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ऊर्जा बाज़ारों में उथल-पुथल के बीच, हरित ऊर्जा में निवेश से बनेगी बात?

वियतनाम के क्वांग त्री प्रांत में हरे पहाड़ों पर स्थापित पवन टरबाइनों का हवाई दृश्य।
© ADB/Viet Tuan वियतनाम में पवन चक्की से ऊर्जा उत्पादन का एक चित्र.

ऊर्जा बाज़ारों में उथल-पुथल के बीच, हरित ऊर्जा में निवेश से बनेगी बात?

जलवायु और पर्यावरण

मध्य पूर्व में युद्ध और अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जबकि तेल की क़ीमतें भी ऊँची बनी हुई हैं. ऐसे में, अधिकतर देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को कोयला, तेल व गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता से होने वाले झटकों से बचाने, आयात पर किए जाने धन ख़र्च को नियंत्रित करने और जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नवीकरणीय यानि हरित ऊर्जा में निवेश बढ़ा रहे हैं.

जहाँ तेल और गैस, देशों को क़ीमतों में उछाल और भू-राजनैतिक जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं, वहीं नवीकरणीय यानि ऊर्जा स्थिर और घरेलू स्तर पर उत्पादित बिजली प्रदान करती है. 

इससे ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत होती है, हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है और दीर्घकालिक विकास को समर्थन मिलता है.

ऊर्जा सुरक्षा के भविष्य को आकार देने में नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका पर, इन चार देशों पर एक विशेष नज़र, जो हरित ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के अनुसार, “ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे तेज़ रास्ता स्पष्ट है - जीवाश्म ईंधनों से दूरी और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर न्यायसंगत संक्रमण में तेज़ी.”

भारत: विकास के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार

भारत एक तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है.

बिजली उत्पादन के लिए देश अब भी कोयले पर काफ़ी हद तक निर्भर बना हुआ है, हालाँकि सौर और पवन ऊर्जा का तेज़ी से विस्तार हो रहा है.

नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से, महँगे ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और गतिशील अर्थव्यवस्था में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाने में मदद मिल रही है.

भारत के छत्तीसगढ़ में एक सौर संयंत्र में निर्माण श्रमिकों ने सौर पैनल स्थापित किए।
© World Bank भारत के छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा पैनल स्थापित करते हुए कामगार. नई तकनीक वाले सोलर पैनल, ना सिर्फ़ ऊपर से बल्कि नीचे से भी बिजली उत्पादन करते हैं, जिससे कम भूमि क्षेत्र में अधिक बिजली का उत्पादन सम्भव हो रहा है.

ऊर्जा मिश्रण:

  • नवीकरणीय ऊर्जा, कुल स्थापित क्षमता (अधिकतम सम्भावित उत्पादन) का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है.
  • सौर ऊर्जा का तेज़ी से विस्तार हो रहा है.
  • कोयला अब भी प्रमुख ऊर्जा स्रोत बना हुआ है.

मुख्य चुनौतियाँ:

तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ऊर्जा की मांग भी तेज़ी से बढ़ रही है. 

ऐसे में, कोयले पर निर्भरता कम करते हुए इस मांग को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है, ख़ासकर नवीकरणीय ऊर्जा की लागत और पूरे देश में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की ज़रूरत के मद्देनज़र.

पूर्ण ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में प्रगति:

  • बड़े सौर पार्क और रूफ़टॉप यानि छतों पर सौर परियोजनाओं का विस्तार.
  • पवन ऊर्जा और हाइब्रिड सिस्टम का विकास.
  • हरित हाइड्रोजन पहलें.

सौर ऊर्जा आधारित आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों में आय और ऊर्जा पहुँच में सुधार. अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें...

जर्मनी: ऊर्जा परिवर्तन में तेज़ी

जर्मनी, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. देश की पर्यावरण एजेंसी के अनुसार, देश में नवीकरणीय ऊर्जा का लगातार विस्तार हुआ है. 

यह योरोपीय देश लम्बे समय से जीवाश्म ईंधनों से दूर जाने की दिशा में काम कर रहा है.

नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से आयात किए जाने वाले ईंधनों पर निर्भरता कम हो रही है, उपभोक्ताओं को वैश्विक क़ीमतों के झटकों से सुरक्षा मिल रही है. साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद मिल रही है.

जर्मनी के मोल्सहाइम में हरे-भरे, लहरदार भूभाग में स्थित पवन टरबाइन फार्म।
Unsplash/Karsten Würth जर्मनी के मोएलशाइम में एक पवनचक्की फ़ार्म.

ऊर्जा मिश्रण:

  • नवीकरणीय ऊर्जा से लगभग 55 प्रतिशत बिजली की खपत पूरी हो रही है.
  • पवन ऊर्जा प्रमुख स्रोत है, जबकि सौर ऊर्जा का योगदान अपेक्षाकृत कम है.
  • बायोमास (जैविक पदार्थ से उत्पन्न ऊर्जा) और जलविद्युत (hydropower) भी इस मिश्रण का हिस्सा हैं.
  • उद्योग और परिवहन क्षेत्रों में अब भी जीवाश्म ईंधनों का प्रयोग जारी है. 

मुख्य चुनौतियाँ:

पवन, ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन इसके साथ उत्पादन में अस्थिरता की समस्या भी जुड़ी रहती है. 

औद्योगिक मांग को पूरा करना और ग्रिड की स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है. वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण के दौरान बैकअप के रूप में जीवाश्म ईंधनों की आवश्यकता भी बनी हुई है.

पूर्ण ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में प्रगति:

  • अपतटीय पवन (offshore wind) और सौर ऊर्जा का विस्तार किया जा रहा है.
  • ग्रिड का आधुनिकीकरण और विस्तार, साथ ही ऊर्जा भंडारण सुविधाओं में निवेश को इस प्रक्रिया के लिए “अत्यन्त महत्वपूर्ण” माना गया है.

बोलीविया: गैस से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव

बोलीविया, अपनी ऊर्जा व्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाने वाली प्राकृतिक गैस पर निर्भरता को कम करके ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रहा है.

जलविद्युत (Hydropower) देश की दीर्घकालिक ऊर्जा स्थिरता और आर्थिक लचीलापन सुनिश्चित करने में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है.

पारंपरिक रंगीन कपड़ों और टोपी पहने एक बोलिवियाई महिला ईंट की दीवार पर लगे एक खुले सौर ऊर्जा नियंत्रण पैनल के बगल में खड़ी है, जो ग्रामीण समुदायों पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव को दर्शाती है।
© प्रैक्टिकल एक्शन बोलिविया वेरोनिका विला बोलिविया के ग्रामीण समुदायों में उन अनेक महिलाओं में से एक हैं जिन्होंने अपने समुदाय को जल प्रदान करने के लिए सौर ऊर्जा प्रणालियों का संचालन और रखरखाव करना सीखा है.

ऊर्जा मिश्रण:

  • नवीकरणीय ऊर्जा, कुल बिजली उत्पादन का लगभग 30 - 35 प्रतिशत प्रदान करती है.
  • जलविद्युत प्रमुख नवीकरणीय स्रोत है.
  • सौर और पवन ऊर्जा का तेज़ी से विस्तार हो रहा है.
  • प्राकृतिक गैस अब भी प्रमुख ऊर्जा स्रोत बनी हुई है.

मुख्य चुनौतियाँ:

बोलीविया, अब भी गैस राजस्व और उसके निष्कर्षण (extract), प्रसंस्करण (process) और आपूर्ति से जुड़ी मौजूदा संरचना पर काफ़ी हद तक निर्भर है. 

यह संरचनात्मक निर्भरता और बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता एक तेज़ ऊर्जा परिवर्तन को कठिन बनाती है.

पूर्ण ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में प्रगति:

  • ग्रामीण और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का विस्तार.
  • पवन ऊर्जा परियोजनाओं का विकास.
  • राष्ट्रीय स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े विस्तार के लिए दिशा तैयार किया गया है.
  • सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई परियोजनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर रही हैं.

नाइजीरिया: सौर ऊर्जा क्षमता का उपयोग

नाइजीरिया, अफ़्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे अधिक आबादी वाला देश है.

संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, देश की 24.1 करोड़ से अधिक आबादी में से 60 प्रतिशत से अधिक लोग, निर्धनता में जीवन यापन कर रहे हैं.

देश में, विकास सम्बन्धी चुनौतियों के बावजूद, नवीकरणीय ऊर्जा की अपार सम्भावनाएँ मौजूद हैं, हालाँकि यह अब भी जीवाश्म ईंधनों पर काफ़ी निर्भर है.

वहीं, बार-बार होने वाली बिजली कटौती और डीज़ल जैनरेटर पर निर्भरता एक अधिक मज़बूत और नवीकरणीय-आधारित ऊर्जा प्रणाली की आवश्यकता की ओर इशारा करती है.

एक मुस्कुराती नाइजीरियाई महिला, जिसने सिर पर दुपट्टा बांधा है, एक घास की झोपड़ी के सामने पीली सौर लैंप पकड़े हुए है।
IOM/Jorge Galindo सौर ऊर्जा से चलने वाले एक सोलर लैम्प के साथ एक महिला.

ऊर्जा मिश्रण:

  • नवीकरणीय ऊर्जा कुल बिजली उत्पादन का लगभग 20 - 25 प्रतिशत हिस्सा है.
  • जलविद्युत, नवीकरणीय ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है.
  • सौर ऊर्जा बढ़ रही है, लेकिन अब भी अपेक्षाकृत कम विकसित है.
  • गैस, बिजली उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाती है.

मुख्य चुनौतियाँ:

इ पश्चिमी अफ़्रीकी देश का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अपनी बिजली का 50 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करना है.

इसके लिए मज़बूत आधारभूत ढाँचा, विशेषकर अधिक विश्वसनीय ग्रिड का विकास, अधिक निवेश और उद्योगों को गैस-आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता से धीरे-धीरे मुक्त करना आवश्यक होगा.

पूर्ण ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में प्रगति:

  • ऑफ़-ग्रिड सौर ऊर्जा और मिनी-ग्रिड्स का विस्तार.
  • राष्ट्रीय विद्युतीकरण कार्यक्रम.
  • घरेलू सौर प्रणालियों में बढ़ता निवेश.
  • यूएन समर्थित सौर मिनी-ग्रिड परियोजनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुँचाकर व्यवसायों को समर्थन दे रही हैं और जीवन स्तर में सुधार कर रही हैं.

जर्मनी जैसे औद्योगिक देशों से लेकर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं और बोलीविया व नाइजीरिया जैसे विकासशील देशों तक एक स्पष्ट प्रवृत्ति उभर रही है:

  • नवीकरणीय ऊर्जा ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत कर रही है.
  • यह अस्थिर जीवाश्म ईंधन बाज़ारों पर निर्भरता कम कर रही है.
  • और लोगों व अर्थव्यवस्थाओं को ठोस लाभ प्रदान कर रही है.