थाईलैंड में मौत की सज़ा के इन्तज़ार में जीवित रहने की दास्तान
थाईलैंड की एक महिला को नशीले पदार्थों की तस्करी के जुर्म में दोषी पाए जाने के बाद मृत्युदंड की सज़ा सुनाई गई थी. उसने आठ साल तक मृत्युदंड की प्रतीक्षा करते हुए, अपना हौसला बनाए रखा. उसका भाग्य बदला, मृत्युदंड की सज़ा आजीवन कारावस में बदली और फिर उसे क़ैद से रिहाई भी देखने को मिली. इस दौरान उसे सलाख़ों के पीछे रहकर ही, कपड़ों की सिलाई सीखकर, जीवन का अर्थ खोजने व रिहाई के बाद रोज़गार पाने में मदद मिली.
मरियम तादीन को जब मौत की सज़ा सुनाई गई थी, तब उनकी आयु केवल 21 वर्ष की थी.
थाईलैंड के दक्षिणी इलाक़े में उनके किराए के घर से पुलिस ने ‘याबा’ नामक ड्रग्सकी पाँच लाख से अधिक गोलियाँ बरामद की थीं. 'याबा' मेथमफ़ेटामाइन और कैफ़ीन का एक अवैध मिश्रण है जो दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई हिस्सों में लोकप्रिय है.
मरयम याद करते हुए बताती हैं, "मैंने जेल में 20 वर्ष, पाँच महीने और 15 दिन बिताए. मुझे एक अन्य व्यक्ति के साथ मौत की सज़ा सुनाई गई थी, जिसे घातक इंजेक्शन देकर मृत्युदंड दे दिया गया था. मुझे मालूम था कि अगला नम्बर मेरा था, मेरी मृत्यु होने वाली थी."
"उस घर में इतनी याबा गोलियाँ थीं कि उनसे एक पूरा ट्रक भर जाए. वे मेरी नहीं थीं; लेकिन इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा. मैं जेल पहुँची और सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ: मुझ पर ड्रग तस्करी का आरोप लगा और मौत की सज़ा सुना दी गई. उस समय, मैं मौत का सामना करने के लिए तैयार थी"
मृत्युदंड का कलंक
"अगले दो वर्षों तक, मुझे हर समय एक तख़्ती पहननी पड़ती थी जिस पर लिखा हुआ था 'मृत्युदंड'. आठ साल तक मैंने मौत का सामना किया, लेकिन आख़िरी दो वर्षों के दौरान मैंने इसे स्वीकार कर लिया था, क्योंकि मुझे एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था कि मौत के लिए, उलटी गिनती का सामना कैसे किया जाए."
"उसी वर्ष, एक भीषण बाढ़ आई और मुझे दूसरी जेल में भेज दिया गया. वहीं मुझे बताया गया कि मौत की सज़ा के मामले में मुझे शाही क्षमादान मिल गया है. मेरे नाइजीरियाई दोस्तों को भी क्षमादान मिला. हम नौ लोग थे. हमने केक बनाकर जश्न मनाया."
"हम जीवित रहने पर राहत तो महसूस कर रहे थे, अलबत्ता मुझे लगा कि मैं तो पहले ही बेदम हो चुकी हूँ, क्योंकि अब मुझे अपना शेष जीवन जेल में ही बिताना था. फिर भी, मैंने ख़ुद से कहा: यह एक लम्बा इन्तजार होने वाला है, इसलिए बेहतर होगा कि मैं किसी चीज़ पर पना ध्यान लगाऊँ."
"मैंने जेल की कक्षाओं में सिलाई सीखी और फिर मुझे काम पर लगा दिया गया. मैंने जितना अधिक काम किया, मुझे उतना ही अर्थपूर्ण महसूस होने लगा. मैंने कपड़े की छपाई और धागे पर अपना ध्यान लगाया. धागा दर धागा हर दिन."
"मुझे 4,000 अन्य महिलाओं वाली जेल में कुछ विशेषाधिकार भी मिले. मसलन, दिन में देर से नहाना, इससे जीवन थोड़ा आसान हो गया."
जीवन के कठिन मोड़
"मेरे लिए सबसे कठिन समय तब था जब मुझे थाईलैंड के दक्षिणी इलाक़े में स्थित सोंगखला जेल में भेजा गया. वहाँ अन्य क़ैदी बहुत ग़रीब थे. मेरे लिए यह कठिन था क्योंकि एक समय के बाद मेरे परिवार ने मुझसे मिलने आना बन्द कर दिया. उन्हें लगा कि मैं हमेशा के लिए जेल में रहूँगी. मिलने आने का क्या फ़ायदा? मेरे पति भी जीवन में आगे बढ़ गए; उन्होंने दूसरा विवाह कर लिया. यह जानकर बहुत तकलीफ़ हुई."
"मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं काम पर ध्यान लगाने में सक्षम रही. मैं कपड़ों पर अलग-अलग छपाई पर ध्यान देती थी."
"मैं ख़ुद को अपनी आपबीती या उन कारणों पर ध्यान टिकाने से बचाती थी जिनकी वजह से मैं जेल आई. न ही अपने पति के नए जीवन पर. मैं उसे बदल नहीं सकती थी. जो हो गया सो हो गया. मुझे अपने जीवन में आगे बढ़ने की ज़रूरत थी. जब भी मुझे बुरे विचार आते, मैं फिर से कपड़े और उन पर तरह-तरह की छपाई को देखने में तल्लीन हो जाती."
जीवन और मृत्यु के धागे
"2004 की सुनामी के दौरान सब कुछ बदल गया. मुझे शवों के लिए कपड़े के थैले सिलने के लिए कहा गया. मैंने बहुत सारे कपड़े काटे, क्योंकि बहुत सारे लोगों की मौतें हुई थीं. इसी तरह मेरा ध्यान अपने जीवन से हट गया. मैं बस सिलाई और छपाई पर ध्यान लगाती थी."
एक नई शुरुआत
2021 में, 52 वर्ष की आयु में, मरियम को उनके अच्छे आचरण के लिए दूसरा शाही क्षमादान मिला और उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया. सिलाई व्यवसाय के जिस मालिक ने पहले क़ैदियों को प्रशिक्षित किया था, उन्होंने मरियम को अपने यहाँ रोज़गार वाला कामकाज देने की पेशकश की.
मरियम आज, 56 वर्ष की आयु में काम करती हैं, सिलाई करती हैं और अपने के साथ सुलह करने के बाद, बच्चों व पति के साथ रहती हैं.
ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) ने थाईलैंड की लगभग 60 जेलों को व्यावसायिक प्रशिक्षण उपकरण प्रदान किए हैं. इनसे क़ैदियों को लकड़ी के काम और सिलाई जैसे व्यावहारिक कौशल सीखने में मदद मिली है, जिससे जेल के दौरान और रिहाई के बाद उनके लिए अवसरों में वृद्धि हुई है.