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म्याँमार में हिंसा और दमन का चक्र जारी, मगर जबावदेही अब भी दूर

एक माँ और उसके तीन छोटे बच्चे एक साथ बैठे हैं और कैमरे की ओर देख रहे हैं।
© UNOCHA/Siegfried Modola म्याँमार के अशान्त पूर्वी क्षेत्र से जान बचाकर भागने के बाद एक परिवार सुरक्षा की तलाश में है.

म्याँमार में हिंसा और दमन का चक्र जारी, मगर जबावदेही अब भी दूर

शान्ति और सुरक्षा

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर स्वतंत्र विशेषज्ञ टॉम ऐंड्रयूज़ ने, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से म्याँमार में जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों को तेज़ करने की अपील की है और कहा है कि दशकों से जारी दंडमुक्ति (impunity) ने देश को मानवाधिकार संकट की भयावह स्थिति में धकेल दिया है.

ग़ौरतलब है कि 1 फ़रवरी 2021 को, म्याँमार की सेना ने, लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई तत्कालीन सरकार को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था और राष्ट्रपति, स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची समेत सैकड़ों अधिकारियों, राजनैतिक नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था. 

तभी से देश मानवीय व मानवाधिकारों के संकट से जूझ रहा है, जोकि समय बीतने के साथ और अधिक गहरा हुआ है. 

विशेष रैपोर्टेयर टॉम ऐंड्रयूज़ ने, “न्याय से दंडमुक्ति तक” नामक अपनी अन्तिम रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि संकट को समाप्त करने के लिए केवल सैन्य तंत्र की उस क्षमता को ख़त्म करना पर्याप्त नहीं है, जिससे वह लोगों पर हमले और दमन करता है, बल्कि मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघनों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना भी आवश्यक है.

उन्होंने कहा कि न्याय और जवाबदेही की मांग करने वालों का समर्थन करने के लिए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने अब तक बहुत कम प्रयास किए हैं.

गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघन

स्वतंत्र विशेषज्ञ टॉम ऐंड्रयूज़ ने बताया कि लोग इस बात से निराश और क्रुद्ध हैं कि देश में दशकों से जारी हिंसा और दमन का चक्र अब भी बिना रुके जारी है, जबकि किसी भी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को अब तक जवाबदेह नहीं ठहराया गया है.

उन्होंने कहा कि दशकों से म्याँमार के सैन्य बल ने नागरिक आबादी पर हमले किए हैं, जातीय अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया है और बड़े पैमाने पर यौन हिंसा समेत गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघन किए हैं.

टॉम ऐंड्रयूज़ ने कहा कि “म्याँमार के नागरिक समाज और अन्तरराष्ट्रीय जाँचकर्ताओं ने, सेना के अत्याचारों के पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनमें से कई अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपराध की श्रेणी में आते हैं. फिर भी जवाबदेही अब भी दूर है.” 

“म्याँमार के लोगों के लिए, न्याय में देरी का अर्थ है - न्याय से इनकार…”

म्यांमार के रखाइन राज्य में एक शरणार्थी शिविर में एक बच्चा कच्ची सड़क पर चल रहा है।
© UNICEF/Brown म्याँमार में टकराव जारी रहने के कारण, देश के भीतर ही विस्थापित हुए लोगों की संख्या, 20 लाख से अधिक हो गई है (फ़ाइल चित्र).

अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की अनदेखी

विशेष रैपोर्टेयर ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय न्यायाधिकरणों और अन्य देशों की न्यायिक संस्थाओं में चल रहे कुछ मामले, पीड़ितों और म्याँमार के लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण ज़रूर हैं, लेकिन उनका दायरा सीमित है.

साथ ही, वे उस दंडमुक्ति की प्रणाली को तोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जो सेना को जवाबदेही से बचाती है.

उन्होंने कहा कि, “हालाँकि कुछ महत्वपूर्ण क़दम उठाए गए हैं, लेकिन अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने अक्सर म्याँँमार के लोगों से मुँह फेर लिया है.” 

“सुरक्षा परिषद द्वारा म्याँमार की स्थिति को, अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के ध्यान में लाने में विफलता, ज़िम्मेदारी से पलायन है और न्याय के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता पर एक प्रश्नचिह्न है.”

कुछ प्रयास जारी...

टॉम ऐंड्रयूज़ की रिपोर्ट में उन प्रयासों का विस्तार से ज़िक्र किया गया है, जो कार्यकर्ताओं, वकीलों, मानवाधिकार रक्षकों और विभिन्न क्रान्तिकारी निकायों द्वारा किए जा रहे हैं.

ये समूह ऐसे संस्थान और प्रक्रियाएँ विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनके ज़रिए दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके और पीड़ितों को वर्तमान व भविष्य दोनों में न्याय और राहत प्रदान की जा सके.

विशेष रैपोर्टेयर ने कहा कि “म्याँमार में जवाबदेही के लिए संघर्ष कर रहे लोग, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के पूर्ण समर्थन के हक़दार हैं.”

उन्होंने कहा कि दशकों तक सैन्य प्रभुत्व के कारण कमज़ोर हो चुकी न्यायिक और संस्थागत व्यवस्था में सुधार का यह लम्बा और कठिन कार्य है, जिसके लिए तकनीकी सहायता और वर्षों तक पर्याप्त संसाधनों के निवेश की आवश्यकता होगी.

म्यांमार में एक युवा कचीन शरणार्थी लड़की म्यितकिना के पास पा ला ना विस्थापित शिविर में एक अस्थायी रसोई में बैठी है।
© UNICEF/Minzayar Oo उत्तरी म्याँमार में एक लड़की अपने घर का काम कर रही है.

सुझाव...

टॉम ऐंड्रयूज़ ने, म्याँमार में गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने में, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अन्य अवसरों का भी उल्लेख किया. 

इनमें ICC के अभियोजक द्वारा जाँच का दायरा बढ़ाना, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की तैयारी करना, सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र के प्रयोग का विस्तार करना और मानवाधिकार उल्लंघनों के पीड़ितों के लिए एक मुआवज़ा कोष स्थापित करना शामिल है.

उन्होंने देशों की सरकारों से यह आग्रह किया कि वे रोहिंग्या समुदाय के विरुद्ध जनसंहार से जुड़े मामले में अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के सम्भावित निर्णय के लिए पहले से तैयारी करें.

स्वतंत्र विशेषज्ञ

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर नियुक्त विशेष रैपोर्टेयर को, यूएन मानवाधिकार परिषद से शासनादेश प्राप्त है. उनका दायित्व देश में दुर्व्यवहार, मानवाधिकार उल्लंघन मामलों की पड़ताल और जवाबदेही तय करना है.

विशेष रैपोर्टेयर एक स्वतंत्र विशेषज्ञ हैं. वे यूएन के कर्मचारी नहीं होते हैं, उन्हें अपने काम के लिए, संयुक्त राष्ट्र से वेतन नहीं मिलता है और वे किसी सरकार या संगठन से स्वतंत्र होकर काम करते हैं.