अफ़ग़ान लोगों को जबरन वापिस भेजने में व्यापक जोखिम, वोल्कर टर्क
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने अफ़ग़ान शरणार्थियों के मेज़बान देशों को आगाह किया है कि वो शरण चाहने वालों को उनकी इच्छा के विरुद्ध अफ़ग़ानिस्तान वापस नहीं भेजें क्योंकि ऐसा करना अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी क़ानून का उल्लंघन है.
वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को कहा है, "अफ़ग़ान महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को उन देशों से लगातार बाहर धकेला जा रहा है जहाँ उन्होंने सुरक्षा की गुहार लगाई थी.”
“उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अफ़ग़ानिस्तान लौटने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उन्हें गम्भीर ख़तरों में धकेला जा रहा है."
यूएन शरणार्थी एजेंसी - UNHCR के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक लगभग 2 लाख 70 हज़ार अफ़गान लोगों को मेज़बान देशों से बाहर निकालकर, अफ़ग़ानिस्तान भेजा जा चुका है, जिनमें से अधिकांश लोगों को ईरान और पाकिस्तान से भेजा गया है.
तुर्की और ताजिकिस्तान से भी कुछ अफ़ग़ान लोगों को जबरन वापिस भेजे जाने के मामले सामने आए हैं.
इनके अतिरिक्त, साल 2025 के दौरान ईरान से 12 लाख से अधिक और पाकिस्तान से 1 लाख 50 हज़ार अफ़ग़ान लोगों को जबरन अफ़ग़ानिस्तान भेजा गया था.
अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने 2025 में 'No Safe Heaven' (कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं) नामक एक रिपोर्ट जारी की थी.
इसमें पाया गया था कि जबरन अफ़ग़ानिस्तान लौटाए गए कई अफ़ग़ान लोगों को मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघनों का सामना करना पड़ा.
रिपोर्ट में वहाँ के वास्तविक सत्ताधारियों (तालेबान) द्वारा लोगों की मनमानी गिरफ़्तारियाँ, हिरासत, प्रताड़ना और दुर्व्यवहार का भी ज़िक्र किया गया था.
किसी को भी जबरन नहीं भेजा जाए
वोल्कर टर्क ने कहा है, "मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघनों के जोखिम वाले व्यक्तियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध अफ़ग़ानिस्तान वापस भेजना, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के मूल सिद्धान्त – Non-refoulment यानि किसी क जबरन वापस नहीं भेजे जाने के सिद्धान्त - के विपरीत है.
“मैं देशों से आग्रह करता हूँ कि वे अपने अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनी दायित्वों का पालन करें, अफ़ग़ान लोगों की रक्षा करें और कोई भी ऐसा क़दम नहीं उठाएँ जो उन्हें वापसी पर अपूरणीय क्षति के जोखिम में डालता हो."
ग़ौरतलब है कि योरोपीय संघ (EU) के कई सदस्य देशों ने अफ़ग़ान नागरिकों की वापसी के लिए अधिक समन्वित दृष्टिकोण की मांग की है.
इस सन्दर्भ में यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने उन बढ़ती ख़बरों पर भी चिन्ता व्यक्त की है कि अफ़ग़ानिस्तान में अत्यन्त गम्भीर मानवाधिकार स्थिति के बावजूद, योरोप के कुछ देश, अब अफ़ग़ान लोगों को जबरन देश से बाहर निकालने की प्रक्रिया फिर शुरू कर रहे हैं या ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि शरणार्थियों की वापसी को लेकर योरोपीय संघ के प्रस्तावित नए नियम भी चिन्ताजनक हैं. वे मानवाधिकारों के सुरक्षा उपायों को कमज़ोर कर सकते हैं और लोगों को नुक़सान के जोखिम में डाल सकते हैं.
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने आगाह करते हुए कहा कि वापिस लौटाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए जोखिम का आकलन किए बिना, लोगों को जबरन अफ़ग़ानिस्तान नहीं भेजा जाना चाहिए. “ये आकलन अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी क़ानून के अनुसार आवश्यक हैं और इसी के तहत किए जाने चाहिए."
वोल्कर टर्क ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान अत्यन्त गम्भीर मानवाधिकार स्थिति के अलावा, एक अनिश्चित मानवीय स्थिति और सीमा पार असुरक्षा का सामना भी कर रहा है, विशेष रूप से अक्टूबर 2025 से.
याद रहे कि पिछली तिमाही में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच लड़ाई बढ़ने के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं.