वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रैस, शान्ति, विश्वास और न्याय के लिए अनिवार्य

हैती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस या मीडिया कार्यक्रम में पत्रकारों और कैमरामैन का एक समूह। अग्रभूमि में एक व्यक्ति पीली शर्ट पहने हुए है, जिसके पीछे 'PRESSE' लिखा है।
संयुक्त राष्ट्र समाचार/डैनियल डिकिन्सन हेती में 2021 से अब तक 14 मीडियाकर्मियों की हत्या हो चुकी है.

स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रैस, शान्ति, विश्वास और न्याय के लिए अनिवार्य

क़ानून और अपराध रोकथाम

मीडिया में काम करना आज के दौर में एक ख़तरनाक पेशा बन गया है और मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना भी एक बहुत कठिन काम हो गया है. मीडिया की स्वतंत्रता की अनुपस्थिति में अक्सर समुदाय तथा कमज़ोर वर्ग के लोग ख़तरे में पड़ जाते. विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, यूनेस्को की एक नई रिपोर्ट में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में लगातार वैश्विक गिरावट और पत्रकारों तथा मीडिया संस्थानों पर बढ़ते दबाव को रेखांकित किया गया है.

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'विश्व में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रुझान' नामक इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2012 की तुलना में वैश्विक अभिव्यक्ति स्वतंत्रता सूचकांक में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. 

इस रिपोर्ट में, जनवरी 2022 से नवम्बर 2025 की अवधि को शामिल किया गया है. 

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में आत्म-सैंसरशिप में 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. साथ ही, समाचार पत्रों, टेलीविज़न, रेडियो और डिजिटल मंचों पर 48 प्रतिशत तक नियंत्रण बढ़ गया है.

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि शैक्षणिक और कलात्मक स्वतंत्रता भी निरन्तर संकुचित होती जा रही है.

यूएन प्रमुख ने जताई चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने प्रैस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आगाह किया कि आज, दुनिया भर में मीडियाकर्मी सैंसरशिप, निगरानी और क़ानूनी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं, यहाँ तक कि उन्हें अपनी जान तक गँवानी पड़ रही है.

उन्होंने विशेष रूप से ध्यान दिलाया कि युद्धक्षेत्रों में पत्रकारों को जान-बूझकर निशाना बनाया जाता है. 

महासचिव ने, इस जानलेवा ख़तरे के अलावा, सूचनाओं व जानकारियों को तोड़मरोड़ कर पेश करने के बढ़ते चलन पर भी गहरी चिन्ता जताई.

उनके अनुसार, यह प्रवृत्ति समाज में अविश्वास की जड़ें मज़बूत करती जा रही है, जो लोकतंत्र और स्वतंत्र पत्रकारिता दोनों के लिए एक बड़ा ख़तरा है.

दुनिया भर में मीडिया कर्मियों पर हमले

यूनेस्को के एक आँकड़े के अनुसार, हेती में 2021 से अब तक 14 मीडियाकर्मियों की हत्या हो चुकी है.

हेती के प्रिंट और रेडियो पत्रकार जाँ दानियल सेना का कहना है कि उनके साथी आपराधिक गिरोहों के "निरन्तर ख़तरे" में जीते हैं.

वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इसराइल के विरुद्ध हुए आतंकी हमलों के बाद से, केवल ग़ाज़ा में लगभग 300 पत्रकार मारे जा चुके हैं.

साथ ही, ग़ाज़ा में विदेशी पत्रकारों के प्रवेश पर लगातार पाबन्दी बनी हुई है. ऐसे में, इस युद्ध को दुनिया के सामने दर्ज करने की पूरी ज़िम्मेदारी स्थानीय पत्रकारों के कन्धों पर आ पड़ी है, और यह ज़िम्मेदारी वे अक्सर अपनी जान की भारी क़ीमत चुकाकर निभा रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में 2021 में तालेबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद से, प्रैस स्वतंत्रता में चिन्ताजनक गिरावट देखी गई है. स्वतंत्र रिपोर्टिंग अब गम्भीर रूप से सीमित हो गई है, और पत्रकार व मीडिया कर्मी एक ऐसे माहौल में काम कर रहे हैं जो लगातार अधिक प्रतिबन्धात्मक और शत्रुतापूर्ण होता जा रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, तालेबान शासन, पत्रकारों पर कई तरह के नियंत्रण लगा रहा है, जिनमें सैंसरशिप, कड़ी निगरानी और तथाकथित ‘सदाचार के प्रचार और बुराई की रोकथाम’ क़ानून जैसे क़ानूनी प्रतिबन्ध शामिल हैं.

स्वतंत्र प्रैस ही शान्ति और न्याय की आधारशिला

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रैस, शान्ति और न्याय की आधारशिला बनी हुई है.

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उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से आकार लेते बदलते डिजिटल परिदृश्य में विश्वसनीय पत्रकारिता की बढ़ती अहमियत को भी रेखांकित किया.

उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने ज़ोर देकर कहा कि विश्वसनीय समाचार रिपोर्टिंग दुष्प्रचार का मुक़ाबला करने और आपसी समझ को बढ़ावा देने में सहायक है.

साथ ही, उन्होंने दोहराया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, तकनीक का नैतिक उपयोग और पत्रकारों की सुरक्षा, ये तीनों तत्व शान्तिपूर्ण समाज के निर्माण के लिए अपरिहार्य हैं.

वहीं, वैश्विक संचार विभाग (DGC) की प्रमुख और अवर महासचिव मेलिसा फ़्लेमिंग ने कहा है कि एक बिखरती दुनिया में विश्वास क़ायम करने के लिए, विश्वसनीय समाचार संकलन की ख़ातिर, सुरक्षित पहुँच व माहौल अनिवार्य है, और यही प्रैस की स्वतंत्रता की असली बुनियाद है.

'Fake News' के घातक परिणाम

अन्तरारष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की पूर्व समाचार एवं मीडिया प्रमुख रोज़ालिंड यार्डे ने 'फ़ेक न्यूज़' के घातक परिणामों की ओर ध्यान दिलाया है.

उन्होंने कहा कि पत्रकारों की कठिनाइयों और उनकी मृत्यु व उनके घायल होने के बारे में रिकॉर्ड शुरू किए जाने के बाद से, वर्ष 2025 में सबसे अधिक संख्या में पत्रकार और मीडियाकर्मी मारे गए. लेकिन स्वतंत्र पत्रकारिता को ख़तरा केवल युद्ध तक सीमित नहीं है."

"आर्थिक दबाव और तेज़ी से केन्द्रीकृत व राजनैतिक होते मीडिया स्वामित्व के साथ मिलकर भ्रामक सूचनाएँ, दुष्प्रचार और फ़ेक न्यूज़ अनेक पत्रकारों की सत्ता से सच बोलने की क्षमता को कमज़ोर कर चुकी हैं."

"इसका परिणाम है: कमज़ोर होते लोकतंत्र और बिखरती सामाजिक एकता."

रोज़ालिंड यार्डे ने, 2024 के ब्रिटेन के नस्लवादी दंगों का हवाला देते हुए कहा कि 3 मासूम बच्चों की निर्मम हत्या के बाद, AI से बनाई गई नक़ली तस्वीरों और सोशल मीडिया पर फैले दुष्प्रचार ने यह झूठा दावा किया कि हत्यारा एक मुस्लिम शरणार्थी था, और इसी झूठ ने दंगों को हवा दी.

रोज़ालिंड यार्डे ने कहा, "फ़ेक न्यूज़ के इस दौर में, अच्छी पत्रकारिता की रक्षा करना पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गया है."

प्रैस स्वतंत्रता दिवस की यात्रा

प्रैस स्वतंत्रता दिवस मनाने का विचार अफ़्रीका में स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया के अस्तित्व की व्यापक लड़ाई के बीच उभरा.

1991 में, नामीबिया की राजधानी विंडहोक में पत्रकारों का एक ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ, जहाँ विंडहोक घोषणापत्र तैयार किया गया. इस घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया कि स्वतंत्र प्रैस, समाज के लोकतांत्रिक और सतत विकास के लिए अनिवार्य है.

घोषणापत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि जब मीडिया को नियंत्रित या सैंसर किया जाता है, तो सत्य, नागरिकों तक नहीं पहुँच पाता, जिससे असमानता और तानाशाही को बढ़ावा मिलता है.

यह विचार अन्ततः संयुक्त राष्ट्र महासभा तक पहुँचा, और 3 मई को (विंडहोक घोषणापत्र को अपनाए जाने की तिथि पर) विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया.

फोटो रिपोर्टर डारिया बुराकिना 25 अक्टूबर, 2020 को बेलारूस के मिन्स्क में एक विरोध मार्च की तस्वीरें खींचते हुए एक बाड़ पर खड़ी है।
© यूनेस्को/दारिया बुराकिना एक विरोध प्रदर्शन की तस्वीर लेते हुए एक पत्रकार,.