संकरे मार्ग व टकराव: होर्मुज़ संकट ने समुद्री मार्गों की कमज़ोर परतों को किया उजागर
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पहले हिंसक टकराव और उसके बाद जारी तनातनी की वजह से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबन्दी की गई है, वहाँ से जहाज़ों की आवाजाही ठप है, जिससे विश्व के अनेक हिस्सों में तेल, गैस, उर्वरक समेत अन्य सामान की क़िल्लत महसूस की जा रही है. अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रमुख ने आगाह किया है कि मौजूदा हालात दर्शाते हैं कि जहाज़ और समुद्री नाविकों को भूराजनैतिक विवादों में किस तरह से दबाव डालने के औज़ार के रूप में इस्तेमाल में लाया जा रहा है.
इसराइल और अमेरिका द्वारा 28 फ़रवरी को ईरान पर हवाई बमबारी शुरू किए जाने के बाद मध्य पूर्व में हिंसक टकराव भड़क उठा था. तभी से, फ़ारस की खाड़ी में लगभग 2 हज़ार जहाज़ों में 20 हज़ार नाविक फँसे हुए हैं और संकरे समुद्री जलमार्ग से होकर गुज़रने में असमर्थ हैं.
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव, आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़ ने सोमवार को समुद्री मार्ग की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले यूएन न्यूज़ से बात की.
यूएन न्यूज़: समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा से क्या तात्पर्य है?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा के तहत, जहाज़ों, बन्दरगाहों, समुद्री नाविकों और समुद्री क्षेत्र में बुनियादी प्रतिष्ठानों का किसी भी प्रकार के ख़तरों से बचाव किया जाता है, जैसेकि तस्करी, आतंकवाद और साइबर हमले.
जिन देशों में तट रेखा है, उन्हें इसके अतिरिक्त अन्य बातों का भी ध्यान रखना होता है. उदाहरणस्वरूप, समुद्र, जहाज़, बन्दरगाह और तट के ज़रिए होने वाली विविध प्रकार की अवैध गतिविधियाँ. इनमें हथियारों व मादक पदार्थों की तस्करी, वन्यजीवों का ग़ैरक़ानूनी व्यापार, कच्चे तेल की लूट, तस्करी, मानव तस्करी, और ज़हरीले कचरे को फेंका जाना है.
यूएन न्यूज़: समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: यह इसलिए अहम है चूँकि यह वैश्विक व्यापार की रक्षा करती है, समुद्री नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है और सामानों की सप्लाई चेन को सक्रिय रखती है.
समुद्री सुरक्षा के अभाव में, विकास प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाएगी और समुद्री क्षेत्र के विकास के बिना, सतत विकास को हासिल कर पाना असम्भव होगा.
यूएन न्यूज़: होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वर्तमान संकट, हमें हिंसक टकरावों के दौरान समुद्री जहाज़ों व नाविकों को पेश आने वाले ख़तरों के बारे में क्या बताता है?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: यह दर्शाता है कि समुद्री जहाज़ व चालक दल के सदस्य, हिंसक टकराव से प्रभावित इलाक़ों की बुरी तरह चपेट में हैं और अक्सर भूराजनैतिक विवादों में दबाव डालने का औज़ार बन जाते हैं.
कमर्शियल सामान से लदे जहाज़ों को निशाना बनाया जाना, उन्हें रोक कर रखना, उन पर हमला करना न्यायसंगत नहीं है, और यह दिखाता है कि नौवहन की स्वतंत्रता कितनी नाज़ुक हो सकती है.
यूएन न्यूज़: भूराजनैतिक टकरावों में फँसे नाविकों की वास्तविक मायनों में किन तंत्रों के ज़रिए सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: सूचनाओं को साझा किया जाना अहम है. जोखिम-आधारित समुद्री परिवहन की योजना में भ्रामक जानकारी या जानबूझकर ग़लत सूचना को फैलाए जाने से स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
जहाज़ों के संचालकों व कम्पनियों को हिंसक टकराव से होकर गुज़रने वाली किसी भी यात्रा से पहले, जोखिमों का आकलन करना चाहिए.
कूटनीति व टकराव में कमी लाना अति-आवश्यक है, मगर, जहाज़ों के साथ सुरक्षा दल को साथ लेकर चलना सीमित उपाय ही है. यह कभी टिकाऊ समाधान साबित नहीं हो सकता है.
यूएन न्यूज़: समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े ख़तरों में, पिछले कुछ वर्षों में किस तरह से बदलाव आया है?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: ऐतिहासिक दृष्टि से, अक्टूबर 9185 में इटली के क्रूज़ जहाज़ का अपहरण किया जाना एक बड़ा आतंकी कृत्य था.
11 सितम्बर 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका में घटनाक्रम के बाद, जहाज़ों की सुरक्षा पर सवाल उठे, विशेष रूप से आतंकी गतिविधियों को उनके इस्तेमाल की आशंकाओं के सिलसिले में.
समुद्री दस्युओं द्वारा जहाज़ों की लूटपाट की घटनाओं पर, 1980 के दशक के उत्तरार्ध में पहली बार IMO में चर्चा हुई थी, जब एशियाई क्षेत्र में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने लगी थी.
फिर 2010 के दशक के शुरुआती वर्षों में, सोमालिया के नज़दीकी समुद्री क्षेत्रों से लूटपाट की घटनाएँ हुईं, और फिर अदन की खाड़ी, पश्चिमी हिन्द महासागर, और पश्चिम अफ़्रीका में गिनी की खाड़ी में एक बार फिर सशस्त्र लूटपाट और डकैती पर ध्यान केन्द्रित हो गया.
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग, क्षमता निर्माण और सूचना का आदान-प्रदान, पहले के किसी समय की तुलना में कहीं अधिक अहम हो गया है.
यूएन न्यूज़: किस तरह की नई चुनौतियाँ उभर रही हैं और जहाज़रानी उद्योग को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: कई तरह की नई चुनौतियाँ उभरी हैं, जिनमें नौवहन व्यवस्था, मालवाहक प्रणाली, बन्दरगाह में कामकाज पर साइबर हमले हैं. या फिर समुद्री गहराइयों में छिपे केबल, पाइपलाइन और बन्दरगाह प्रतिष्ठानों को क्षति पहुँचाया जाना है.
इसके अलावा, जहाज़ों पर ड्रोन हमले व स्वायत्तापूर्ण जहाज़ों में छिपी कमज़ोरियाँ भी हैं. सप्लाई चेन को निशाना बनाने वाले अपराधी नए-नए औज़ारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वैश्विक समुद्री सुरक्षा, व्यापार मार्गों के लिए अनूठी चुनौतियाँ उपज रही हैं.
यूएन न्यूज़: जहाज़ों व नाविकों की सुरक्षा कर पाना कितना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: हाल के दिनों में, अन्तरराष्ट्रीय जहाज़रानी व्यवस्था और समुद्री नाविक, भूराजनैतिक टकरावों में फँस गए हैं, जोकि उनकी ज़िम्मेदारी नहीं हैं.
अलग-अलग ध्वजों वाले जहाज़, विभिन्न राष्ट्रीयताओं वाले नाविक फँसे हुए हैं. इन जहाज़ों व चालक दल के सदस्यों को हमलों का भी सामना करना पड़ा है. ये व्यापारिक उद्देश्यों के लिए जहाज़ हैं, जिनके पास हमलों से रक्षा करने के लिए क्षमता नहीं है.
असैनिक नाविक, युद्धक नहीं हैं और उन्हें कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.
यूएन न्यूज़: ऐसे कौन से अन्य सम्भावित, संकरे समुद्री मार्ग हैं, जोकि हिंसक टकराव के दौरान संवेदनशील साबित हो सकते हैं?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: जहाज़ों की आवाजाही के लिए निम्न वैश्विक जलमार्ग महत्वपूर्ण हैं:
- स्वेज़ नहर
- बाब अल-मान्देब जलडमरूमध्य
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य
- मलाका जलडमरूमध्य और सिंगापुर
- इस्तांबुल जलडमरूमध्य, कैनेककेल जलडमरूमध्य, और मरमारा सागर
- पनामा नहर
इन मार्गों पर किसी भी तरह का व्यवधान आने से वैश्विक व्यापार के लिए गम्भीर नतीजे हो सकते हैं और विश्व भर में आबादियों की खाद्य सुरक्षा के लिए भी.
यूएन न्यूज़: संयुक्त राष्ट्र क्या भूमिका निभा रहा है?
आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़: अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO), अन्तरराष्ट्रीय साझेदार संगठनों के साथ मिलकर कार्य करता है, ताकि सुरक्षा जोखिमों से निपटने की क्षमता तैयार की जा सके.
इसके तहत, IMO सुरक्षा उपकरणों को अमल में लाया जाता है, कारगर ढंग से सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है, क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाता है और क़ानूनी सुधार उपाय भी लागू किए जाते हैं. जैसेकि आपराधिक कृत्यों में मुक़दमा चलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विधि उपाय.
आम तौर पर IMO, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के ज़रिए समुद्री मार्गों पर स्वच्छंद आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है. समुद्री सुरक्षा से जुड़े संकटों में कूटनैतिक उपायों का मार्ग सुझाया जाता है, समुद्री नाविकों व मानवीय सहायता अभियानों की सुरक्षा की पैरवी की जाती है और नाज़ुक स्थिति से जूझ रहे देशों के लिए क्षमता निर्माण पर बल दिया जाता है.