भूख से निपटने में मदद के लिए नया वैश्विक डिजिटल मंच
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने ‘भूख का मानचित्र’ (HungerMap Live) नाम का एक नया डिजिटल मंच शुरू किया है जो खाद्य सुरक्षा से जुड़े आँकड़ों और पूर्वानुमानों पर आधारित विश्लेषण को जोड़ता है. इससे 50 से अधिक देशों में भूख की स्थिति पर नज़र रखने में मदद मिल सकेगी.
यह मंच 300 से अधिक विश्लेषकों और कई भरोसेमन्द साझीदारों से मिली जानकारी को एक मंच पर लाता है. इसमें सरकारों से प्रमाणित आँकड़े, IPC यानि एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण, और कृषि व अर्थव्यवस्था से जुड़ी जानकारी शामिल है. इससे दुनिया के सबसे कमज़ोर हालात वाले लोगों के सामने मौजूद भूख की स्थिति की एक व्यापक और ताज़ा तस्वीर मिलती है.
WFP के खाद्य सुरक्षा और पोषण विश्लेषण निदेशक ज्याँ मार्टिन बाउएर ने हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “यह मंच पत्रकारों, नीति निर्धारकों और छात्रों को, वैश्विक खाद्य असुरक्षा को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा.”
यह मंच ऐसे समय जारी किया गया है, जब मानवीय राहत कार्यों के लिए धन की भारी कमी है. वहीं, IPC के अनुसार, भीषण भूख का सामना करने वाले लोगों की संख्या 2019 में 85 हज़ार से बढ़कर 2025 में 14 लाख तक पहुँच गई है. आईपीसी एक अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रणाली है, जो अकाल जैसी स्थितियों पर चेतावनी जारी करती है.
लागत बचाने की बड़ी सम्भावना
यह मंच, पूर्वानुमान आधारित विश्लेषण के ज़रिये, तीन अहम सवालों का जवाब देता है. इस समय दुनिया में खाद्य सुरक्षा की स्थिति क्या है? किन देशों और क्षेत्रों पर तुरन्त ध्यान देने की ज़रूरत है? और खाद्य असुरक्षा के पीछे कौन से मुख्य कारण हैं?
अध्ययनों से मालूम होता है कि खाद्य संकट के बारे में, समय रहते चेतावनी मिलने पर बड़ी लागत बचाई जा सकती है और राहत कार्यों को अधिक असरदार बनाया जा सकता है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम के पूर्व-तैयारी वाले कार्यक्रमों पर ख़र्च किए गए हर 1 डॉलर से कम से कम 7 डॉलर की बचत हो सकती है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैक्केन का कहना है, “आँकड़ों के बिना भूख के ख़िलाफ़ लड़ाई अँधेरे में लड़ी जाती है. यह मंच उस स्थिति को बदल देता है. अब हम यह समझ सकते हैं और अनुमान लगा सकते हैं कि भूख कहाँ, कैसे और क्यों बढ़ रही है. इसका मतलब है कि हम केवल भूख पर प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि उससे पहले तैयारी भी कर सकते हैं.”
यहाँ ये बताना शायद ठीक होगा कि इस सन्दर्भ में भूख (Hunger) का मतलब, भरपेट भोजन नहीं मिलने की स्थिति है. यह हम सभी को सामान्य रूप में भूख लगने की स्थिति से अलग है.
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पूर्वानुमान
यह मंच कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से भविष्य का अनुमान लगाने की सुविधा भी देता है. इसके ज़रिये विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा चिन्हित 16 “Hunger Spot” यानि खाद्य अभाव - भूख की स्थिति का सामना कर रहे देशों में, खाद्य ज़रूरतों का आकलन किया जा सकता है. ये वे देश हैं, जहाँ लोग पहले से ही भूख के भीषण स्तर का सामना कर रहे हैं.
इस मंच की एक और नई विशेषता यह है कि यह भोजन में “सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की पर्याप्तता” को भी ध्यान में रखता है. इससे खाद्य सुरक्षा की स्थिति को, लोगों के भोजन की पौष्टिक गुणवत्ता के साथ जोड़कर समझा जा सकता है.
गेट्स संस्थान के सहयोग से तैयार यह पोषण विश्लेषण, उन आबादियों की पहचान करने में मदद करता है, जो ज़रूरी विटामिन और खनिजों की कमी के कारण छिपी हुई भूख का सामना कर रही हैं.
भूख से समय रहते निकलना ज़रूरी
वैश्विक खाद्य सुरक्षा की निगरानी और विश्लेषण के लिए मिलने वाला धन लगातार घट रहा है. पिछले एक वर्ष में विश्व खाद्य कार्यक्रम के डेटा कवरेज में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है.
ज्याँ मार्टिन बाउएर ने कहा, “अगर हमें यह पता ही न चले कि भूख कहाँ और कब बढ़ रही है, तो उसे समय रहते रोका नहीं जा सकता.”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि “ऐसे आँकड़ों के संग्रह के लिए लगातार धन की उपलब्धता बेहद ज़रूरी है. इससे समाज के पास एक विश्वसनीय एवं प्रमाण-आधारित शुरुआती चेतावनी प्रणाली रह सकती है, जो दुनिया को उभरते संकटों और मानवीय पीड़ा के ख़तरों के बारे में समय रहते आगाह कर सके.”