2024: हेपेटाइटिस 'बी' व 'सी' से 13 लाख मौतें, उन्मूलन के लिए ठोस उपायों का आग्रह
हर वर्ष, वायरल हेपेटाइटिस के 18 लाख से अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, यानि प्रति दिन 4,900 संक्रमण. इस बीमारी के विरुद्ध लड़ाई, संक्रमण मामलों और मौतों में कमी लाने के प्रयासों में प्रगति तो हुई है, लेकिन यह अब भी एक विशाल स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लिए ठोस क़दम उठाए जाने पर बल दिया है.
हेपेटाइटिस, संक्रामक विषाणुओं और अन्य ग़ैर-संक्रामक वाहकों के कारण यकृत (liver) में सूजन आने की अवस्था है, जो कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देती है. जैसेकि लीवर को गहरा नुक़सान पहुँचना या फिर कैंसर.
हेपेटाइटिटस वायरस के 5 मुख्य प्रकार होते हैं, जिन्हें ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’ और ‘ई’ कहा जाता है. ये सभी वायरस लीवर से जुड़ी बीमारी की वजह हैं, लेकिन संक्रमण फैलने के तरीक़ों, बीमारी की गम्भीरता, भौगोलिक क्षेत्रों में उपस्थिति और रोकथाम उपायों में अलग-अलग हैं.
मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ के विरुद्ध लड़ाई में ठोस प्रगति हासिल की गई है, जोकि विश्व भर में हेपेटाइटिस के कारण होने वाली कुल मौतों के 95 फ़ीसदी के लिए ज़िम्मेदार है.
वर्ष 2024 में इन संक्रमणों के कारण 13 लाख से अधिक लोगों की जान गई थी. संक्रमण मामले अब भी जारी हैं और हर वर्ष 18 लाख से अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, यानि प्रति दिन 4,900 संक्रमण.
अध्ययन दर्शाता है कि वर्ष 2024 में, 28.7 करोड़ लोग यानि वैश्विक आबादी का 3 प्रतिशत, लम्बे समय से हेपेटाइटिस ‘बी’ या ‘सी’ संक्रमण की अवस्था में जीवन गुज़ार रहा था.
इसी वर्ष, हेपेटाइटिस ‘बी’ के कारण कुल मौतों में से लगभग 70 प्रतिशत मामले केवल 10 देशों – बांग्लादेश, चीन, इथियोपिया, घाना, भारत, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, फ़िलिपींस, दक्षिण अफ़्रीका, वियतनाम – में दर्ज किए गए.
वहीं, हेपेटाइटिस ‘सी’ सम्बन्धी कुल मौतों में 58 प्रतिशत मामले निम्न 10 देशों में दर्ज किए गए: चीन, भारत, इंडोनेशिया, जापान, नाइजीरिया, पाकिस्तान, रूसी महासंघ, दक्षिण अफ़्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका, वियतनाम.
विषाणुजनित संक्रमण
हेपेटाइटिस ‘बी’ एक वायरल संक्रमण है, जोकि लीवर को निशाना बनाता है. शरीर से निकलने वाले संक्रमित द्रव्य, जैसेकि रक्त, थूक, वीर्य के सम्पर्क में आने या फिर माँ से बच्चे को हो सकता है.
लम्बे समय तक इस संक्रमण की चपेट में रहना, लीवर ख़राब होने या कैंसर होने की वजह बन सकता है, जिससे मौत भी हो सकती है.
वहीं, हेपेटाइटिस ‘सी’, इसी वायरस की वजह से लीवर में होने वाली सूजन है. यह असुरक्षित इंजेक्शन, सुइयों के इस्तेमाल से संक्रमित रक्त के सम्पर्क में आने, या फिर बिना पर्याप्त जाँच के रक्त को चढ़ाए जाने के कारण होता है.
दशकों की प्रगति
वर्ष 2026 की ‘वैश्विक हेपेटाइटिस रिपोर्ट’ में 2015 के बाद से अब तक हुई प्रगति का लेखाजोखा प्रस्तुत किया गया है.
हेपेटाइटिस ‘बी’ के नए संक्रमण मामलों में 32 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि हेपेटाइटिस ‘सी’ सम्बन्धी मौतों में 12 फ़ीसदी की कमी आई है.
5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में, हेपेटाइटिस ‘बी’ के मामलों में 0.6 फ़ीसदी की कमी आई है. 85 देशों ने 2030 तक इसमें 0.1 प्रतिशत की गिरावट लाने के लक्ष्य को हासिल कर लिया है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 2016 में विश्व स्वास्थ्य सभा में हेपेटाइटिस उन्मूलन के लिए जिन लक्ष्यों को स्थापित किया गया था, यह प्रगति उस दिशा में हुई कार्रवाई की सफलता को दर्शाती है.
इसके बावजूद, प्रगति की वर्तमान गति, 2030 तक उन्मूलन के सभी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
ठोस क़दमों का आग्रह
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि देशों ने दर्शाया है कि हेपेटाइटिस का उन्मूलन करना, कोई कोरी कल्पना नहीं है, लेकिन इन प्रयासों में तेज़ी लानी होगी.
उन्होंने बताया कि अनेक लोगों को निदान नहीं हो पाता है और कथित कलंक की आशंका, कमज़ोर स्वास्थ्य प्रणालियों और स्वास्थ्य देखभाल तक असमान पहुँच की वजह से बड़ी संख्या में लोगों को समय पर उपचार नहीं मिलता है.
रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि वर्ष 2024 में, 24 करोड़ लोग लम्बे समय से हेपेटाइटिस ‘बी’ के साथ जीवन गुज़ार रहे थे, लेकिन 5 प्रतिशत से भी कम को ही उपचार मिल पा रहा है.
वर्ष 2015 में कारगर इलाज उपलब्ध होने के बावजूद, हेपेटाइटिस ‘सी’ से संक्रमित केवल 20 प्रतिशत लोगों को ही उपचार मिल पाया है. रोकथाम उपायों और स्वास्थ्य देखभाल उपायों तक सीमित पहुँच होने की वजह से स्थिति बिगड़ने और मौत होने की आशंका बढ़ जाती है.
वर्ष 2024 में, हेपेटाइटिस ‘बी’ के कारण 11 लाख और ‘सी’ की वजह से 2.4 लाख लोगों की जान गई, जिसके लिए मुख्य रूप से लीवर ख़राब होना या कैंसर की बीमारी ज़िम्मेदार हैं.
कारगर उपाय मौजूद
WHO का कहना है कि इन स्वास्थ्य चुनौतियों के विरुद्ध लड़ाई में कारगर उपाय उपलब्ध हैं. हेपेटाइटिस ‘बी’ की वैक्सीन, कुछ समय पहले या फिर लम्बे समय से जारी संक्रमण के विरुद्ध 95 प्रतिशत तक असरदार है.
वहीं, लम्बे समय तक एंटीवायरल उपचार के ज़रिए भी इन संक्रमणों के प्रबन्धन में मदद मिल सकती है और लीवर से जुड़ी गम्भीर बीमारियों को टाला जा सकता है.
हेपेटाइटिस ‘सी’ के उपचार में 8-12 सप्ताह की थेरेपी के ज़रिए 95 प्रतिशत तक मामलों में उपचार हो सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि वायरल हेपेटाइटिस के विरुद्ध लड़ाई में यह ज़रूरी है कि अधिक संख्या में लोगों कारगर उपचार के दायरे में लाया जाए.
इसके अलावा, जन्म के समय हेपेटाइटिस ‘बी’ के रोकथाम टीके की ख़ुराक, माँ से बच्चे में संक्रमण को टालने के लिए दवा जैसे उपायों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाई जानी होगी और इसके लिए मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता होगी.