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ICJ ने कहा, हड़ताल करने का अधिकार श्रम सन्धि के तहत है सुरक्षित

कंबोडिया की महिलाएं कंबोडिया में एक जूते की फैक्ट्री में बैंगनी जूते इकट्ठा करने वाले कन्वेयर बेल्ट पर काम करती हैं।
© ILO/Marcel Crozet अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय ICJ ने 21 मई को निर्णय दिया है कि श्रमिकों का संगठन बनाने और हड़ताल करने का अधिकार, एक प्रमुख श्रम सन्धि के तहत सुरक्षित है.

ICJ ने कहा, हड़ताल करने का अधिकार श्रम सन्धि के तहत है सुरक्षित

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने एक ऐतिहासिक परामर्शकारी राय में निर्णय दिया है कि हड़ताल करने का अधिकार अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के एक मूल समझौते के तहत सुरक्षित है. न्यायालय के इस निर्णय ने दुनिया भर में श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच लम्बे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझा दिया है.

संयुक्त राष्ट्र विश्व न्यायालय ने गुरूवार को 10 के मुक़ाबले 4 मतों से फ़ैसला सुनाया कि "स्वतंत्रता और संगठन के अधिकार के संरक्षण पर कन्वेंशन, 1948 (संख्या 87)" के तहत "श्रमिकों और उनके संगठनों के हड़ताल करने के अधिकार को संरक्षण प्राप्त है."

हालाँकि, न्यायालय ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उसकी राय ने हड़ताल के अधिकार के सटीक दायरे को परिभाषित नहीं किया है. न्यायाधीशों ने कहा कि उनके निष्कर्ष का मतलब "इस अधिकार के सटीक विषय, दायरे या इसके उपयोग की शर्तों पर कोई अन्तिम निर्णय नहीं है."

यह मामला नवम्बर 2023 में ILO की प्रशासनिक संस्था ने न्यायालय के पास भेजा था. यह क़दम इस एजेंसी के मुख्य घटकों -सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच वर्षों के दौरान जारी रहे मतभेद के बाद उठाया गया था. 

विवाद इस बात पर था कि क्या कन्वेंशन संख्या 87, हड़ताल के अधिकार की रक्षा करता है, भले ही इस सन्धि में 'हड़ताल' शब्द का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है.

विवाद का मुख्य कारण

विवाद के केन्द्र में यह सवाल था कि क्या कन्वेंशन संख्या 87 के तहत, संगठन बनाने के अधिकार में श्रमिकों और उनके संगठनों द्वारा हड़ताल करने का अधिकार भी शामिल है.

  • नियोक्ताओं के समूहों का तर्क है कि इस कन्वेंशन में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसका सामान्य अर्थ इस तरह के अधिकार की ओर इशारा करता हो, और इस सन्धि के मसौदे यानि आलेख से भी यह मालूम होता है कि इसमें हड़ताल की कार्रवाई को शामिल करने का कोई इरादा नहीं था.
  • इसके विपरीत, श्रमिकों के प्रतिनिधियों का तर्क है कि हड़ताल करने का अधिकार संगठन बनाने की स्वतंत्रता (freedom of association) का एक स्वाभाविक हिस्सा है और इसे ILO की निगरानी संस्थाओं की तरफ़ से लम्बे समय से मान्यता दी गई है.

ILO ने कहा है कि उसकी गवर्निंग संस्था सम्भवतः नवम्बर के सत्र में इस मामले और इसके बाद की जाने वाली कार्रवाइयों पर विचार किए करेगी.

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित ILO मुख्यालय भवन का हवाई दृश्य, जिसमें पृष्ठभूमि में झील और पहाड़ दिखाई दे रहे हैं।
Steiner SA जिनीवा में अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का मुख्यालय.

न्यायालय की दलील

अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय ने स्वीकार किया कि कन्वेंशन संख्या 87 में "हड़ताल के अधिकार का स्पष्ट उल्लेख नहीं है," मगर यह भी कहा कि ऐसे प्रावधान की अनुपस्थिति का "यह अर्थ भी नहीं है कि इस मुद्दे (हड़ताल) को सन्धि से बाहर रखा गया है."

न्यायाधीशों ने पाया कि हड़ताल की कार्रवाई इस कन्वेंशन के तहत श्रमिकों के संगठनों की "गतिविधियों" के सामान्य अर्थ के भीतर आ सकती है, साथ ही उन प्रावधानों के अन्तर्गत भी जो श्रमिकों और नियोक्ताओं को संगठन बनाने व अपने हितों की रक्षा करने का अधिकार देते हैं.

न्यायाधीशों में मतभेद

यद्यपि न्यायालय इस बात पर एकमत था कि उसका इस मामले पर अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) है और उसे ILO के अनुरोध का जवाब देना चाहिए, लेकिन चार न्यायाधीश मुख्य निष्कर्ष से असहमत थे.

  • न्यायाधीश पीटर टोमका ने तर्क दिया कि बहुमत ने इस कन्वेंशन को उस सीमा से परे खींच दिया है जिस पर देशों ने सहमति जताई थी. उनका कहना था कि यह कन्वेंशन श्रमिकों और नियोक्ताओं के संगठनों के "गठन, स्वायत्तता और आन्तरिक प्रशासन" की रक्षा करता है, न कि हड़ताल जैसी सामूहिक आर्थिक कार्रवाई के विशिष्ट रूपों की.
  • न्यायाधीश ज़ू हानक़िन ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे "सन्धि की व्याख्या के बजाय मानवाधिकारों की वकालत का प्रयास" बताया. उन्होंने तर्क दिया कि न्यायालय को कन्वेंशन के पाठ और इसके मसौदे के इतिहास पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए था.

    नीदरलैंड के हेग में शांति महल का एक दृश्य, जो अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की सीट है, एक स्पष्ट नीले आकाश के नीचे।
    UN Photo/Andrea Brizzi नैदरलैंड के दे हेग स्थित इस शान्ति भवन में ही, अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय स्थित है जोकि संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिक अंग है.

न्यायालय की परामर्शकारी राय

ILO के इतिहास में यह केवल दूसरा अवसर था जब किसी अन्तरराष्ट्रीय श्रम कन्वेंशन की व्याख्या से जुड़ा कोई सवाल अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय में दाख़िल किया गया था, और 1945 में इसकी स्थापना के बाद से ICJ को भेजा गया ऐसा पहला अनुरोध था.

ICJ की सलाहकारी राय क़ानूनी रूप से बाध्यकारी निर्णय नहीं होते हैं, लेकिन उनका बहुत बड़ा क़ानूनी और राजनैतिक महत्व होता है, जो बहसों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों को भी आकार देते हैं.

नैदरलैंड के द हेग स्थित अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिक अंग है और इसमें 15 न्यायाधीश शामिल होते हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद नियुक्त करती हैं.