पत्रकारों पर हमलों से लोकतंत्र की नींव कमज़ोर, पुख़्ता सुरक्षा की अपील
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आगाह किया है कि दुनिया के अनेक स्थानों पर पत्रकारों के लिए बढ़ते ख़तरे, शान्ति और लोकतंत्र की नींव को कमज़ोर कर रहे हैं. मध्य पूर्व में युद्ध ने इस वर्ष अभी तक, लेबनान को मीडियाकर्मियों को काम करने के लिए सबसे ख़तरनाक देश बना दिया है.
वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को जारी चेतावनी में कहा है कि "लगभग किसी भी देश में" मीडिया के लिए पूरी तरह सुरक्षित वातावरण नहीं है, और जब मीडिया पर हमले होते हैं तो स्वतंत्रता अपने आप में कमज़ोर होनी शुरू हो जाती है और इसके साथ शान्ति, सुरक्षा और सतत विकास की बुनियादें भी कमज़ोर होने लगती हैं.
मानवाधिकार आयुक्त ने दुनिया भर में पत्रकारिता करते हुए मौत के मुँह में धकेल दिए जाने वाले मीडियाकर्मियों को श्रद्धाजलि अर्पित की, जिन्होंने भयावह अत्याचारों को रिकॉर्ड में दर्ज किया, भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया, और कारोबारी संचालनों पर नज़र रखी.
पत्रकारिता बना एक ख़तरनाक पेशा
वोल्कर टर्क ने कहा कि पत्रकारिता का पेशा तेज़ी से ख़तरनाक होता जा रहा है. मीडिया कर्मियों को बमबारी, अपहरण और मनमानी हिरासत का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें अपने रोज़गार से बर्ख़ास्त तक कर दिया गया है.
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा, “ग़ाज़ा में इसराइली युद्ध, मीडिया के लिए मौत का जाल बन चुका है. मेरे कार्यालय ने अक्टूबर 2023 के बाद से, लगभग 300 पत्रकारों के मारे जाने और अनेक अन्य के घायल होने की पुष्टि की है.”
महिला पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों के साथ ऑनलाइन हिंसा में दोगुना उछाल
पत्रकारिता के लिए जोखिम के संकट की गहराई, कुछ इन आँकड़ों से नज़र आती है:
- मृतक संख्या: जनवरी 2026 से अब तक कम से कम 14 पत्रकार मारे जा चुके हैं.
- जोखिम: वर्तमान में लेबनान प्रैस के लिए सबसे घातक देश है, जबकि अक्टूबर 2023 से ग़ाज़ा युद्ध में लगभग 300 मीडिया कर्मियों को मौत के मुँह में धकेला जा चुका है.
- दंडमुक्ति: पिछले दो दशकों में पत्रकारों की हत्या के केवल 10% मामलों में ही पूर्ण जवाबदेही तय हो पाई है.
- हिरासत: दुनिया भर में लगभग 330 मीडिया कर्मी और 500 नागरिक पत्रकार, इस समय जेलों में बन्द हैं.
वैश्विक दबाव और "रचनात्मक पेशे" का दमन
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने प्रैस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कहा है कि युद्ध क्षेत्रों में पत्रकारों को अक्सर जानबूझकर निशाना बनाया जाता है और हाल के समय में मारे गए पत्रकारों की संख्या में तेज़ी देखी गई है.
इसके अलावा आर्थिक दबावों और तकनीकी हेरफेर के कारण भी प्रैस स्वतंत्रता "अभूतपूर्व दबाव" का भी सामना कर रही है.
उन्होंने कहा कि वैसे तो एक कहावत है कि युद्ध में सबसे पहले सत्य की हत्या होती है, मगर उससे कहीं अधिक बार पत्रकार जन मृत्यु के शिकार होते हैं जो सत्य को रिपोर्ट करने के लिए, अपना सबकुछ दाँव पर लगाते हैं.
सत्य बोलना घातक
वोल्कर टर्क ने आगाह करते हुए कहा कि “जो लोग सत्ता के सामने सत्य बोलते हैं, उनके लिए कोई भी देश सुरक्षित नहीं है.”
उन्होंने मैक्सिको की अपनी हाल की यात्रा का ज़िक्र भी किया जहाँ, भ्रष्टाचार, पर्यावरणीय हानियाँ और संगठित अपराध की रिपोर्टिंग ने, पत्रकारों, उनके स्रोतों और परिवारों के लिए गम्भीर ख़तरे उत्पन्न किए हैं.
वोल्कर टर्क ने कहा, “मैं बेहद चिन्तित हूँ कि मीडियाकर्मी, बढ़ते पारदेशीय दमन व निगरानी के प्रथम निशाने हैं – और हाल ही ऐसा, विदेशों में ईरानी पत्रकारों के विरुद्ध देखा गया.”
-
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में जान गँवाने वाले पत्रकारों की स्मृति में एक दीवार पर कलाकृति को उकेरा गया है.
इसके अतिरिक्त, मानहानि और साइबर अपराध क़ानूनों को, शक्तिशाली लोगों की रक्षा के लिए हथियार बनाया जा रहा है, जबकि तीन-चौथाई महिला पत्रकार ऑनलाइन उत्पीड़न और यौन हिंसा की धमकियों का सामना कर रही हैं.
इस समय दुनिया भर में लगभग 330 मीडियाकर्मी और इनके क़रीब 500 नागरिक पत्रकार और मानवाधिकार पैरोकार भी हिरासत में हैं.
सुरक्षा की पुकार
इन ख़तरों के बावजूद, बहुत से पत्रकार "अस्पताल के बिस्तरों और व्हीलचेयर" से अपनी रिपोर्टिंग जारी रखे हुए हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सत्य के लिए लड़ाई छोड़ी नहीं जा सकती. संयुक्त राष्ट्र ने, देशों की सरकारों से, मीडियाकर्मियों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए ये उपाय लागू करने की अपील की है:
- दमनकारी क़ानूनों को रद्द करें और क़ानूनी ढाँचे को अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप बनाएँ.
- उत्पीड़न समाप्त करें और पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, मानवाधिकार उल्लंघन के सभी मामलों की जाँच करें.
- मीडिया कर्मियों को निगरानी और ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाएँ, साथ ही तकनीकी कम्पनियों से दुष्प्रचार के ख़िलाफ़ सार्थक क़दम उठाएँ.