमिगत स्थान बनाए जा रहे हैं, जिनका शान्ति के समय सामान्य उपयोग हो सके और हमलों के दौरान वे आश्रय स्थल बन सकें.
थमारा फ़ोर्टेस ने बताया कि, “शान्ति के समय यह पार्किंग स्थल हो सकता है. युद्ध के समय यह आश्रय स्थल बन जाता है.” यही सोच किंडरगार्टन और स्कूलों में भी अपनाई जा रही है, जहाँ कुछ स्थानों को भूमिगत कक्षाओं के साथ डिज़ाइन किया जा रहा है.
उनके अनुसार, इस सोच में फ़िनलैंड से मिली सीख भी शामिल है. वहाँ कई शहरों में नागरिक सुरक्षा ढाँचे को रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बनाया गया है. सामान्य समय में खेल, पार्किंग या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल होने वाली भूमिगत जगहें, ज़रूरत पड़ने पर जल्दी ही आपात आश्रय स्थलों में बदल सकती हैं.
थमारा फ़ोर्टेस का मानना है कि यह सोच यूक्रेन से बाहर भी उपयोगी हो सकती है, क्योंकि दुनिया भर के शहर युद्ध, जलवायु आपदाओं और अन्य संकटों का सामना कर रहे हैं.
वे कहती हैं, “संकट स्थानीय स्तर पर आता है - आपकी सड़क पर, आपके घर में. शहरों को तैयार रहना होगा.”
नए दृष्टिकोण की शुरुआत
ख़ारकीव में तैयारी का अर्थ अब केवल आश्रय स्थल बनाना या आपात मरम्मत करना नहीं है. इसका अर्थ है - समुदायों को बचाए रखना, शहर की पहचान की रक्षा करना, और लोगों को वहाँ रहने या किसी दिन वापस लौटने की वजह देना.
इगोर तेरेख़ोव कहते हैं, “हमारे शहर अब युद्ध से पहले जैसे नहीं रहेंगे. हमें एक नए दृष्टिकोण की ज़रूरत है.”
(ये साक्षात्कार अज़रबैजान के बाकू में 17 से 22 मई तक आयोजित 2026 विश्व शहरी मंच के 13वें सत्र के दौरान किए गए थे.)