मिस्र में सूडानी शरणार्थियों पर मंडरा रहा धन कटौती का ख़तरा
सूडान में युद्ध से सुरक्षा की ख़ातिर भागकर पड़ोसी देश मिस्र में शरण लेने वाले लोगों को अब एक नई चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. सहायता धन की कटौती के कारण, लोगों के लिए जीवन रक्षक सेवाओं के खो जाने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है.
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग साढ़े 8 लाख सूडानी नागरिक इस समय मिस्र में रह रहे हैं, जो अपने देश में जारी भीषण युद्ध से जान बचाकर आए हैं. इस युद्ध को अब 4 वर्ष हो चुके हैं.
इनमें नवल (बदला हुआ नाम) नामक महिला भी शामिल है. नवल, एक विधवा माँ हैं, जो अपने 6 बच्चों की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रही हैं.
उनके बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है, और सबसे छोटा बच्चा लगातार बीमार रहता है.
ख़तरे में यूएन सहायता
मिस्र में UNHCR की प्रवक्ता क्रिस्टीन बेशाय ने यूएन न्यूज़ को बताया कि एजेंसी, अनेक सेवाओं के ज़रिए, सूडान से आए लोगों की मदद करती है, जिनमें पंजीकरण और शरणार्थी दर्जा निर्धारण शामिल है.
उन्होंने बताया कि इसकी ज़िम्मेदारी मिस्र सरकार ने UNHCR को सौंपी है. एजेंसी संरक्षण सेवाएँ, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल संरक्षण और मनोसामाजिक सहायता भी प्रदान करती है.
साथ ही, नवल जैसे सबसे ज़रूरतमन्द परिवारों को नक़दी सहायता भी दी जाती है, लेकिन, शरणार्थियों को मिल रही यह सहायता अब ख़तरे में है.
क्रिस्टीन बेशाय के अनुसार, इसका कारण गम्भीर धन की कमी है, जो न केवल मानवीय और विकास एजेंसियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता में हालिया बदलाव से जुड़ी है, बल्कि ऐसी स्थिति इसलिए भी उत्पन्न हुई है क्योंकि मिस्र में शरणार्थियों की कुल संख्या तीन साल पहले की 3 लाख से बढ़कर, अब 11 लाख से अधिक हो गई है.
पर्याप्त सहायता नहीं...
साल 2025 में, वित्तीय सहायता का स्तर लगभग 2022 जैसा ही बना रहा यानि सूडान संकट शुरू होने से पहले का स्तर.
क्रिस्टीन बेशाय ने कहा, “प्रत्येक शरणार्थी के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता का हिस्सा 11 डॉलर प्रति माह से घटकर केवल 4 डॉलर रह गया है.”
उन्होंने कहा, “11 डॉलर की राशि भी शरणार्थियों की सभी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी. अब जबकि शरणार्थियों की संख्या दोगुनी हो गई है और वित्तीय सहायता में कमी है, हमें अपनी सहायता घटानी पड़ी है.”
नवल जैसे परिवारों के लिए यह रक़म काफ़ी नहीं है.
नक़दी कार्यक्रम के बन्द होने का ख़तरा
यूएन अधिकारी ने चेतावनी दी कि नक़दी सहायता कार्यक्रम को आवश्यक वित्तीय सहायता का केवल 2 प्रतिशत ही मिल पाया है, जिसके कारण लाभार्थी परिवारों की संख्या “आधे से भी कम” रह गई है.
उन्होंने कहा, “यदि आने वाले कुछ सप्ताहों में अतिरिक्त सहायता नहीं मिली, तो इस कार्यक्रम के बन्द होने का ख़तरा है.”
क्रिस्टीन बेशाय ने बताया कि नक़दी सहायता पाने वाले अधिकांश परिवारों की मुखिया महिलाएँ हैं, और इन परिवारों में आमतौर पर स्कूली उम्र के बच्चे शामिल हैं.
यूएन शरणार्थी एजेंसी, शरणार्थियों को सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न संस्थाओं और साझीदारों के साथ मिलकर काम भी कर रही है.