संयुक्त अरब अमीरात पर हमलों की पृष्ठभूमि में, सुरक्षा परिषद की 'बन्द-कक्ष' बैठक
संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संकट और संयुक्त अरब अमीरात में हाल ही में हुए मिसाइल व ड्रोन हमलों से उपजी चिन्ताओं के बीच, मध्य पूर्व क्षेत्र में शान्ति प्रयासों के लिए अपना समर्थन फिर दोहराया है.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बुधवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों के साथ अपनी नियमित वार्ता में बताया कि राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए यूएन की शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को बन्द कमरे में हुई सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित किया है.
अवर महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद में, सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात में हुए मिसाइल व ड्रोन हमलों के बाद उपजी स्थिति से अवगत कराया.
संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया है, हालाँकि ईरान ने ऐसे आरोपों को ख़ारिज किया है.
यूएन प्रवक्ता के अनुसार, अवर महासचिव डीकार्लो ने कहा कि “28 फ़रवरी को हिंसक टकराव शुरू होने के बाद से, महासचिव ने मध्य पूर्व और उससे परे तक, सभी अवैध हमलों की निन्दा की है.”
कूटनैतिक प्रयास जारी
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का सम्मान किए जाने और आम नागरिकों व बुनियादी प्रतिष्ठानों का सम्मान व संरक्षण का भी आग्रह किया है.
इस प्रस्ताव को मार्च में पारित किया गया था, जोकि ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अनेक देशों पर ड्रोन व मिसाइल हमले किए जाने की पृष्ठभूमि में, सुरक्षा परिषद में पेश किया गया था. इससे पहले, इसराइल व संयुक्त राज्य अमेरिका ने 28 फ़रवरी को ईरान पर हवाई बमबारी की थी, और ईरान के जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद मध्य पूर्व क्षेत्र में हिंसक टकराव भड़क उठा था.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने ध्यान दिलाया कि मध्य पूर्व में हिंसक टकराव के मुद्दे पर महासचिव के निजी दूत, ज्याँ अरनॉ ने क्षेत्र में कूटनैतिक विचार-विमर्श जारी रखा है और वह बुधवार को तुर्कीये के विदेश मंत्री से भी मुलाक़ात कर रहे हैं.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र, इस हिंसक टकराव के व्यापक और स्थाई समाधान के लिए सभी प्रयासों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है.
बहरीन: क्षेत्रीय सुरक्षा पर ख़तरा
सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात के फ़ुजैराह में एक तेल टर्मिनल पर हुए हमलों के बाद सुरक्षा परिषद की यह बैठक, बहरीन के अनुरोध पर बुलाई गई थी. इन हमलों में तेल भंडारण केन्द्र को क्षति पहुँची है और कुछ लोग घायल हुए हैं.
दोनों देशों के राजदूतों ने बन्द दरवाज़ों में हुई इस बैठक से पहले मीडिया को सम्बोधित किया.
बहरीन के राजदूत जमाल फ़रेस अलरोवई ने कहा कि ये जघन्य हमले, अस्थिर करने वाले उस आचरण का हिस्सा हैं, जोकि सुनियोजित है और जिसके रुझानों में तेज़ी आ रही है. उनके अनुसार, इस घटनाक्रम से खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता व सुरक्षा पर ख़तरा है.
उन्होंने इसे सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का भी खुला उल्लंघन बताया और कहा कि यह दर्शाता है कि ईरान ने इस प्रस्ताव को पालन नहीं करना जारी रखा है.
UAE: कोई इक़लौती घटना नहीं
संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत मोहम्मद अबूशहाब ने पत्रकारों को बताया कि ईरान ने 12 बैलेस्टिक मिसाइलों, 3 क्रूज़ मिसाइलों और चार ड्रोन विमानों से हमला किया, जिससे फ़ुजैराह तेल भंडारण ज़ोन में आग लग गई और नागरिक ऊर्जा प्रतिष्ठान पर असर हुआ.
“UAE की वायु प्रतिरक्षा प्रणाली ने इनमें से अधिकाँश ख़तरों से निपट लिया, जिससे सीमित स्तर पर ही क्षति पहुँची. इसके बावजूद, 3 आम नागरिक घायल हो गए.”
यूएई राजदूत ने कहा कि यह कोई एकमात्र घटना नहीं है. 28 फ़रवरी को हिंसक टकराव भड़कने के बाद से अब तक ईरान ने 500 से अधिक बैलेस्टिक मिसाइलों, लगभग 30 क्रूज़ मिसाइलों और 2 हज़ार से अधिक ड्रोन हमले किए हैं.
जहाज़ों पर हमलों से चिन्ता
इस बीच, ईंधन, उर्वरक समेत अन्य सामान की आपूर्ति के लए रणनैतिक रूप से अहम संकरे जलमार्ग, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाज़ों पर अब भी हमले हो रहे हैं.
इस जलक्षेत्र में व्याप्त असुरक्षा का असर ऊर्जा बाज़ारों, सप्लाई चेन, खाद्य क़ीमतों और पूरे विश्व में आर्थिक स्थिरता पर हो रहा है.
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने मंगलवार को ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ में सैन एंटोनियो नामक फ़्रेंच जहाज़ पर हमला होने की पुष्टि की है, जिसमें कम से कम 8 समुद्री नाविक घायल हुए हैं.
फ़रवरी के अन्तिम दिनों से अब तक ऐसी 32 घटनाएँ हुई हैं, जिनमें 10 लोगों की जान गई है.