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2025 में समुद्र बना रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मौत का जाल, रिकॉर्ड संख्या में मौतें

बांग्लादेश से उत्तर अचेह, इंडोनेशिया के उली माडन में आ रहे रोहिंग्या शरणार्थी एक नाव से अपना सामान उतार रहे हैं।
© UNHCR/Amanda Jufrian म्याँमार में जानलेवा हालात से बचने के लिए, रोहिंग्या लोग अन्य देशों को जाने के लिए, घातक समुद्री यात्राएँ करने को विवश हैं. (फ़ाइल)

2025 में समुद्र बना रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मौत का जाल, रिकॉर्ड संख्या में मौतें

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने बताया है कि वर्ष 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में, लगभग 900 रोहिंग्या शरणार्थी, मृत या लापता पाए गए. रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यह वर्ष, दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में अब तक का सबसे जानलेवा साल साबित हुआ है.

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UNHCR के अनुसार, ऐसी आशंका है कि पिछले लगभग एक दशक में, क़रीब 5 हज़ार रोहिंग्या शरणार्थी समुद्र में डूब गए.

UNHCR प्रवक्ता बाबर बलोच ने कहा, “दुर्भाग्य से अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी, हज़ारों बेबस रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए एक अचिह्नित क़ब्रगाह बन गए हैं.”

यूएन शरणार्थी एजेंसी ने बताया कि वर्ष 2012 के बाद से लगभग 2 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों ने, उत्पीड़न और बदहाली से बचने के लिए ख़तरनाक समुद्री यात्राओं में अपनी जान जोखिम में डाली है. 

बांग्लादेश की ओर पलायन

वर्ष 2017 में, म्याँमार में बढ़ते अत्याचारों से बचने के लिए, लाखों रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश की ओर पलायन कर गए थे.

उस समय यूएन मानवाधिकार प्रमुख रहे ज़ायद राआद अल-हुसैन ने इस स्थिति को “जातीय सफ़ाए का एक पाठ्यपुस्तक जैसा उदाहरण” क़रार दिया था.

इस सप्ताह की शुरुआत में, UNHCR ने जानकारी दी कि 8 अप्रैल को अंडमान सागर में, बांग्लादेश के तट के पास एक नौका दुर्घटना के बाद सैकड़ों रोहिंग्या लापता हो गए, जिनके डूब जाने की आशंका है.

बांग्लादेश उन देशों में शामिल है, जहाँ बड़े पैंमाने पर सताए गए इस समुदाय के लोगों की बड़ी संख्या ने शरण ली है.

ठोस समाधान की अपील

प्रवक्ता बाबर बलोच ने जिनीवा में कहा, “अधिकांश रोहिंग्या शरणार्थी म्याँमार लौटना चाहते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ स्वैच्छिक, सम्मानजनक और सुरक्षित वापसी के अनुकूल हों."

"हालाँकि, जारी युद्ध के हालात, उत्पीड़न और नागरिकता हासिल करने की सम्भावनाओं के अभाव ने, उनके लिए उम्मीद की गुंजाइश बेहद कम कर दी है.”

अंडमान सागर में एक लकड़ी की नाव के डेक पर पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित दुबले-पतले रोहिंग्या शरणार्थी बैठे हैं।
© UNHCR/Christophe Archambault

उन्होंने कहा, “अगर निराशा इतनी गहरी न हो, तो कोई भी अपने परिवार को ऐसे जोखिम भरे समुद्री सफ़र पर नहीं भेजेंगे, जहाँ जीवित बचने की सम्भावना बेहद कम हो.”

इन घातक समुद्री यात्राओं के थमने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं नज़र आ रहे हैं. ऐसे में UNHCR ने उम्मीद जताई है कि दुनिया, रिकॉर्ड मौतों के मामले सामने लाने से, रोहिंग्या समुदाय की उस पीड़ा को समझेगी, जिसका वे म्याँमार के भीतर, शरणार्थी शिविरों में और व्यापक क्षेत्र में सामना कर रहे हैं.

एजेंसी ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आगे बढ़कर इन बेबस रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए ठोस समाधान निकाले जाने का आहवान किया है, ताकि वर्ष 2026 एक और घातक साल नहीं बन जाए.