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भूटान का विकास और ख़ुशहाली मॉडल, वैश्विक दक्षिण के लिए एक प्रेरणा

भूटान में संयुक्त राष्ट्र के निवासी समन्वयक, गौरव राय।
© UN News भूटान में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर, गौरव रे.

भूटान का विकास और ख़ुशहाली मॉडल, वैश्विक दक्षिण के लिए एक प्रेरणा

एसडीजी

लोगों की ख़ुशहाली की बात होती है तो भूटान का नाम सुर्ख़ियाँ बटोरता है. आख़िर क्या है भूटान का विकास और ख़ुशहाली मॉडल जिसे, कम से कम वैश्विक दक्षिण क्षेत्र के देशों के लिए तो प्रेरणा कहा जा रहा है. भूटान की सकल राष्ट्रीय ख़ुशहाली की अवधारणा वाले देश के रूप में उसकी पहचानऔर सन्तुलित व जन-केन्द्रित विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धताअन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण सबक़ पेश करती है.

भूटान में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर गौरव रे के विचार में भूटान का अनुभव दिखाता है कि विकास को केवल आर्थिक प्रगति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. इसमें लोगों की भलाई, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकजुटता भी शामिल होनी चाहिए.

गौरव रे, भूटान की विश्व-प्रसिद्ध अवधारणा, ‘सकल राष्ट्रीय ख़ुशहाली’ का ज़िक्र करते हुए कहते हैं, “भूटान ने दुनिया को यह विचार दिया कि विकास केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि यह सन्तुष्टि और ख़ुशहाली से भी जुड़ा है.”

एक अनूठा विकास मॉडल

गौरव रे ने, भारत की यात्रा के दौरान यूएन न्यूज़ के साथ एक विशेष बातचीत में कहा कि भूटान की विकास यात्रा इसलिए अनूठी है, क्योंकि वहाँ लोग विकास प्रक्रिया के केन्द्र में हैं.

उन्होंने कहा, “कई देशों में विकास की बातों और ज़मीनी वास्तविकता के बीच कभी-कभी अन्तर दिखाई देता है. लेकिन भूटान इस मामले में अलग है - उसे पता है कि वह क्या चाहता है.”

उनके अनुसार, भूटान ने किसी भी क़ीमत पर विकास का रास्ता नहीं चुना है, बल्कि सोच-समझकर आगे बढ़ने का मार्ग अपनाया है. “भूटान अपना रास्ता ख़ुद चुनता है. वह सब कुछ नहीं चाहता. जब भूटान किसी लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध होता है, तो उसे अन्त तक ले जाता है.”

उन्होंने यह भी कहा कि भूटान को केवल ‘Landlocked’ यानि भूमि से घिरे देश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, “मैं कहूँगा कि भूटान भूमि से घिरा नहीं, बल्कि ‘Landlinked’  - 'भूमि से जुड़ा' - है - और यह एक अहम अन्तर है.” 

भारत यात्रा के दौरान, यूएन महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक, नई दिल्ली स्थित यूएन हाउस में भारत में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर (बाएँ) और भूटान में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर गौरव रे (दाएँ) के साथ.
© UN India/Blassy Boben भारत यात्रा के दौरान, यूएन महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक, नई दिल्ली स्थित यूएन हाउस में भारत में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर (बाएँ) और भूटान में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर गौरव रे (दाएँ) के साथ.

विकास यात्रा

उन्होंने पिछले पाँच से छह दशकों में भूटान की प्रगति पर बात करते हुए कहा कि देश का बदलाव “उल्लेखनीय” रहा है.

उन्होंने कहा, “अगर आप 50 साल पहले के भूटान को देखें, तो वहाँ मुश्किल से ही सड़कें थीं. लोगों को देश में आने के लिए अलग-अलग रास्ते तलाश करने पड़ते थे. भूटान एक बन्द देश था.”

उन्होंने कहा कि अल्प विकसित देश की श्रेणी से बाहर आने की भूटान की यात्रा में भारत और संयुक्त राष्ट्र सहित मज़बूत साझेदारियों की अहम भूमिका रही है.

“भारत भी एक अहम साझीदार रहा है. उसने भूटान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आज भी देता आ रहा है.”

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में सड़कों, हवाई अड्डे और विमानन क्षेत्र में सहयोग से लेकर कृषि, शिक्षा तथा सुशासन तक, यूएन का योगदान रहा है.

“आज भूटान जो है, उसे बनाने में संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रमुख भूमिका निभाई है.”

भूटान के थिम्फू का एक शहरी परिदृश्य, जो पृष्ठभूमि में पहाड़ों और बादलों के साथ एक घाटी में स्थित है।
© SGP भूटान की राजधानी, थिम्पू.

सकल राष्ट्रीय ख़ुशहाली और सतत विकास लक्ष्य

गौरव रे ने कहा कि भूटान की विकास सोच, सतत विकास लक्ष्यों से गहराई से जुड़ी है. “भूटान में सकल राष्ट्रीय ख़ुशहाली और सतत विकास लक्ष्य, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.”

उनके अनुसार, भूटान में सतत विकास लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर लागू करना कठिन नहीं रहा, क्योंकि देश की अपनी विकास सोच में पहले से ही ऐसी प्राथमिकताएँ शामिल हैं.

“जब आप ग़रीबी कम करने, भुखमरी समाप्त करने, समानता और अन्य विकास लक्ष्यों की बात करते हैं, तो ये सभी सकल राष्ट्रीय ख़ुशहाली से जुड़े हुए हैं.”

गोरव रे के साथ पूरी बातचीत यहाँ सुनी जा सकती है...

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'Carbon Negative', फिर भी जलवायु जोखिमों से प्रभावित

गौरव रे ने कहा कि भूटान 'Carbon - Negative' यानि कार्बन - तटस्थ देश है और वहाँ व्यापक वन क्षेत्र है, फिर भी वह गम्भीर जलवायु जोखिमों का सामना कर रहा है. 

कार्बन - तटस्थ का मतलब है कि भूटान में जितनी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है उस मात्रा को प्राकृतिक संसाधनों के ज़रिए सोख़ भी लिया जाता है.

उन्होंने कहा, “भूटान जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रहा है, जबकि उसका इसमें बहुत कम योगदान है.”

उन्होंने बताया कि हिमालयी देश भूटान के सामने हिमनदी झीलों के फटने से आने वाली बाढ़, अनियमित वर्षा, बाढ़ और बढ़ते तापमान जैसे ख़तरे हैं. इनका असर कृषि, मत्स्य पालन और वनों जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है.

भूटान के संविधान के अनुसार, देश की कम से कम 60 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र के तहत रहनी चाहिए. गौरव रे ने कहा कि इस समय भूटान में वन क्षेत्र लगभग 70 प्रतिशत है, यानि देश इस संवैधानिक आवश्यकता से भी आगे है.

इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि आपदा तैयारी, आरम्भिक चेतावनी प्रणालियों और समुदाय-स्तर की कार्रवाई को अधिक मज़बूत करने की ज़रूरत है.

“समुदायों की तैयारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.”

ऊर्जा व होर्मुज़ संकट

गौरव रे ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास हाल की तनावपूर्ण स्थिति दिखाती है कि वैश्विक संकट, संकट क्षेत्र से दूर स्थित देशों को भी प्रभावित कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि भूटान पर तीन मुख्य दबाव दिखाई दे रहे हैं: महंगाई, ईंधन अनुदान से जुड़ा वित्तीय बोझ, और पर्यटन पर असर.

“वस्तुओं की क़ीमतें बढ़ी हैं, और अगर यह स्थिति जारी रही, तो इसका असर पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि भूटान की जलविद्युत क्षमता ने ईंधन संकट के असर को कुछ हद तक कम किया है. लेकिन परिवहन क्षेत्र अब भी संवेदनशील है, क्योंकि भूटान आयातित डीज़ल और पैट्रोल पर निर्भर है, विशेष रूप से भारत के ज़रिये.

काले रंग की फर और चेहरे पर सफेद पट्टी वाला एक याक घास से ढके पहाड़ी ढलान पर पृष्ठभूमि में कोहरा छाया हुआ है।
© UNDP Bhutan भूटान की सहनसक्षमता व सौन्दर्य का प्रतीक, एक याक.

जलवायु सहनसक्षमता के लिए वित्तीय संसाधन

गौरव रे ने कहा कि जलवायु और आपदा जोखिमों को कम करने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना, भूटान के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक है.

उन्होंने कहा, “भारत की मेरी इस यात्रा का एक उद्देश्य विकास के लिए नए वित्तीय स्रोतों पर ध्यान देना भी है - यह देखना कि भूटान किस तरह ऋण, अनुदान या रियायती ऋण हासिल कर सकता है, ताकि जलवायु और आपदा जोखिमों को कम किया जा सके.”

उन्होंने कहा कि भूटान के पास मज़बूत नीतिगत ढाँचे हैं, जिनमें आपदा प्रबन्धन अधिनियम भी शामिल है. लेकिन असली चुनौती इन नीतियों को काग़ज़ से ज़मीन पर उतारने और यह सुनिश्चित करने की है कि सहयोग लोगों तक पहुँचे.

वैश्विक दक्षिण के लिए सबक़

गौरव रे ने कहा कि नेतृत्व, पर्यावरण संरक्षण और सन्तुलित विकास, भूटान के अनुभव के मुख्य पहलू हैं, जिनसे बाक़ी देश अहम सबक ले सकते हैं. 

उन्होंने सरकार, राजशाही और भूटान के 20 ज़िलों की भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहा, “पूरा देश एक दिशा में आगे बढ़ता है. यहाँ नेतृत्व बहुत मायने रखता है.”

उन्होंने कहा कि भूटान का दृष्टिकोण दिखाता है कि देश पर्यावरण की रक्षा करते हुए भी अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा सकते हैं.

“भूटान स्वयं को हरा-भरा रखना चाहता है. वह पर्यटन को भी सन्तुलित तरीक़े से आगे बढ़ाता है, ताकि बिना सोचे-समझे पूरी दुनिया के लिए दरवाज़े नहीं खोल दिए जाएँ.”

गौरव रे ने ‘गेलेफू माइंडफ़ुलनेस सिटी’ का भी उल्लेख किया, जो महामहिम सम्राट की एक परियोजना है. उन्होंने इसे भूटान के भविष्य के विकास दृष्टिकोण का एक उभरता हुआ उदाहरण बताया - दक्षिण एशिया के लिए एक सुदृढ़ केन्द्र, जो व्यापार, ज्ञान, आध्यात्मिकता और माइंडफ़ुलनेस को साथ लेकर आगे बढ़ेगा.

उन्होंने कहा, “भूटान आध्यात्मिकता, आत्म-चिन्तन और दूसरों के लिए अच्छा करने की भावना के ज़रिये दुनिया में योगदान दे सकता है.”

“हर भूटानी व्यक्ति के रक्त में करुणा बसती है, और यही वह भाव है जिसे आज की दुनिया में अधिक से अधिक फैलाने की ज़रूरत है.”