वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

2025: हिंसक टकराव सम्बन्धी यौन हिंसा मामलों में दोगुनी वृद्धि, यूएन की चेतावनी

एक टाइल्ड फर्श पर सफेद फ्लिप-फ्लॉप्स पहने हुए बच्चे के पैरों का क्लोज़-अप।
© UNICEF हिंसक टकराव के दौरान यौन हिंसा को अब भी युद्ध के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल लाया जा रहा है.

2025: हिंसक टकराव सम्बन्धी यौन हिंसा मामलों में दोगुनी वृद्धि, यूएन की चेतावनी

शान्ति और सुरक्षा

पिछले वर्ष, विश्व भर में हिंसक टकराव सम्बन्धी यौन हिंसा के 10 हज़ार से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, जोकि 2024 के आँकड़े की तुलना में दोगुनी से भी अधिक संख्या है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अफ़्रीका, मध्य पूर्व, योरोप, और कैरीबियाई क्षेत्र में बलात्कार, यौन दासता व अगवा किए जाने को युद्ध के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल में लाया गया है.

संघर्षग्रस्त इलाक़ों में यौन हिंसा के विषय पर यूएन महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने शुक्रवार को, यूएन मुख्यालय में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि ये आँकड़े एक बढ़ते वैश्विक रुझान को दर्शाते हैं. 

इसके साथ ही, असुरक्षा, विस्थापन मामलों में उछाल आ रहा है और जीवित बचे व्यक्तियों के लिए वित्तीय संसाधन डगमगा रहे हैं, जिससे इस संकट को और हवा मिल रही है.

उन्होंने पत्रकारों को बताया कि 2025 के दौरान जिन मामलों में जानकारी जुटाई गई, उनमें यौन हिंसा को युद्ध, यातना, आतंकवाद, और राजनैतिक दमन के तौर-तरीक़े के रूप में इस्तेमाल किया गया. इस दौरान, अत्यधिक बर्बरता को अंजाम दिया गया और बड़े पैमाने पर महिलाओं व लड़कियों को निशाना बनाया गया.

इस रिपोर्ट में, 2025 में, हिंसक टकराव सम्बन्धी यौन हिंसा के 9,788 मामले दर्ज किए गए हैं. विशेष प्रतिनिधि ने कहा कि ये आँकड़े क्रूर वास्तविकता को सही मायने में परिलक्षित नहीं करते हैं.

नागरिक बने निशाना

रिपोर्ट बताती है कि हिंसक टकराव से प्रभावित 21 देशों में सरकारी और ग़ैर-सरकारी तत्वों ने बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दासता, जबरन विवाह, तस्करी, अगवा किए जाने समेत अन्य घटनाओं को अंजाम दिया.

महिलाएँ व लड़कियाँ, मुख्य रूप से इनका निशाना थीं, हालांकि पुरुषों व लड़कों को भी यौन हिंसा का शिकार बनाया गया, अक्सर हिरासत केन्द्रों में यातना देने के एक तरीक़े के तौर पर.

एलजीबीटीक्यूआई+ व्यक्तियों के लिए भी प्रताड़ना व उत्पीड़न का शिकार होने का जोखिम बहुत अधिक था. भुक्तभोगियों की आयु एक वर्ष से 70 वर्ष तक बताई गई है, और रिपोर्ट के अनुसार, विकलांगजन से सम्बन्धित मामलों में भी जानकारी एकत्र की गई है.

विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने बताया कि यौन हिंसा के साथ, चरम स्तर पर शारीरिक दुर्व्यवहार भी किया गया. बलात्कार के बाद हत्याएँ की गईं और जीवित बचे लोगों द्वारा आत्महत्या करने की भी घटनाएँ हुई हैं. 

“मूल रूप से, यह रिपोर्ट उन सभी जीवित बचे लोगों व समुदायों की मानव पीड़ा के बारे में है, जो युद्ध की परछाई में जीवन गुज़ार रहे हैं.”

एक व्यक्ति का क्लोज-अप, जो एक पैटर्न वाली पोशाक पहने हुए है और एक नीले पैंट पहने हुए छोटे बच्चे को पकड़े हुए है। पृष्ठभूमि में एक और बच्चा दिखाई दे रहा है।
©UNICEF /Jospin Benekire डीआर काँगो में एक माँ, जिसके साथ बलात्कार किया गया था, अपने 18 महीने के बच्चे को गले लगा रही है.

दबदबे का हथियार 

रिपोर्ट के अनुसार, संगठित आपराधिक समूहों समेत ग़ैर-सरकारी हथियारबन्द गुटों ने समुदायों और क्षेत्रों पर दबदबा क़ायम करने के लिए यौन हिंसा का इस्तेमाल करना जारी रखा. प्राकृतिक संसाधनों से प्रचुर इलाक़ों में भी यही रुझान देखा गया.

विस्थापित और शरणार्थी महिलाओं व लड़कियों के लिए उच्च जोखिम था, विशेष रूप से दूरदराज़ के व सीमावर्ती इलाक़ों में, जहाँ समर्थन के लिए व्यवस्था दरक चुकी है.

हिंसक टकराव से ग्रस्त इलाक़ों में छोटे हथियारों की व्यापक पैमाने पर उपलब्धता होने की वजह से यौन हिंसा को हवा मिलने की आशंका जताई गई है.

वहीं, मानवीय सहायता प्रयासों के लिए सीमित पहुँच होने, असुरक्षा और वित्तीय संसाधनों की क़िल्लत के कारण, दुर्व्यवहार मामलों में जानकारी जुटा पाना और जीवित बचे व्यक्तियों की मदद कर पाना कठिन हो गया.

77 पक्ष ज़िम्मेदार

रिपोर्ट की संलग्नक सूची में हिंसक टकराव सम्बन्धी यौन हिंसा मामलों में रुझान के लिए 77 पक्षों को ज़िम्मेदार माना गया है, जिनमें 62 ग़ैर-सरकारी सशस्त्र समूह हैं.

इनमें तीन ग़ैर-सरकारी हथियारबन्द गुटों को सूची में नया शामिल किया गया है, जोकि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) सक्रिय हैं. 

वहीं, रूसी सशस्त्र व सुरक्षा बलों और इसराइली सशस्त्र व सुरक्षा बलों को भी सूची में शामिल किया गया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा यौन हिंसा मामलों में जुटाई गई जानकारी में रुझानों और निष्कर्षों के आधार पर यह निर्णय लिया गया. 

इन दोनों पक्षों को, पिछले वर्ष ही रिपोर्टिंग की अवधि के दौरान, सूची में शामिल किए जाने की सम्भावना पर नोटिस जारी कर दिया गया था.

कार्रवाई की पुकार

रिपोर्ट में सुरक्षा परिषद और सदस्य देशों से आग्रह किया गया है कि इन मामलों की रोकथाम, जवाबदेही और जीवित बचे व्यक्तियों के लिए समर्थन को सुनिश्चित किया जाना होगा. अहम सिफ़ारिशें:

  • मानवीय सहायता उद्देश्य के लिए बेरोकटोक पहुँच पर बल
  • निगरानी व प्रतिबन्ध सम्बन्धी तंत्र के लिए व्यवस्था में विस्तार
  • यूएन मिशन में महिलाओं के संरक्षण सलाहकारों को समर्थन
  • मामलों की जाँच प्रक्रिया और अभियोजन कार्रवाई को मज़बूती
  • मेडिकल, मनोसामाजिक व क़ानूनी सेवाओं के लिए वित्तीय समर्थन

विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे मामलों से गुज़रने के बाद जीवित बचे व्यक्तियों, उनकी ज़रूरतों पर सदैव ध्यान केन्द्रित किया जाना होगा. 

उनके अनुसार, ये उल्लंघन मामले वैश्विक स्तर पर अंजाम दिए जा रहे हैं, जिनका भयावह असर होता है. इससे निपटने के लिए केवल राजनैतिक रुख़, क्षोभ और पहले से तैयार वृतान्तों से काम नहीं चलेगा, बल्कि अधिकारों, आवश्यकता, और गरिमा को बहाल करना होगा.