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युद्धविराम के दौरान होर्मुज़ को खुला रखने की ईरान की घोषणा का स्वागत

लेबनान के बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहीह में एक बहुमंजिला इमारत को 9 मार्च, 2026 को हवाई हमलों के बाद भारी क्षतिग्रस्त और आंशिक रूप से ध्वस्त दिखाया गया है। मलबे और मलबे अग्रभूमि में जमीन पर बिखरे हुए हैं।
© WFP/Arete/Ali Yunes लेबनान में हाल के दिनों में इसराइली हवाई हमलों की वजह से बेरूत में भीषण तबाही हुई है. एक रिहायशी इलाक़े में क्षतिग्रस्त इमारत.

युद्धविराम के दौरान होर्मुज़ को खुला रखने की ईरान की घोषणा का स्वागत

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ईरान द्वारा Strait of Hormuz’ यानि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को युद्धविराम की अवधि के दौरान, तमाम व्यावसायिक जहाज़ों के लिए पूरी तरह खुला रखे जाने की घोषणा का स्वागत किया है. उधर इसराइल और लेबनान में 10 दिनों के लिए युद्धविराम, बेरूत में गुरूवार मध्यरात्रि से लागू हो गया है, जिससे कई सप्ताह से इसराइली सैन्य बलों और हिज़बुल्लाह लड़ाकों के बीच जारी लड़ाई पर फ़िलहाल विराम लग गया है.

यूएन प्रमुख ने शुक्रवार को जारी एक वक्तव्य में ईरान की इस घोषणा को, सही दिशा में उठाया गया एक क़दम क़रार दिया.

उन्होंने आशा व्यक्त की है कि युद्धविराम लागू रहने के साथ-साथ, ईरान द्वारा होर्मुज़ समुद्री मार्ग को खुला रखने की घोषणा से, पक्षों के दरम्यान भरोसा बनाने और पाकिस्तान की मध्यस्थता में आयोजित किए जा रहे संवाद को मज़बूत करने में मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र का रुख़ स्पष्ट है, और वो ये कि होर्मुज़ संकरे जल मार्ग में, अन्तरराष्ट्रीय परिवहन अधिकारों व स्वतंत्रताओं की पूर्ण रूप से बहाली का, सभी पक्ष सम्मान करें. 

वक्तव्य में कहा गया है कि यूएन प्रमुख मध्य पूर्व में मौजूदा संकट का कोई शान्तिपूर्ण समाधान तलाश करने के लिए, तमाम राजनयिक प्रयासों को समर्थन देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने मध्य पूर्व में लेबनान मोर्च पर भी युद्धविराम के लिए बनी सहमति का स्वागत करते हुए, सभी पक्षों से इसका सम्मान करने और आगामी दिनों में बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने की आशा जताई है. 

मध्य पूर्व में इसराइल, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान में हिंसक टकराव भड़कने के बाद हिज़बुल्लाह ने इसराइल पर रॉकेट हमले किए थे, जिसके बाद, इसराइली सैन्य बलों ने लेबनान में बड़े स्तर पर अपनी सैन्य कार्रवाई शुरू की थी.

पिछले तीन दशकों में पहली बार, संयुक्त राज्य अमेरिका की मध्यस्थता से इसराइल और लेबनान के बीच सीधे तौर पर सम्पर्क स्थापित हुआ, कुछ दिनों पहले वॉशिंगटन डीसी में बैठक हुई और फिर संघर्षविराम के लिए सहमति बनने की घोषणा हुई.

‘शान्ति के हक़दार’

मानवाधिकार मामलों के लिए यूएन उच्चायुक्त (OHCHR) वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को सभी पक्षों से आग्रह किया कि लेबनान और इसराइल के बीच संघर्षविराम को सदभाव के साथ, पूर्ण रूप से अमल में लाए जाना होगा.

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उन्होंने कहा कि हिंसक टकराव के बुनियादी कारणों को दूर करने और स्थाई राजनैतिक समाधान ढूंढने के लिए सार्थक प्रयास किए जाने होंगे, ताकि सभी देशों में आम नागरिकों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा की व्यवस्था हो सके.

परियोजना सेवाओं के लिए यूएन कार्यालय (UNOPS) के कार्यकारी निदेशक योर्गे मोरेरा दा सिल्वा ने दोनों देशों में, लेबनान और इसराइल के बीच संघर्षविराम को पीड़ा दूर करने की दिशा में उठाया गया एक क़दम बताया है.

उन्होंने कहा कि लड़ाई पर विराम लगने से आम नागरिकों को राहत मिलेगी, जो पिछले कई सप्ताह से जान-माल की भीषण हानि को झेल रहे हैं.

UNOPS अधिकारी ने संघर्षविराम को बनाए रखने की अपील करते हुए एक कूटनैतिक समाधान पर बल दिया और कहा कि मध्य पूर्व क्षेत्र के लोगों को शान्ति की आवश्यकता है और वे इसके हक़दार हैं.

दीर्घकालिक समाधान 

इससे पहले, यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने गुरूवार को न्यूयार्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि लेबनान में एक स्थाई युद्धविराम और हिंसक टकराव के दीर्घकालिक समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबद्ध है.

संयुक्त राष्ट्र ने शान्ति स्थापना प्रयासों के लिए अपने समर्थन को दोहराया है और आग्रह किया है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को पूर्ण रूप से लागू किया जाना होगा. इसी प्रस्ताव के ज़रिए लगभग 20 वर्ष पहले, इसराइली सैन्य बलों और हिज़बुल्लाह के बीच हिंसक टकराव पर विराम लगा पाना सम्भव हुआ था. 

उन्होंने फिर दोहराया कि लेबनान और इसराइल के बीच हिंसक टकराव का कोई सैन्य समाधान नहीं है.

इस बीच, यूएन मानवतावादी एजेंसियों ने आगाह किया है कि लेबनान में मानवीय सहायता आवश्यकताएँ चरम पर हैं और आम नागरिकों के सामने विस्थापन, क्षतिग्रस्त बुनियादी प्रतिष्ठानों और सीमित अति-आवश्यक सेवाओं की चुनौती है.

स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान आया है, ज़रूरी चिकित्सा सामग्री की क़िल्लत है और विस्थापित आबादी समूह इससे विशेष रूप से प्रभावित हैं.

स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव

गुलाबी शर्ट और सफेद हिजाब पहने एक युवा लड़की एक नीले धातु के गेट के माध्यम से लेबनान में डब्ल्यूएफपी सहायता स्थल पर एक बड़े बेज टेंट को देखती है।
© WFP/Alfredo Zuniga लेबनान की राजधानी बेरूत में विस्थापित परिवारों ने एक स्पोर्ट्स स्टेडियम में शरण ली है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने लेबनान में 10 दिनों के संघर्षविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर उपजे भीषण बोझ में कमी लाने में मदद मिलेगी.

2 मार्च के बाद से अब तक, हिंसा में 2,100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, हज़ारों अन्य घायल हुए हैं. 8 अप्रैल, इस हिंसक टकराव के सबसे घातक दिनों में था, जब भीषण हवाई हमलों सैकड़ों लोग मारे गए और एक हज़ार से अधिक घायल हुए. 

10 लाख से अधिक लोग, लेबनान की सीमाओं के भीतर विस्थापित हुए हैं, जिनमें 1.40 लाख सामूहिक आश्रय स्थलों में रह रहे हैं. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर 139 हमलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 91 लोग मारे गए हैं और 224 घायल हुए हैं. 

घायलों का उपचार कर रहे अस्पताल अपनी पूर्ण क्षमता पर काम कर रहे हैं, और उपचार के लिए चिकित्सा सामग्री की कमी महसूस की जा रही है. 

बच्चों की सुरक्षा 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने लेबनान में संघर्षविराम का स्वागत किया और इसे स्थानीय बच्चों और उनके परिवारों की रक्षा के लिए एक अहम अवसर बताया है, जो पिछले कई सप्ताह से जारी लड़ाई की आंच में झुलस रहे हैं.

पिछले लगभग एक महीने के दौरान कम से कम 172 बच्चों की जान गई है और 661 घायल हुए हैं. 4.15 लाख बच्चे विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.

यूनीसेफ़ ने ज़ोर देकर कहा है कि बच्चों को लड़ाई पर विराम से कहीं अधिक की आवश्यकता है. उनके घरों, स्कूलों, स्वास्थ्य केन्द्रों को व्यापक क्षति पहुँची है, जिससे अति-आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता पर असर हुआ है. 

यूनीसेफ़, लेबनान सरकार और साझेदार संगठनों के साथ मिलकर प्रयास कर रही है, ताकि बच्चों व उनके परिवारों को इस स्थिति से उबारा जा सके. साथ ही, बच्चों के लिए संरक्षण, देखभाल व बुनियादी सेवाओं की व्यवस्था करने के इरादे से अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की अपील की गई है.