मध्य पूर्व संकट से म्याँमार में ‘भूख’ गहराई, योरोपीय संघ ने बढ़ाया मदद का हाथ
मध्य पूर्व संकट के कारण खाद्य पदार्थों और ईंधन की क़ीमतों में आई भारी तेज़ी ने म्याँमार में भी परिवारों पर नया दबाव बना दिया है, और लाखों लोग अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. योरोपीय संघ ने इन हालात के मद्देनज़र औरदेश भर में गहराती भुखमरी से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को, 80 लाख योरो की आपदा राहत राशि देने की घोषणा की है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम ने मंगलवार को कहा है कि फ़रवरी के अन्त से, देश भर में ईंधन की क़ीमतें तीन गुना हो गई हैं और चावल, तेल, दालें व नमक से युक्त बुनियादी खाद्य टोकरी की लागत कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ी है.
खाद्य वस्तुओं की क़ीमतों में सबसे अधिक वृद्धि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में देखी गई है. देश भर में मुख्य खाद्य पदार्थों की क़ीमतें औसतन 18 प्रतिशत बढ़ गई हैं.
म्याँमार में जारी सशस्त्र संघर्ष और वैश्विक ईंधन की कमी के हालात एक साथ उत्पन्न होने से समुदायों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
WFP ने बताया है कि म्याँमार में हर चार में से एक व्यक्ति, यानि 1 करोड़ 24 लाख लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जबकि 37 लाख लोग जारी संघर्ष के कारण विस्थापित हैं.
सीमित आय, बचत या आजीविका के साधनों वाले परिवारों के लिए, कीमतों में यह बढ़ोतरी बुनियादी भोजन को भी उनकी पहुँच से दूर कर रही है.
म्याँमार में योरोपीय संघ के मानवीय कार्यक्रमों की देखरेख करने वाली जेसिका चैक्स ने कहा कि, "जैसे-जैसे वैश्विक ईंधन की क़ीमतें बढ़ रही हैं, म्याँमार में बुनियादी ज़रूरतें उन लाखों लोगों के लिए और अधिक दुर्गम होती जा रही हैं जो पहले से ही गुज़र-बसर करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "योरोपीय संघ भोजन और पोषण सहायता की एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, यह सुनिश्चित करते हुए कि इस कठिन समय में सबसे अधिक ज़रूरतमन्द लोगों तक जीवन रक्षक सहायता पहुँचती रहे."
बढ़ती क़ीमतों का चौतरफ़ा असर
यूएन एजेंसियों का कहना है कि यह संकट आगामी मानसून की बुवाई के मौसम को भी ख़तरे में डाल रहा है. म्याँमार के किसान ऊँची क़ीमतों और सीमित आपूर्ति के कारण उर्वरकों के उपयोग में कटौती कर रहे हैं.
उर्वरक के उपयोग में 50 प्रतिशत की गिरावट राष्ट्रीय कृषि उत्पादन को 15 प्रतिशत तक कम कर सकती है, जिससे क़ीमतें और बढ़ेंगी और 2027 तक खाद्य असुरक्षा और बदतर हो जाएगी.
म्याँमार के लिए WFP के देश निदेशक माइकल डनफ़र्ड ने कहा, "मानवीय स्थिति को अब केवल जारी सशस्त्र संघर्ष जैसे आन्तरिक कारक ही बदतर नहीं बना रहे, बल्कि वैश्विक झटके अब देश भर के बाज़ारों, खेतों और घरों तक पहुँच रहे हैं."
"योरोपीय संघ के इस योगदान की बदौलत हम अभी सहायता कार्रवाई तेज़ कर सकेंगे जिससे यह सुनिश्चित होता है कि जो परिवार पहले से ही बहुत कुछ खो चुके हैं, वे तबाही के उस मोड़ पर नहीं पहुँचें जहाँ से लौटना नामुमकिन हो."
WFP, योरोपीय संघ की मानवीय सहायता से मिलने वाली धनराशि की मदद से, संघर्ष, विस्थापन, आर्थिक तंगी और बिगड़ती खाद्य असुरक्षा से प्रभावित परिवारों को आपातकालीन खाद्य सहायता प्रदान करने, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं व छोटे बच्चों के लिए विशेष पोषण सहायता देने और खाद्य सुरक्षा पर अन्तर-एजेंसी समन्वय को मज़बूत करने में सक्षम होगा.
योरोपीय संघ और WFP, म्याँमार में भुखमरी के ख़िलाफ़ लड़ाई में दृढ़ भागीदार बने हुए हैं, और उन लाखों लोगों के लिए एक जीवन रेखा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो अपने दैनिक जीवन के लिए भोजन व पोषण सहायता पर निर्भर हैं.