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अंडमान सागर: नौका हादसे में रोहिंग्या शरणार्थियों समेत 250 लोगों के डूबने की आशंका

बांग्लादेश से उत्तर अचेह, इंडोनेशिया के उली माडन में आ रहे रोहिंग्या शरणार्थी एक नाव से अपना सामान उतार रहे हैं।
© UNHCR/Amanda Jufrian म्याँमार में जानलेवा हालात से बचने के लिए, रोहिंग्या लोग अन्य देशों को जाने के लिए, घातक समुद्री यात्राएँ करने को विवश हैं. (फ़ाइल)

अंडमान सागर: नौका हादसे में रोहिंग्या शरणार्थियों समेत 250 लोगों के डूबने की आशंका

प्रवासी और शरणार्थी

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने चिन्ता जताई है कि अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर जा रही एक नाव के डूब जाने से लगभग 250 लोग मारे गए हैं या लापता हैं. 

यह नौका दक्षिणी बांग्लादेश के टेकनाफ़ से तट से मलेशिया के लिए चली थी, मगर तेज़ हवाओं, समुद्री मार्ग में ख़राब मौसम और भीड़भाड़ की वजह से यह दुर्घटना का शिकार हो गई.

यूएन प्रवासन एजेंसी के प्रवक्ता मोहम्मदेअली अबूनजेला ने बताया कि यह घटना हमें ध्यान दिलाती है कि सुरक्षा व बेहतर जीवन की तलाश में अब भी लोग, ख़तरनाक समुद्री यात्राओं के दौरान गम्भीर जोखिमों का सामना कर रहे हैं.

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“किसी को भी गहरी कठिनाई के हालात और ऐसी यात्रा के बीच निर्णय करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए, उनका जीवन जिसकी भेंट चढ़ जाए.

यह हादसा एक बार फिर ध्यान दिलाता है कि लम्बे समय से विस्थापन का दंश झेल रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सतत समाधान नहीं हैं.

शरणार्थी शिविरों में रहन-सहन की बदतरीन परिस्थितियाँ हैं, ज़रूरी सेवाओं व आजीविका अवसरों तक सीमित पहुँच है, जबकि मानवीय सहायता घटती जा रही है.

वहीं, म्याँमार के राख़ीन प्रान्त में सुरक्षा परिस्थितियाँ अब भी चुनौतीपूर्ण हैं, जिससे रोहिंग्या लोगों की सुरक्षित व गरिमामय वापसी के प्रति चिन्ताएँ हैं, और लोग जोखिम भरी यात्राओं के लिए मजबूर हो रहे हैं.

तस्करी व मानव तस्करी के नैटवर्क, इन परिस्थितियों को अपने मुनाफ़े के लिए भुना रहे हैं, और रोहिंग्या शरणार्थियों व बांग्लादेशी नागरिकों को गम्भीर जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है.

हिंसा व विस्थापन 

वर्ष 2017 में, म्याँमार में हथियारबन्द गुटों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमले किए जाने के बाद, सैन्य बलों ने अपनी बर्बर, दमनात्मक कार्रवाई शुरू की थी, जिससे जान बचाने के लिए रोहिंग्या समुदाय के लाखों लोगों ने बांग्लादेश में शरण ली थी.

उनसे पहले भी, हज़ारों रोहिंग्या लोग हिंसा व भेदभाव से बचने के लिए कॉक्सेस बाज़ार में स्थित शरणार्थी शिविरों में आश्रय के लिए पहुँचते रहे हैं. रोहिंग्या समुदाय को म्याँमार की नागरिकता हासिल नहीं है.

10 लाख से अधिक लोग अब शरणार्थी के तौर पर बांग्लादेश में रहते हैं, जबकि बड़ी संख्या में अन्य रोहिंग्या विकट हालात में म्याँमार के भीतर या तो विस्थापित हैं या फिर अन्य अल्पसंख्यकों के साथ फँसे हुए हैं.

वर्ष 2025 में, 6.5 हज़ार रोहिंग्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश और म्याँमार से इन ख़तरनाक यात्राओं की शुरुआत की, जिनमें 890 लोगों की जान चली गई. 

इसकी तुलना में, वर्ष 2024 के दौरान, अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में 598 लोगों की जान गई थी. यानि 2025 में 40 प्रतिशत अधिक संख्या में लोगों की मौत हुई है या वे लापता हुए हैं.  

सहायता का दायित्व

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने ध्यान दिलाया है कि समुद्री मार्गों पर कठिनाइयों का सामना कर रहे लोगों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें बचाना, एक मानवतावादी अनिवार्यता है. 

यूएन एजेंसी ने सभी देशों से अन्तरराष्ट्रीय समुद्री क़ानून के तहत तयशुदा दायित्वों को निभाने का आग्रह किया है, जिसमें तलाश एवं बचाव अभियान संचालित करना और बचाए गए लोगों को सुरक्षित ढंग से समय पर तट पर उतारना भी है.

IOM, फ़िलहाल वित्तीय संसाधनों की गहरी क़िल्लत से जूझ रहा है, लेकिन उसके बावजूद संगठन अपने साझेदारों के साथ मिलकर ऐसी त्रासदियों पर जानकारी जुटा रहा है, उनके लिए जीवनरक्षक सहायता और बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों व मेज़बान समुदायों को बुनियादी सेवाएँ भी प्रदान की गई हैं.

वहीं, प्रशासनिक एजेंसियों के साथ मिलकर तस्करी व मानव तस्करी से निपटने की कोशिशें भी हो रही हैं. IOM ने अन्तरराष्ट्रीय संगठन से एकजुटता बढ़ाने और बांग्लादेश में शरणार्थियों व मेज़बान समुदायों के लिए सहायता धनराशि का आग्रह किया है.

साथ ही, म्याँमार में विस्थापन की बुनियादी वजहों को दूर किया जाना होगा और रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित व गरिमामय वापसी सुनिश्चित की जानी होगी.