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दुनिया की दो-तिहाई भूख सिमटी केवल 10 युद्धग्रस्त देशों में

फरवरी 2026 में सूडान के उत्तरी दारफूर के ताविला में एमएसएफ द्वारा संचालित पेरिस अस्पताल में एक स्वास्थ्य कर्मचारी द्वारा गंभीर रूप से कुपोषित तीन वर्षीय बच्ची मोना को सिरिंज के माध्यम से खिलाया जा रहा है।
© UNOCHA/गिल्स क्लार्क सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र के ताविला के एक अस्पताल में तीन साल की एक बच्ची का गम्भीर तीव्र कुपोषण का इलाज. दुनिया के 10 सर्वाधिक युद्ध व टकराव ग्रस्त देशों में, भूख का सबसे गम्भीर स्तर दर्ज किया गया है.

दुनिया की दो-तिहाई भूख सिमटी केवल 10 युद्धग्रस्त देशों में

स्वास्थ्य

दुनिया भर में सबसे अधिक भूख यानि गम्भीर खाद्य असुरक्षा, अब कुछ चुनिन्दा युद्धग्रस्त देशों में गहराई से जड़ें जमा चुकी है. 'खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट 2026' में आगाह किया गया है कि वर्ष 2025 में 47 देशों के 26.6 करोड़ लोग, गम्भीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में थे.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों व योरोपीय संघ की शुक्रवार को जारी इस वैश्विक रिपोर्ट से मालूम होता है कि यह संख्या एक दशक पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है. 

खाद्य और कृषि संगठन (FAO) महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि खाद्य सुरक्षा में अत्यन्त गम्भीर स्थिति, ना केवल बहुत फैली हुई है, बल्कि यह निरन्तर बनी हुई है और बार-बार हो रही है.

युद्ध व टकराव हैं मुख्य कारण

भुखमरी का सबसे बड़ा कारण युद्ध बना हुआ है, जो गम्भीर संकट का सामना कर रहे लोगों की कुल संख्या के आधे से अधिक हिस्से के लिए ज़िम्मेदार है. 

दुनिया में खाद्य असुरक्षा यानि भूख का सामना करने वाले कुल लोगों की, दो-तिहाई संख्या अब केवल इन 10 देशों में केन्द्रित हैं:

  • एशिया और मध्य पूर्व: अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, म्याँमार, पाकिस्तान, सीरिया, यमन और ग़ाज़ा.
  • अफ़्रीका: काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC), नाइजीरिया, दक्षिण सूडान और सूडान.

विशेष रूप से, 2025 पहला ऐसा वर्ष था जब रिपोर्ट में एक ही साल में दो अलग-अलग अकाल दर्ज किए गए – ग़ाज़ा में और सूडान के कुछ हिस्सों में.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इन निष्कर्षों को, टकरावों और युद्धों को समाप्त करने के लिए "कार्रवाई की पुकार" बताया है.

बच्चे और विस्थापित जन सबसे अधिक ख़तरे में

ग़ाज़ा, म्याँमार, दक्षिण सूडान और सूडान जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में एक नहीं, कई संकटों ने स्थिति को और बदतर बनाया है जिनमें टकराव व युद्ध, बीमारियों का फैलाव और बुनियादी सेवाओं तक कम पहुँच के हालात, कुपोषण के स्तर को अति गम्भीर बनाने के साथ-साथ, मौत के जोखिम को बढ़ा रहे हैं.

दक्षिण सूडान के जुबा में एक यूनिसेफ-समर्थित पोषण क्लिनिक में एक गहरे रंग की त्वचा वाले छोटे बच्चे को कुपोषण के लिए मापा जा रहा है। एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के हाथ बच्चे की ऊपरी बांह के चारों ओर एक रंगीन एमयूएसी (मध्य-ऊपरी बांह परिधि) टेप लपेट रहे हैं ताकि उनकी पोषण स्थिति का आकलन किया जा सके।
© UNICEF/UNI632021/Mark Naftali अत्यन्त गम्भीर खाद्य असुरक्षा यानि भूख की स्थिति से बच्चों सहित विस्थापित जन बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.

यूएन शरणार्थी एजेंसी – UNHCR के उच्चायुक्त बरहम सलीह का कहना है, “जबरन विस्थापन और खाद्य असुरक्षा, आपस में गहराई से गुँथे हुए हैं, जोकि कभी नहीं ख़त्म होने वाले एक दुष्चक्र की स्थिति है.”

उन्होंने आगाह किया है कि केवल मानवीय सहायता से ये दुष्चक्र टूटने वाला नहीं है.

इस संकट का मानवीय प्रभाव विनाशकारी है, ख़ासकर कमजोर वर्गों पर...

  • 2025 में 3 करोड़ 55 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण का शिकार हुए.
  • 1 करोड़ बच्चों को गम्भीर स्तर के कुपोषण या क्षय 'Severe Wasting' का सामना करना पड़ा. यह एक जानलेवा स्थिति है जिसमें स्वास्थ्य प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system), सामान्य बीमारियों से लड़ने के लिए भी सक्षम नहीं रह पाती है.
  • खाद्य संकट वाले क्षेत्रों में साढ़े 8 करोड़ लोग विस्थापित हुए, जिनमें शरणार्थियों को स्थानीय समुदायों की तुलना में अधिक भूख का सामना करना पड़ा.

धन सहायता में कटौती और संरचनात्मक संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि भूख अब एक अस्थाई आपातकाल नहीं, बल्कि एक "संरचनात्मक" वैश्विक चुनौती बन गई है. 2016 के बाद से विनाशकारी भूख में नौ गुना वृद्धि के बावजूद, धन सहायता में भारी गिरावट आई है, जो पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है.

इसके साथ ही, डेटा की कमी भी एक बड़ी समस्या बन रही है क्योंकि बहुत कम देश, खाद्य सुरक्षा का विश्वसनीय आकलन दे पा रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि संकट का वास्तविक पैमाना, रिपोर्ट किए गए आँकड़ों से भी बड़ा हो सकता है.

  • 30 वर्षीय हलीमा ताविला, उत्तरी दारफूर, सूडान में एक विस्थापन शिविर में एक तंबू के अंदर अपनी छह महीने की बेटी समिरा को पकड़े हुए हैं, जिसे डाउन सिंड्रोम है और जिसका हाल ही में कुपोषण का इलाज हुआ है।
    © UNOCHA/Giles Clarke अल फ़शर में लड़ाई से भागकर आई एक महिला, अपनी बेटी को गोद में लिए हुए है, जिसका हाल ही में कुपोषण के लिए इलाज किया गया है.

2026 के लिए भी आसार अच्छे नहीं

रिपोर्ट में आने वाले वर्ष के लिए भी चिन्ताजनक अनुमान व्यक्त किए गए हैं. जारी टकराव और युद्ध, जलवायु झटके और मध्य पूर्व में बाज़ार की उथल-पुथल के कारण, खाद्य क़ीमतों के उच्च स्तर पर रहने की आशंका है. 

खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने ज़ोर देकर कहा है कि दुनिया को केवल संकट की स्थिति आने पर सहायता कार्रवाई करने के बजाय, स्थानीय खाद्य उत्पादन को बचाने पर ध्यान देना होगा ताकि अस्थिरता के इस चक्र को तोड़ा जा सके.