साइबर सुरक्षा को समय के साथ मज़बूत बनाना क्यों है बेहद ज़रूरी
दुनिया की आबादी का लगभग 70% हिस्सा यानि क़रीब साढ़े 5 अरब लोग, आज इंटरनैट का प्रयोग करते हैं यानि वो ऑनलाइन हैं. इंटरनैट उनकी ज़िन्दगियों के लिए बहुत अहम है क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर वित्तीय बाज़ारों, और सार्वजनिक सेवाओं से लेकर चुनावों तक, दुनिया की तमाम महत्वपूर्ण प्रणालियाँ इंटरनैट नामक नाज़ुक डिजिटल नैटवर्क पर टिकी हैं और यह जाल अब दुनिया के लगभग हर कोने तक पहुँच चुका है मगर साइबर हमलों ने बहुत विशाल चुनौतियाँ भी उत्पन्न की हैं.
इसमें तो कोई सन्देह नहीं है कि पहले तारों के ज़रिए और अब बेतार साधनों के ज़रिए दुनिया को जोड़ने वाले इंटरनैट के अनगिनत फ़ायदे हैं, मगर इसका प्रयोग जोखिमों से अछूता भी नहीं है.
हालिया इतिहास गवाह है कि एक छोटी सी भूल या ग़लती भी वैश्विक तबाही मचा सकती है. याद करें वर्ष 2017 में हुआ NotPetyaसाइबर हमला, जिसकी शुरुआत यूक्रेन की एक छोटी सी कम्पनी से हुई थी, उसने अन्ततः वैश्विक व्यवसायों को 10 अरब डॉलर से अधिक का नुक़सान पहुँचाया.
उसी वर्ष यानि 2017 में ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) पर WannaCry –साइबर हमला शुरू में तो छोटा ही नज़र आया था, मगर उसने 150 देशों में फैलने से पहले NHS को पूरी तरह ठप कर दिया था.
और जब वर्ष 2022 में जब रैड क्रॉस रैड क्रैसेंट (ICRC) पर साइबर हमला हुआ था तो उसने दुनिया भर में 5 लाख से अधिक लोगों के बारे में अतिसंवेदनशील जानकारी को जोखिम डाल दिया था.
संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण शोध संस्थान (UNIDIR) के विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अब केवल तकनीकी सुधारों का दौर ख़त्म हो चुका है. गरिक बुनियादी ढाँचे पर सरकारी संलिप्तता वाले हमले बढ़ने के साथ, साइबर अपराध महामारी का रूप ले रहा है. इन हमलों से होने वाला नुक़सान कई ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है.
अब ध्यान "साइबर सुरक्षा" से हटकर"साइबर मज़बूती" (Cyber Resilience) पर केन्द्रित हो गया है. इसका अर्थ है समाजों की वह सामूहिक क्षमता, जिससे वे, साइबर हमले सफल होने की स्थिति से निपटने के लिए ख़ुद को ढाल सकें और उससे उबर सकें.
दरारों के हालात में एकजुटता की ज़रूरत
निसन्देह व्यवसाय और देशों की सरकारें, वैश्विक सहयोग की तत्काल आवश्यकता को समझते हैं, मगर अनेक तरह की "दरारें" वैश्विक कार्रवाई में बाधा डाल रही हैं:
- भू-राजनैतिक तनाव: दो-तिहाई संगठन अब अपनी साइबर रणनीति पर, राजनीति को सबसे बड़ा प्रभाव मानते हैं.
- नियमों का उलझाव: तीन-चौथाई सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि परस्पर विरोधी वैश्विक नियम, क़ानूनों व दिशा निर्देशों पर अमल यानि अनुपालन (compliance) की कोशिशों को कठिन बनाते हैं.
- लघु एवं मध्यम उद्योग (SME) - एक कमज़ोर कड़ी: बड़े संस्थानों की तुलना में छोटे व्यवसायों में सहनशीलता की कमी होने की सम्भावना दोगुनी होती है, फिर भी वे उन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का अभिन्न हिस्सा हैं जिन पर हम सभी निर्भर हैं.
- उभरते ख़तरे: 2026 में, जैनेरेटिव एआई के जटिल हमलों पर, बहुत चिन्ताएँ उभरी हैं, जबकि quantum computing, मौजूदा सुरक्षा कवच यानि Encryption को तोड़ने का ख़तरा उत्पन्न कर रही है.
साइबर मज़बूती के वादों को पूरा करना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को, साइबर हमलों अन्तरराष्ट्रीय शान्ति के लिए उत्पन्न इन ख़तरों के बारे में बार-बार जानकारी दी गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कोई भी देश अकेले इन जोखिमों का प्रबन्धन नहीं कर सकता.
इन दूरियों को पाटने के लिए, अन्तरराष्ट्रीय संस्थान, ज़िम्मेदार देशों के व्यवहार के लिए तय किए गए, 11 यूएन मानदंडों को ठोस रूप से लागू करने की दिशा में बढ़ रहे हैं.
प्रमुख पहलों में 'वैश्विक सम्पर्क डायरेक्टरी’ शामिल है, जो घटनाओं के दौरान दबाव और तनाव कम करने के लिए सुरक्षित संचार चैनल बनाती है.
इसके अलावा, जल्द ही संयुक्त राष्ट्र का'सूचना व संचार प्रौद्योगिकी की सुरक्षा पर वैश्विक वैश्विक प्रणाली' आरम्भ किया जाएगा. इस स्थाई मंच का उद्देश्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और तकनीकी क्षमता साझा करने के मानकों को तय करना है.
एक सहनशील भविष्य के निर्माण की ख़ातिर, उद्योग जगत और शिक्षाविदों को संचालन भागीदारों के रूप में साथ लाना आवश्यक है.
वैश्विक समुदाय, विश्व आर्थिक मंच (WEF) और जिनीवा साइबर सप्ताह जैसे मंचों के माध्यम से ज्ञान साझा करके, यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि आधुनिक जीवन का आधार बना डिजिटल ढाँचा, तेज़ी से जटिल होते ख़तरों के बीच भी अडिग रहे.