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अफ़ग़ानिस्तान: देश लौटने वाले 27 लाख लोगों के लिए सहायता योजना

संयुक्त राष्ट्र-हैबिटेट और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों का अफगान पुरुषों के साथ शरणार्थी शिविर में मिलन हुआ है, जिसकी पृष्ठभूमि में संयुक्त राष्ट्र के तंबू दिखाई दे रहे हैं।
© UN-Habitat /Balaji Rajkumar अफ़ग़ानिस्तान के कुनार प्रान्त में एक अस्थाई शिविर में संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी, विस्थापित लोगों से बातचीत करते हुए.

अफ़ग़ानिस्तान: देश लौटने वाले 27 लाख लोगों के लिए सहायता योजना

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र और ग़ैर-सरकारी संगठन साझीदारों ने ईरान व पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान वापिस लौट रहे अनुमानित 27 लाख लोगों की सहायता के लिए 52 करोड़ 90 लाख डॉलर की नई सहायता योजना शुरू की है. एजेंसियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की वापसीदेश के लिए तत्काल मानवीय संकट और लम्बी अवधि की विकास चुनौती, दोनों बन रही है.

2026 अफ़ग़ान वापसी सहायता योजना (RPAR) का उद्देश्य देश वापिस लौटने वाले लोगों को सीमा पार करने के स्थानों से लेकर देश के उन समुदायों तक सहायता पहुँचाना है, जहाँ वे जाकर बसेंगे.

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योजना के अनुसार, सितम्बर 2023 से अब तक लगभग 59 लाख अफ़ग़ान लोग, देश में वापिस लौट चुके हैं. 

यह सामान्य जनसंख्या वृद्धि को छोड़कर, केवल दो वर्ष से कुछ अधिक समय में अफ़ग़ानिस्तान की आबादी में लगभग 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि के बराबर है.

केवल 2025 में 29 लाख लोग लौटे, जबकि 2026 के पहले चार महीनों में और 6 लाख लोग अफ़ग़ानिस्तान पहुँचे हैं.

अधिक लोगों के लौटने की सम्भावना

नई योजना के अनुसार, अगले आठ महीनों में ईरान से लगभग 17 लाख और पाकिस्तान से 11 लाख अफ़ग़ान लोगों के वापिस लौटने का अनुमान है.

अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर और कार्यवाहक मानवीय समन्वयक डॉक्टर ताजुद्दीन ओयेवाले ने कहा कि यह केवल सीमा की अस्थाई समस्या नहीं है.

उन्होंने कहा, “यह कोई अल्पकालिक सीमा घटना नहीं है. यह एक गहरी जनसांख्यिकीय और विकास चुनौती है, जिसके लिए टिकाऊ, सिद्धान्त-आधारित व पूरी तरह धन से समर्थित कार्रवाई की आवश्यकता है.”

उन्होंने बताया कि देश को वापिस लौटने वालों में आधे से अधिक महिलाएँ और बच्चे हैं. इनमें से बहुत से लोग अफ़ग़ानिस्तान के बाहर पैदा हुए व पले-बढ़े हैं, और उनका अपने मूल समुदायों से कोई ख़ास सम्बन्ध नहीं है.

आपात सहायता से पुनर्वास तक

यह योजना दो हिस्सों में काम करेगी. पहला, सीमा पर तत्काल आपात सहायता; और दूसरा, उन इलाक़ों में लम्बी अवधि की मदद, जहाँ लौटने वाले लोग जाकर बसेंगे.

सीमा पर सहायता के लिए लगभग 10 करोड़ डॉलर की रक़म की आवश्यकता है. इस राशि से ईरान और पाकिस्तान से लगे प्रमुख आधिकारिक सीमा पार बिन्दुओं पर जीवनरक्षक सहायता मुहैया कराई जाएगी. 

इसमें नक़दी सहायता, स्वास्थ्य सेवाएँ, पोषण सहायता, संरक्षण, जल, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई, तथा परिवहन सहायता शामिल हैं.

सीमा पर यह सहायता, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के नेतृत्व वाला बॉर्डर कंसोर्टियम मुहैया कराएगा.

बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान से लौटते समय बड़े बैग और सामान लेकर अफगान शरणार्थी।
© UNHCR ईरान से लौट रहे अफ़ग़ान नागरिक अफ़ग़ानिस्तान में इस्लाम क़ला सीमा चौकी के ज़रिए प्रवेश कर रहे हैं.

इसके अलावा, वापसी वाले इलाक़ों में पुनर्वास एवं पुनः एकीकरण सहायता के लिए 42 करोड़ 85 लाख डॉलर की धनराशि रखी गई है. इसका उद्देश्य परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीक़े से अपना जीवन फिर से शुरू करने में मदद करना है, साथ ही मेज़बान समुदायों पर दबाव कम करना है.

यह सहायता उन 35 प्राथमिकता वाले ज़िलों में दी जाएगी, जहाँ ज़रूरतें सबसे अधिक हैं. इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, जल और स्वच्छता, रोज़गार व टिकाऊ आजीविका, आवास और भूमि अधिकारों तक पहुँच शामिल होगी. संरक्षण, लैंगिक समानता और सामाजिक एकजुटता को पूरी योजना के केन्द्र में रखा गया है.

धन की कमी बड़ी चुनौती

वर्ल्ड विज़न इंटरनेशनल की देश निदेशक थमिन्द्री डी सिल्वा का कहना है कि ज़रूरतें बहुत बड़ी हैं, लेकिन पर्याप्त धन मिलने पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, ग़ैर-सरकारी संगठन और साझीदार मिलकर प्रभावी सहायता पहुँचाने में पूर्णत: सक्षम हैं.

उन्होंने कहा, “केवल बॉर्डर कंसोर्टियम को ही 10.07 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है. यह राशि सबसे अधिक असुरक्षित लौटने वालों में से केवल 40 प्रतिशत तक सहायता पहुँचाने के लिए पर्याप्त है, जबकि 70 प्रतिशत लोग संवेदनशीलता सम्बन्धी कसौटी पर खरे उतरते हैं.”

उन्होंने चेतावनी दी कि सीमा पर धन की कमी से जोखिमों से निपटने और लोगों के टिकाऊ पुनर्वास में सहायता देने की क्षमता सीधे तौर पर प्रभावित होती है.

हाल ही में लौटे अफगान लोग इस्लाम काला सीमा पार पर पंजीकरण क्षेत्र से गुजर रहे हैं, एक व्हीलबरो पर अपने सामान ले जा रहे हैं।
© UNICEF/Omid Fazel ईरान की सीमा से लगी इस्लाम क़ला चौकी को पार करके अफ़ग़ान नागरिक, अफ़ग़ानिस्तान में प्रवेश कर रहे हैं. (फ़ाइल)

दानदाताओं से समर्थन की अपील

काबुल में आयोजित योजना के घोषणा कार्यक्रम में दाता देशों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, ग़ैर-सरकारी संगठनों और मीडिया के प्रतिनिधि शामिल हुए.

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदारों ने दानदाताओं से 2026 अफ़ग़ान वापसी सहायता योजना के लिए ज़रूरत के अनुरूप पूरा धन उपलब्ध कराने की अपील की है.

उन्होंने चेतावनी दी कि पर्याप्त सहायता नहीं मिलने पर अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय और संरक्षण संकट और गहरा सकता है. इससे ग़रीबी बढ़ सकती है, लौटे हुए लोग फिर से विस्थापित हो सकते हैं और मेज़बान समुदायों पर दबाव और बढ़ सकता है.

साझीदारों ने कहा कि पूरी धनराशि मिलने से लौटने वाले लाखों अफ़ग़ान लोगों के लिए पुनर्बहाली, टिकाऊ पुनर्वास और सहनक्षमता की मज़बूत नींव रखी जा सकेगी.