होर्मुज़ जलमार्ग में जहाज़ों की सुरक्षा के प्रति अनिश्चितता बरक़रार
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान और अमेरिकी नौसेना के बीच जारी तनातनी और हमलों के दावों व प्रतिदावों के बीच वहाँ से गुज़रने की कोशिश कर रहे जहाज़ों से अधिकतम सतर्कता बरतने का आग्रह किया है.
समाचार माध्यमों में ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ जलमार्ग पर सिलसिलेवार हमलों की रिपोर्ट आई हैं और व्यावसायिक जहाज़ों के लिए सुरक्षा चेतावनियाँ जारी की गई हैं.
समुद्री मार्गों पर जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही पर केन्द्रित एक अन्तरराष्ट्रीय पोर्टल ‘UKMTO’ के अनुसार, 4 मई को संयुक्त अरब अमीरात में स्थित फुज़ैराह के उत्तर से गुज़र रहे एक टैंकर पर अज्ञात प्रक्षेप्य (projectile) आकर गिरे.
वहीं, इससे एक दिन पहले ही एक मालवाहक जहाज़ पर ईरान के तट के पास अनेक छोटी नावों के ज़रिए हमला किया गया था.
यूएन एजेंसी ने कहा कि “हमें इस तरह की ख़बरों की जानकारी गै, लेकिन हमारे पास इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है. हमारा सभी जहाज़ों से निरन्तर आग्रह है कि इस इलाक़े में अधिकतम सतर्कता बरती जानी होगी.”
IMO फ़िलहाल इन घटनाओं के बारे में जानकारी एकत्र करने में जुटा है.
सतर्कता का सन्देश
इस जलमार्ग पर उपस्थित अन्य जहाज़ों को रेडियो सन्देश के ज़रिए नाज़ुक सुरक्षा स्थिति के प्रति सतर्क किया गया है और उन्हें लंगर स्थल से हटने के निर्देश दिए गए हैं.
28 फ़रवरी को इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर बमबारी की थी, जिसके बाद ईरान ने जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमले किए थे, जिनकी चपेट में खाड़ी क्षेत्र में स्थित देश भी आ गए थे.
रणनैतिक रूप से तेल, गैस, उर्वरक और अन्य सामान की आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य में भी असुरक्षा व्याप्त होने से जहाज़ों की रफ़्तार थम गई थी. यह संकरा जलमार्ग, फ़ारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है.
UKMTO के अनुसार फ़रवरी महीने के अन्त से अब तक, अरब की खाड़ी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के इलाक़ों में जहाज़ों को प्रभावित करने वाली कम से कम 41 घटनाएँ हो चुकी हैं.
ईरान ने सोमवार को होर्मुज़ जलमार्ग में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना के एक जहाज़ को निशाना बनाने का दावा किया है, लेकिन अमेरिका ने ऐसी किसी भी घटना से मना किया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने रविवार देर शाम सोशल मीडिया पर अपने एक सन्देश में कहा कि जो जहाज़ इस जलमार्ग पर पिछले कई दिनों से फँसे हुए हैं, उन्हें बाहर निकालने के लिए अमेरिका द्वारा मदद मुहैया कराई जाएगी.
यूएन के समन्वित प्रयास
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन, टकराव व तनाव के बीच जहाज़रानी उद्योग के साथ मिलकर आपात योजना के लिए प्रयासरत है, जिसमें हिंसक टकराव से ग्रस्त जलमार्गों से जहाज़ों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक ढाँचा तैयार किया जा रहा है.
एक अनुमान के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय व्यापार गतिविधियों में शामिल 800 तेल टैंकर, विशाल मालवाहक जहाज़ को यहाँ से सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा सकती है, जिन पर महत्वपूर्ण ऊर्जा सामान और अन्य वस्तुएँ लदी हैं.
प्रति जहाज़, नाविक दल के औसतन 25 सदस्य होने का अनुमान है, जिसके अनुसार लगभग 20 हज़ार नाविक फ़िलहाल इस जलमार्ग पर फँसे हुए हैं और जोखिमों का सामना कर रहे हैं.
सुरक्षा दल, समाधान नहीं
यूएन एजेंसी ने आगाह किया है कि फ़ारस की खाड़ी इलाक़े में फँसे जहाज़ों पर मौजूद सभी समुद्री नाविक, किसी भी प्रकार के हिंसक टकराव के भड़कने के जोखिम के प्रति संवेदनशील हैं.
IMO ने मिसाइलों, गिरते मलबे की चपेट में आने और जहाज़ों पर भोजन व जल की क़िल्लत होने के बारे में आगाह किया है.
कुछ मामलों में समुद्री नाविक दल को बदला गया है और उन्हें देश भी वापिस भेजा गया है. 450 समुद्री नाविकों को इसके ज़रिए मदद मिली है, लेकिन हज़ारों अब भी समुद्री मार्ग में फँसे हुए हैं.
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने कहा कि सुरक्षा प्रदान करने वाले क़ाफ़िले इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं हैं, और इसलिए टकराव को दूर करना व एक दीर्घकालिक समझौते के ज़रिए सुरक्षित नौवहन को सुनिश्चित करना अहम होगा.