DRC: भूख व विस्थापन संकट के बाद, इबोला वायरस का प्रकोप भी
वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि 2020 में कोरोनावायरस के कारण उपजी आपात स्थिति की तरह एक और वैश्विक महामारी के फैलने का ख़तरा बढ़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक दिन, पहले काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस के फैलाव को अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित की थी, जिसके बाद सोमवार को यह आशंका व्यक्त की गई है.
वैश्विक तैयारी निगरानी बोर्ड के विशेषज्ञों ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया, वैश्विक महामारियों से सुरक्षित नहीं है. एक दशक पहले इबोला वायरस के फैलाव और उसके बाद कोविड-19 महामारी ने दुनिया की कमज़ोरियों को उजागर किया था.
“जैसे-जैसे संक्रामक बीमारियों के प्रकोप की आवृत्ति बढ़ रही है, वे और ज़्यादा क्षति पहुँचा रही हैं, उनके स्वास्थ्य,आर्थिक, राजनीति व समाज पर असर बढ़ रहे हैं और उनसे उबर पाने की क्षमता भी कम है.”
इबोला एक गम्भीर, अक्सर घातक साबित होने वाली बीमारी है, जिससे मनुष्य व अन्य जीव संक्रमित होते हैं.
शनिवार, 16 मई तक, स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसार, प्रयोगशालाओं में पूर्वी डीआरसी के इतूरी प्रान्त में 8 संक्रमण मामलों की पुष्टि हुई थी.
246 संदिग्ध संक्रमण मामले हैं और इस वायरस की वजह से 80 लोगों की मौत हो जाने का सन्देह है.
रविवार को, ऐसी रिपोर्टें मिली कि विद्रोही लड़ाकों के नियंत्रण वाले उत्तर किवू प्रान्त की राजधानी गोमा में एक व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित है, हालांकि इस की पुष्टि नहीं हो पाई है. इस शहर की आबादी 10 लाख है.
अन्य पुष्ट मामलों में, इतूरी प्रान्त की राजधानी बुनिया में इबोला के कारण मृत एक व्यक्ति की पत्नी भी इससे संक्रमित बताई गई है.
एक अन्य व्यक्ति ने बुनिया से बेनी शहर की यात्रा की थी, जहाँ उनमें इस संक्रमण के लक्षण देखे गए.
इसके अलावा, डीआर काँगो की राजधानी किंशासा और युगांडा की सीमा से लगे इलाक़ों में भी इबोला संक्रमण मामलों की पुष्टि हुई है. यहाँ दो लोगों ने डीआरसी से यात्रा की थी और अब उन्हें गहन देखभाल कक्ष में भर्ती कराया गया है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, युगांडा की राजधानी कम्पाला भी इबोला से प्रभावित है.
WHO की टीम सरकार के नेतृत्व में स्थिति पर नियंत्रण पाने में जुटी है, जिसके तहत 42 स्वास्थ्य विशेषज्ञ ज़मीन पर मौजूद है और चिकित्सा सामान को भी तैनात किया गया है.
स्थिति गम्भीर होने की आशंका
यूएन एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इबोला का फैलाव, मौजूदा स्थिति से कहीं अधिक होने की आशंका है, और कुछ इलाक़ों में अनेक लोगों की मौत के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है. जिन मामलों में परीक्षण किया गया है, वहाँ लोगों में संक्रमण की पुष्टि की दर अधिक है.
यह भी अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इबोला वायरस किन तौर-तरीक़ों से फैल रहा है. कम से कम 4 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो जाने से स्वास्थ्य केन्द्रों में रोकथाम उपायों के प्रति चिन्ता उपजी है.
WHO ने अपने एक वक्तव्य में बताया है कि फ़िलहाल, वर्तमान प्रकोप के लिए ज़िम्मेदार बुंडिबुग्यो नामक वायरस के उपचार के लिए कोई थेरेपी या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.
संगठन ने बताया कि यहाँ जारी असुरक्षा, मानवीय संकट, आबादी की ऊँची आवाजाही, संक्रमण प्रभावित स्थलों की शहरी व उप-शहरी प्रकृति और अनौपचारिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों के विशाल नैटवर्क की वजह से संक्रमण फैलने का जोखिम गहरा हो रहा है.
इससे पहले, 2018-19 में इबोला वायरस के कारण फैली महामारी के दौरान भी उत्तर किवू और इतूरी प्रान्तों में यही स्थिति दिखाई दी थी.