DRC में इबोला का जोखिम उच्च, मगर महामारी वाली आपात स्थिति नहीं, WHO
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला का प्रकोप गम्भीर है, लेकिन यह स्थिति वैश्विक महामारी सम्बन्धी आपात स्थिति नहीं है. देश में संक्रमण और इससे मृत्यु होने के मामलों में कुछ वृद्धि देखी गई है, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम बना हुआ है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने डीआरसी के पूर्वी इलाक़े में तेज़ी से बदलते हालात पर बुधवार को जानकारी देते हुए कहा कि संक्रमण के कई दर्जन पुष्ट मामलों के अलावा, इबोला बुंडिबुग्यो वायरस के लगभग 600 संदिग्ध मामले और 139 संदिग्ध मौतें दर्ज की गए हैं.
उन्होंने जिनीवा में पत्रकारों से कहा, “हमें आशंका है कि ये संख्या बढ़ती रहेगी, क्योंकि प्रकोप का पता चलने से पहले यह वायरस काफ़ी समय तक फैलता रहा था.”
उन्होंने बताया कि युगांडा की राजधानी कम्पाला में इबोला संक्रमण के दो पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं.
डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा कि इस वायरस के लिए अभी कोई वैक्सीन या उपचार उपलब्ध नहीं है. यह वायरस बेहद दुर्लभ है और आख़िरी बार 2007 में पाया गया था.
संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीमें प्रकोप के केन्द्र इतूरी प्रान्त में समुदाय के नेताओं के साथ पहले से काम कर रही हैं.
खनिज सम्पदा से समृद्ध डीआर काँगो में दशकों से जारी हिंसा ने लोगों को बेहद असुरक्षित हालात में रहने को मजबूर किया है. इनमें स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं, जो जोखिम के बीच अपना काम जारी रखे हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, प्रभावित इतूरी और उत्तर किवू प्रान्तों में 20 लाख से अधिक लोग आन्तरिक रूप से विस्थापित हैं. उत्तर किवू की प्रान्तीय राजधानी गोमा अब भी विद्रोही गुट एम23 के नियंत्रण में है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की क्षेत्रीय आपातकालीन निदेशक (कार्यवाहक) और घटना प्रबन्धक, डॉक्टर मैरी रोज़लिन बेलिज़ेयर ने कहा कि गोमा में WHO की टीम लगातार काम कर रही है और लोगों को सहायता देती रही है.
उन्होंने कहा, “इस प्रकोप के दौरान भी हम सहायता जारी रखेंगे. असुरक्षा के बावजूद हमने कभी गोमा नहीं छोड़ा है. हम उन समुदायों के साथ बने रहेंगे, जिनकी हम सेवा करते हैं.”
ख़तरे वाला क्षेत्र
इतूरी प्रान्त में इबोला प्रकोप का पता लगाना ‘बेहद चुनौतीपूर्ण’ है. अप्रैल में इस क्षेत्र में आम नागरिकों की मौतों में फिर बढ़ोत्तरी देखी गई थी.
अफ़्रीका के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर मोहम्मद याक़ूब जनाबी ने कहा कि बीमारी पर प्रभावी निगरानी के लिए समुदायों से भरोसेमन्द जानकारी मिलना, स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्रों का खुले रहना और प्रयोगशाला में संक्रमण की पुष्टि होना ज़रूरी है.
“दूरदराज़ या असुरक्षित इलाक़ों में मामलों की पहचान होने में समय लग सकता है.”
उन्होंने बताया कि कुछ दूरदराज़ इलाक़ों में इबोला बुंडिबुग्यो वायरस की पहचान तभी हो सकी, जब नमूनों को जाँच के लिए देशभर में क़रीब 1,700 किलोमीटर दूर राजधानी किंशासा ले जाया गया.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायरल बुख़ार मामलों की तकनीकी अधिकारी डॉक्टर अनैस लेगान्द ने कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन को जैसे ही इस ख़तरे की जानकारी मिली, डीआर काँगो को जल्द से जल्द जाँच में मदद दी गई. इसी के बाद पिछले सप्ताह के अन्त में इस प्रकोप की पुष्टि हो सकी.”
उन्होंने कहा कि यह पता लगाने के लिए जाँच जारी है कि प्रकोप ठीक कब और कहाँ शुरू हुआ. “इसके पैमाने को देखते हुए, लगता है कि यह शायद कुछ महीने पहले शुरू हुआ होगा. लेकिन जाँच अब भी जारी है और हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता संक्रमण की श्रृँखला को तोड़ना है.”
इससे पहले मंगलवार को जिनीवा में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आपात समिति की बैठक शुरू हुई जिसमें कहा गया कि इबोला प्रकोप अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली जन स्वास्थ्य आपात स्थिति है, लेकिन यह वैश्विक महामारी जैसी आपात स्थिति नहीं है.
समिति की अध्यक्ष प्रोफ़ेसर लुसिल एच ब्लूमबर्ग ने कहा कि इबोला संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शरीर के तरल पदार्थों के सीधे सम्पर्क से फैलता है. इतूरी प्रान्त की राजधानी बुनिया में 5 मई को एक मरीज़ की मौत के बाद, जब परिवार ने ताबूत बदलने का निर्णय लिया, तो सम्भवतः इसी तरह संक्रमण फैला.
उन्होंने कहा, “यह सामान्य सम्पर्क से नहीं फैलता और न ही हवा से फैलता है. हमें यह बात समझनी होगी. इसी वजह से यात्रा पर रोक लगाने की सलाह नहीं दी गई है, क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों (IHR) में ऐसे प्रतिबन्धों का समर्थन नहीं किया गया है.”