'निकोटीन पाउच' के जाल में फँस रहे युवा व किशोर, WHO ने जारी किया बड़ा ऐलर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दुनिया भर में ‘निकोटीन पाउच’ उत्पादों के तेज़ी से हो रहे प्रसार और उनके इस्तेमाल के लिए किशोरों व युवाओं को लुभाए जाने वाले आक्रामक प्रचार पर एक गम्भीर चेतावनी जारी की है. संगठन ने चिन्ता जताई है कि अनेक देशों में इस पर नियंत्रण के लिए नियामन व्यवस्था सीमित या नदारद है, जिससे युवाओं में इसकी लत पड़ने और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने का ख़तरा है.
निकोटीन, तम्बाकू के पौधे में पाया जाने वाला एक रसायन है, जिसके इस्तेमाल की लत आसानी से पड़ जाती है. निकोटीन के छोटे, सफ़ेद, थैलीनुमा पैकेट, या ‘पाउच’ को मसूड़ों और होठ के बीच रखा जाता है, और फिर इसका स्वाद धीरे-धीरे मुँह में घुलता रहता है.
इन पाउच में निकोटीन के अलावा कुछ फ़्लेवर, मिठास प्रदान करने वाले तत्व और अन्य सामग्री मौजूद होती हैं. वर्ष 2024 में, निकोटीन पाउच की फुटकर बिक्री, 23 अरब युनिट तक पहुँच गई, जोकि इससे पहले के वर्ष में हुई बिक्री की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चिन्ता जताई है कि ये पाउच तैयार करने वाली कम्पनियाँ, युवाओं में निकोटीन के इस्तेमाल को सामान्य बनाने के लिए भ्रामक तौर-तरीक़े अपना रही हैं.
सोशल मीडिया माध्यमों व विज्ञापनों के ज़रिए युवाओं में इसके प्रचार-प्रसार के अलावा, कुछ उत्पादों की पैकेजिंग, कुछ लोकप्रिय कैंडी या टॉफ़ी के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाली ब्रैंडिंग जैसी होती है जिससे बच्चों के लिए भी जोखिम पनपा है.
WHO के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025 में, वैश्विक बाज़ार में इन उत्पादों के कुल मूल्य को लगभग 7 अरब डॉलर आंका गया है.
जैसे-जैसे दुनिया भर में इनकी बिक्री बढ़ रही है, इनके लिए नियामन व्यवस्था लड़खड़ा रही है, कमज़ोर है या फिर अनेक देशों में तो ये मौजूद ही नहीं है.
160 देशों में निकोटीन पाउच के लिए कोई विशिष्ट नियम नहीं हैं, जबकि केवल 16 देशों में उन पर पूर्ण रूप से पाबन्दी लगाई गई है. 32 देशों में कुछ हद तक इन्हें नियमों के दायरे में लाया गया है, जिनमें पाँच में फ़्लेवर के इस्तेमाल पर सख़्ती है, 26 में नाबालिगों को इन्हें बेचे जाने पर रोक है और 21 में इनके विज्ञान व प्रसार पर रोक लगाई गई है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी में ‘तम्बाकू मुक्त पहल’ के प्रमुख विनायक प्रसाद ने बताया कि निकोटीन पाउच का इस्तेमाल तेज़ी से फैल रहा है, जबकि समुचित नियामन व्यवस्था पिछड़ रही है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने देशों की सरकारों को ठोस, साक्ष्य-आधारित बचाव उपाय अपनाने पर बल दिया है.
लम्बे इस्तेमाल से जोखिम
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ज़ोर देकर कहा है कि निकोटीन, अत्यधिक लत लगाने के लिए ज़िम्मेदार है और बच्चों, किशोरों व युवा वयस्कों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है, जिनके मस्तिष्क विकसित हो ही रहे होते हैं.
किशोरावस्था में निकोटीन की चपेट में आने से एकाग्रता, सीखने-सिखाने की क्षमता व मस्तिष्क के विकास पर असर होता है. कम आयु में इसका इस्तेमाल शुरू करने से दीर्घकाल में इस पर निर्भर होने की सम्भावना बढ़ती है और भविष्य में निकोटीन व अन्य तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने की आशंका भी.
निकोटीन का इस्तेमाल, हृदय व रक्त वाहिकाओं के जोखिम से जुड़ा हुआ भी पाया गया है. बाज़ारों में निकोटीन के उत्पादों को कई शक्ति श्रेणियों, जैसेकि आरम्भिक (beginners), उन्नत (advanced) और विशेषज्ञ (experts) के लेबल के साथ बेचा जाता है. इनमें निकोटीन की सघनता 150 मिलिग्राम तक पहुँच सकती है.
यूएन एजेंसी ने सचेत किया है कि ऐसे उत्पादों को जोखिम-मुक्त नहीं समझा जाना चाहिए.
आक्रामक प्रचार के तौर-तरीक़े
WHO ने अपनी रिपोर्ट में प्रचार के उन तौर-तरीक़ों को भी उजागर किया है, जिनके ज़रिए युवा उपभोक्ताओं को इन उत्पादों के सेवन के लिए लुभाया जाता है. उदाहरणस्वरूप:
- चमकदार, आकर्षक, लुभावनी पैकेजिंग
- बबल गम और गमी बियर जैसे मिठास से प्रेरित फ़्लेवर
- सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर के ज़रिए मार्केटिंग
- कॉन्सर्ट, उत्सवों व खेलकूद आयोजनों का प्रायोजन
- आकर्षक जीवनशैली दर्शाने वाले विज्ञापन
- स्कूलों व ध्रूमपान-मुक्त स्थानों पर गुप्त उपयोग को बढ़ावा देने वाले सन्देश
ठोस क़दम उठाने का आग्रह
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने देशों की सरकारों से आग्रह किया है कि तम्बाकू और निकोटीन के सभी उत्पादों को व्यापक नियमों के दायरे में लाने के लिए क़दम उठाए जाने होंगे.
इसके लिए यह ज़रूरी है कि फ़्लेवर के इस्तेमाल पर पाबन्दी लगाई जाए या उसे सीमित किया जाए. सोशल मीडिया पर विज्ञापनों, स्पॉन्सरशिप व प्रचार-प्रसार पर रोक लगानी होगी.
इसके समानान्तर, आयु-सत्यापन के बाद ही इस्तेमाल की अनुमति व फुटकर बिक्री पर नियंत्रण उपाय करने होंगे व पैकेजिंग को सरल व स्पष्ट स्वास्थ्य चेतावनी के साथ करना होगा.
निकोटीन की मात्रा के लिए सीमा निर्धारित करनी ज़रूरी है और युवाओं में इस्तेमाल में कमी लाने के इरादे से इन उत्पादों पर टैक्स भी बढ़ाया जाना होगा.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की यह रिपोर्ट, तम्बाकू मुक्त दिवस से पहले एक मुहिम का हिस्सा है, जिसमें इस वर्ष निकोटीन व तम्बाकू की लत पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जिसके ज़रिए उपभोक्ताओं की नई पीढ़ी को निशाना बनाया जा रहा है.