अफ़्रीका को सुरक्षा परिषद में स्थाई प्रतिनिधित्व से दूर रखना, 'ऐतिहासिक अन्याय है'
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अफ़्रीकी संघ (African Union) को, अफ़्रीका में बहुपक्षवाद का ध्वजवाहक और विकासशील जगत के लिए न्याय की सामूहिक आवाज़ क़रार दिया है. इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में अफ़्रीकी संघ-संयुक्त राष्ट्र शिखर बैठक में शिरकत करने के लिए पहुँचे महासचिव ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि सुरक्षा परिषद में अफ़्रीका को स्थाई प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाने को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने सचेत किया कि पुराने ढर्रे पर बनी वैश्विक संस्थाओं और धधकते वैश्विक संकटों की वजह से अफ़्रीका के उदय पर असर हो रहा है.
उन्होंने अफ़्रीकी संघ (AU) आयोग के प्रमुख महमहूद अली युसूफ़ के साथ मुलाक़ात में, शान्ति व सुरक्षा, सतत विकास और मानवाधिकारों के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग को गहरा करने पर ध्यान केन्द्रित किया.
यूएन प्रमुख ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह महासचिव के तौर पर सम्भवत: उनकी अन्तिम AU-UN शिखर बैठक है, लेकिन दोनों संगठनों के बीच सम्बन्ध पहले से कहीं अधिक मज़बूत हैं और ये रहेंगे.
महासचिव और AU आयोग के प्रमुख ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें एक साझा फ़्रेमवर्क के सिद्धान्तों को पुष्ट किया गया है और दोनों संगठनों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप दिया गया है.
सुधारों की पैरवी
एंतोनियो गुटेरेश ने वर्ष 2024 में पारित हुए ‘भविष्य के लिए सहमति-पत्र’ का उल्लेख किया, जिसमें क्षेत्रीय संगठनों की अहमियत पर बल दिया गया है, विशेष रूप से अफ़्रीकी संघ को. साथ ही, सुरक्षा परिषद में सुधार की भी पैरवी की गई है, ताकि उसमें वर्तमान विश्व की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके.
“अफ़्रीका को स्थाई प्रतिनिधित्व से निरन्तर दूर रखा जाना, निसन्देह एक ऐतिहासिक अन्याय है और हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते हैं.”
“यह विशेषाधिकार या प्रतीकवाद के बारे में नहीं है. यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि परिषद उद्देश्यों के अनुरूप तैयार हो और वैधता व कारगर ढंग से क़दम उठा सके.”
यूएन महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र में पसरी असमानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अफ़्रीकी देशों को क़र्ज़ लेने की ऊँची क़िस्तें चुकानी पड़ रही हैं और किफ़ायती पूँजी तक उनकी पहुँच सीमित है.
उन्होंने अफ़्रीका के नेतृत्व में हुए सुधारों की सराहना की, विशेष रूप से अफ़्रीकी विकास बैंक की एक पहल जिसमें अफ़्रीकी वित्तीय संस्थाओं को एक साथ लाकर, विकास के लिए एक नया वित्तीय तंत्र तैयार किया गया है.
जलवायु व ऊर्जा
महासचिव ने चेतावनी दी कि अफ़्रीका महाद्वीप जलवायु परिवर्तन के दंश को झेल रहा है, जबकि इस संकट में उसका योगदान सबसे कम है.
उन्होंने कहा कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिए 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा, अस्थाई रूप से पार करने को अब टाला नहीं जा सकता है, लेकिन यह भी नहीं है कि इसकी दिशा पलटी न जा सके.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने अफ़्रीका में नवीकरणीय ऊर्जा की सम्भावनाओं को संवारने, विशाल निवेश करने और जलवायु अनुकूलन प्रयासों के लिए और अधिक निवेश पर बल दिया.
यूएन प्रमुख ने कहा कि 2040 तक, अफ़्रीका अपनी आवश्यकताओं की 10 गुना अधिक बिजली का उत्पादन करने में सक्षम है, केवल नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से. इससे बिजली से वंचित 60 करोड़ अफ़्रीकी लोगों तक आपूर्ति पहुँचाई जा सकेगी.
मगर, अफ़्रीका को फ़िलहाल स्वच्छ ऊर्जा निवेश का केवल 2 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पा रहा है और इसलिए यह ज़रूरी है कि पूँजी की ऊँची लागत, कमज़ोर सप्लाई चेन और नाज़ुक ग्रिड जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए क़दम उठाए जाएं.