संक्षेप में: खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता के लिए नए ख़तरे; सूडान में ड्रोन हमलों की निन्दा
संयुक्त राष्ट्र ने 4 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर हुए मिसाइल व ड्रोन हमलों पर गहरी चिन्ता जताते हुए कहा है कि ऐसी घटनाओं से मध्य पूर्व में फिर से लड़ाई भड़कने का ख़तरा है. उधर, सूडान की राजधानी ख़ारतूम के एयरपोर्ट पर हुए ड्रोन हमलों के बाद वहाँ उड़ानों को फ़िलहाल स्थगित कर दिया गया है.
UAE में हुए इस हमले में कम से कम तीन लोग घायल हुए और फ़ुजैराह तेल इंडस्ट्री ज़ोन में आग लग गई थी. समाचार माध्यमों के अनुसार, सोमवार को फुज़ैराह में एक टैंकर पर अज्ञात प्रक्षेप्य (projectile) आकर गिरे थे, जोकि अमीरात क्षेत्र में सबसे बड़े तेल भंडारण केन्द्रों में है.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जलक्षेत्र में भी पिछले कुछ दिनों में जहाज़ों को निशाना बनाकर कई हमले किए गए हैं.
इस घटनाक्रम से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में नए सिरे हिंसक टकराव भड़कने का ख़तरा बढ़ गया है और नाज़ुक परिस्थितियों में लागू युद्धविराम पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
28 फ़रवरी को इसराइल व संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर बमबारी किए जाने और ईरान के जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद, मध्य पूर्व में स्थित अनेक देश हिंसक टकराव की चपेट में थे.
इस दौरान ऊर्जा व तेल प्रतिष्ठानों पर भी हमले किए गए, और रणनैतिक रूप से ईंधन, उर्वरक समेत अन्य सामान की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण संकरे जलमार्ग, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों की रफ़्तार थम गई थी.
अप्रैल के शुरुआती दिनों में ईरान और अमेरिका में युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद इस जलक्षेत्र में तनातनी व नाकेबन्दी की वजह से समुद्री परिवहन थमा हुआ है और तनाव व्याप्त है.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे किसी भी क़दम से परहेज करने का आग्रह किया है, जिससे तनाव बढ़े या कूटनैतिक व मध्यस्थता प्रयास कमज़ोर हों.
उन्होंने दोहराया है कि अन्तरराष्ट्रीय विवादों के शान्तिपूर्ण निपटारे का कोई अन्य व्यवहारिक विकल्प नहीं है और इसके लिए यूएन चार्टर समेत अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत प्रयास किए जाने होंगे.
सूडान: ड्रोन हमलों के बाद उड़ानें स्थगित
सूडान की राजधानी ख़ारतूम में स्थित हवाई अड्डे और शहर के अन्य इलाक़ों को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमलों के बाद, एयरपोर्ट पर उड़ानें अब भी स्थगित हैं.
यूएन प्रवक्ता ने कहा कि यह एयरपोर्ट, मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए मार्ग के रूप में महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से सहायताकर्मियों की आवाजाही के लिए.
संयुक्त राष्ट्र ने इन हमलों की निन्दा करते हुए कहा कि इनसे आम नागरिकों व बुनियादी प्रतिष्ठानों पर असर हुआ है. अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत ऐसे हमले निषिद्ध हैं और इसलिए सभी युद्धरत पक्षों को अपने तयशुदा दायित्वों को निभाना होगा.
सूडान के व्हाइट नाइल प्रान्त में सोमवार को हुए ड्रोन हमलों में एक ईंधन स्टेशन और टैंकर को निशाना बनाया गया था. मंगलवार को शहर के कई इलाक़ों में हमले हुए हैं, जिनमें एक व्यस्त इलाक़े में स्थित दो ईंधन केन्द्र भी हैं. हमलों में कुछ लोगों के हताहत होने की ख़बरें हैं और बुनियादी सेवाओं में व्यवधान दर्ज किया गया है.
इस बीच, दारफ़ूर क्षेत्र में लड़ाई जारी है. सूडान में अप्रैल 2023 में परस्पर विरोधी सैन्य बलों, सशस्त्र सेना व अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था, जोकि देश में एक विशाल मानवीय व विस्थापन संकट की वजह बना है.
RSF ने 1.5 वर्ष की घेराबन्दी के बाद उत्तर दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर को अपने क़ब्ज़े में लिया था, जहाँ कथित रूप से बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन व अत्याचार मामलों को अंजाम दिए जाने की घटनाएँ हुईं.
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, पिछले वर्ष अक्टूबर से लेकर इस साल मार्च तक, 1.38 लाख पुरुष, महिलाएँ व बच्चे अल फ़शर और अन्य नज़दीकी गाँवों से विस्थापित हुए हैं.
यूएन ने लड़ाई को तत्काल रोकने, आम नागरिकों व बुनियादी प्रतिष्ठानों की रक्षा करने और ज़रूरतमन्द आबादी तक जल्द से जल्द मानवीय सहायता पहुँचाने के मार्ग की पुकार लगाई है.
ग़ाज़ा: पाबन्दियों के बीच विशाल स्वास्थ्य आवश्यकताएँ
संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने बताया है कि क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े के रिहायशी इलाक़ों में आम नागरिक अब भी हवाई हमलों और गोलीबारी की चपेट में आ रहे हैं.
यूएन के साझीदार संगठनों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद, पिछले सप्ताह के दौरान हुई सुरक्षा से जुड़ी घटनाएँ अब तक के सबसे अधिक मामलों में थी.
दो अलग-अलग घटनाओं में मानवीय सहायता केन्द्र भी गोलीबारी की चपेट में आए हैं. यूएन भंडारण केन्द्र के नज़दीक एक हवाई हमला होने की ख़बर है, वहीं पत्थरबाज़ी की घटना में राहत कार्यों के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले कुछ वाहनों को नुक़सान पहुँचा है.
इस बीच, ग़ाज़ा में इंजिन के लिए तेल, मरम्मत के कल-पुर्ज़ों, मलबा हटाने की मशीनरी और अन्य अति-आवश्यक सामग्री के प्रवेश पर पाबन्दियाँ हैं, जिससे अहम सेवाओं पर असर हुआ है.
आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय ने बताया है कि ख़राब होने वाले वाहनों या जनरेटर की मरम्मत नहीं हो पा रही है, जिससे खाद्य वितरण, ट्रक के ज़रिए जल आपूर्ति, ऐम्बुलेंस सेवाओं, शैक्षणिक सामग्री व चिकित्सा सामान के वितरण में व्यवधान आया है.
जनरेटर ख़राब होने से अस्पतालों में कामकाज पर असर हुआ है और गहन देखभाल कक्ष भी प्रभावित हुए हैं. स्वास्थ्य सैक्टर में सक्रिय यूएन साझीदारों ने बताया है कि ग़ाज़ा में विशाल आवश्यकताएँ हैं, जिन्हें फ़िलहाल पूरा नहीं किया जा सका है.
हज़ारों मरीज़ों को जीवनरक्षक सेवाओं की आवश्यकता है, लेकिन फ़िलहाल स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली उसे सुनिश्चित कर पाने में असमर्थ है. इसके मद्देनज़र, कठिनाइयों से जूझ रही स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूती देने के लिए आपात चिकित्सा कर्मियों की तैनाती की गई है.