कला और कूटनीति: संयुक्त राष्ट्र के गलियारों में मौन साँस्कृतिक दूत
यूनेस्को हर साल 15 अप्रैल को विश्व कला दिवस मनाता है. इसी दिन इतालवी पुनर्जागरण के महान कलाकार लियोनार्दो दा विंची की जयन्ती भी होती है. इस अन्तरराष्ट्रीय दिवस का मक़सद यह बताना है कि समाज में समावेशन बढ़ाने, अलग-अलग संस्कृतियों के बीच सम्वाद को मज़बूत करने और विश्व शान्ति को आगे बढ़ाने में कला की कितनी अहम भूमिका है. लेकिन न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कला का महत्व केवल सुन्दरता तक सीमित नहीं है. यहाँ कला, कूटनीति (Diplomacy) की एक ख़ामोश भाषा बन जाती है.
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश, दशकों से इस वैश्विक मंच को अनेक कलाकृतियाँ और साँस्कृतिक वस्तुएँ भेंट करते आए हैं. गलियारों और सभागारों में सजी ये कलाकृतियाँ, अपने देशों की साँस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और मूल्यों की झलक देती हैं. ये केवल उपहार नहीं हैं. ये राष्ट्रीय पहचान की प्रतीक हैं और ऐसी साँस्कृतिक कड़ियाँ भी हैं, जो भाषा और सीमाओं से परे जाती हैं.
हर कलाकृति के पीछे एक कहानी है, एक अर्थ है, और एक इतिहास है. इन्हें समझने पर पता चलता है कि कला केवल देखने की चीज़ नहीं, बल्कि एक जीवित अभिव्यक्ति है, जो अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ सकती है. हर मूर्ति, हर भित्तिचित्र और हर गलीचा, अपने शान्त स्वर में शान्ति, गरिमा और सहयोग की मानवता की साझा चाह को सामने लाता है.
विश्व कला दिवस के अवसर पर, आइए कुछ पल ठहरें और कला से सजे इस कूटनैतिक संसार में प्रवेश करें. आइए दुनिया भर से आए इन मौन दूतों के सन्देश सुनें, जो आज भी उतने ही गहरे और प्रासंगिक हैं.
डेनमार्क की लकड़ी की मूर्ति: कमज़ोरों को गले लगाने का सन्देश
संयुक्त राष्ट्र के पहले महासचिव ट्रिग्वे ली ने नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क को प्रोत्साहित किया था कि वे संयुक्त राष्ट्र के तीन मुख्य कक्षों सुरक्षा परिषद, आर्थिक और सामाजिक परिषद और ट्रस्टीशिप परिषद के निर्माण और डिज़ाइन में सहयोग करें. अन्ततः डेनमार्क ने ट्रस्टीशिप परिषद कक्ष के निर्माण और उसकी रूपरेखा की ज़िम्मेदारी ली.
डेनमार्क की ओर से भेंट की गई लकड़ी की मूर्ति “मानवता और उम्मीद” इसी कक्ष के लिए विशेष रूप से बनाई गई थी. इसे डेनमार्क के मूर्तिकार हेनरिक स्टार्के ने बनाया, जिनका जीवनकाल 1899 से 1973 तक रहा. अपनी अनोखी सोच के लिए जाने जाने वाले स्टार्के अक्सर चकमक पत्थर, कंकड़, ईंट और यहाँ तक कि ज़ंग लगी कीलों जैसी असामान्य चीज़ों का भी इस्तेमाल करते थे.
इस मूर्ति में एक आकृति दिखाई गई है, जो फैले हुए पंखों वाले एक पक्षी को थामे हुए है. कलाकार के अनुसार, ऊपर की ओर बढ़ता हुआ वृक्ष-तना जीवन के विस्तार और विकास का प्रतीक है, जबकि पक्षी, ऊँची उड़ान और असीम आकाँक्षा को दर्शाता है. आकृति की खुली बाँहें, जो पक्षी के पंखों जैसी लगती हैं, कमज़ोर, पीड़ित और उत्पीड़ित लोगों के प्रति सहानुभूति और करुणा का सन्देश देती हैं.
1968 में संयुक्त राष्ट्र डाक प्रशासन ने इस मूर्ति पर आधारित एक डाक टिकट भी जारी किया था. ट्रस्टीशिप परिषद के सन्दर्भ में इस कृति को उपनिवेशों के स्वतंत्रता की ओर बढ़ने के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है.
माइक्रोनेशिया से यूएन तक: लकड़ी की ईल मछली की साँस्कृतिक यात्रा
पालाउ की शैली में बनाई गई ईल मछली की यह कलाकृति, 1984 में माइक्रोनेशिया के ‘ट्रस्ट टेरिटरी’ ने संयुक्त राष्ट्र को भेंट की थी.
बारीक़ी से तराशी गई लकड़ी की यह कलाकृति, चित्रों के ज़रिये एक कहानी सुनाती है. इसे लकड़ी से ही बनाए एक आधार पर रखा गया है और इसके पीछे एक दर्पण लगाया गया है, ताकि दर्शक इसके पीछे उकेरी गई पूरी कथा भी देख सकें.
यह कृति मज़बूत “आयरनवुड” से बनाई गई है, जिसे पालाउ भाषा में “दोर्ट” कहा जाता है. ऐसी नक़्क़ाशी को पूरा करने में कई सप्ताह लग सकते हैं. इनमें अक्सर पालाउ और आसपास के द्वीपों की प्राचीन लोककथाएँ उकेरी जाती हैं.
इन कहानी-पट्टों में आम तौर पर ब्रेडफ्रूट से जुड़ी कथाएँ, प्रवासन की कहानियाँ, और सुरेच तथा दुलेई की दुखांत प्रेम कथा जैसे विषय मिलते हैं - यानि निषिद्ध प्रेम, विश्वासघात और दुख भरे बिछोह की कहानियाँ.
चीन का “शान्ति ज़ुन”: शान्ति और सौहार्द का सन्देश
“शान्ति ज़ुन” (Peace Zun) चीन का एक पारम्परिक कांस्य अनुष्ठान पात्र है, जिसे क्लॉइज़ोने इनेमल, काँच और रत्नों से बनाया गया है. चीनी संस्कृति में ऐसे कांस्य पात्र सम्मान के प्रतीक माने जाते हैं और महत्वपूर्ण अवसरों को यादगार बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं.
यह कलाकृति चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उस समय के संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून को भेंट की थी. यह उपहार संयुक्त राष्ट्र के प्रति चीन की सदभावना और समर्थन को दर्शाता है.
लगभग 1.65 मीटर ऊँची इस कृति को 70 कुशल शिल्पकारों ने 100 से अधिक प्रक्रियाओं और क़रीब 10 हज़ार घंटों की मेहनत से तैयार किया. इसमें प्रयोग किया गया लाल इनेमल, सुख और आशा का प्रतीक है. साथ ही, उस पर बने ड्रैगन शान्ति का, हाथी और फ़ीनिक्स समृद्धि का, और सात कबूतर संयुक्त राष्ट्र की 70वीं वर्षगाँठ का संकेत देते हैं.
शी जिनपिंग के अनुसार “जुन” का अर्थ, आदर और सम्मान है. यह उपहार संयुक्त राष्ट्र के प्रति चीन के मज़बूत समर्थन और एक अरब से अधिक लोगों की शुभकामनाओं को दर्शाता है.
“मेरे लोग”: साल्वाडोर की कला में उम्मीद की झलक
साल्वाडोर के कलाकार कामीलो मिनेरो (1917–2005) की बनाई गई भित्तिचित्र कृति “मेरे लोग” (My People) में बच्चों, मेहनतकश लोगों और बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को दिखाया गया है.
यह कृति दो बड़े विचारों को सामने लाती है. पहला है शान्ति, जिसे सूर्य की रौशनी और प्रकृति के ज़रिये व्यक्त किया गया है.
दूसरा है मानवाधिकार, जिसे गरिमा के साथ जीवन जीते लोगों की छवियों में देखा जा सकता है.
मिनेरो की कला में टूटी-बिखरी रेखाओं और गर्म रंगों का इस्तेमाल देखने को मिलता है, जो उनके देश की जीवन्तता, ऊर्जा एवं मानवीय ऊष्मा का प्रतिबिम्ब है.
“चुई का मछुआरा”: आम जीवन की सजीव तस्वीर
उरुग्वे के कलाकार जोमा बाइटलर की पेंटिंग “El Pescador del Chuy” मछुआरा समुदाय के एक छोटे क़स्बे के रोज़मर्रा के जीवन का सरल एवं सजीव चित्रण है.
संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून ने कहा था कि यह सिर्फ़ एक पुरस्कार-विजेता कलाकृति नहीं है. यह “हम संयुक्त राष्ट्र के लोगों” के साधारण जीवन और उनकी वास्तविकता की भी झलक पेश करती है.
यूगोस्लाविया का शान्ति स्मारक
क्रोएशियाई मूर्तिकार अन्तुन ऑगुस्तिनचिच द्वारा 1954 में बनाया गया यह शान्ति स्मारक, संयुक्त राष्ट्र में शान्ति के सबसे अहम प्रतीकों में से एक माना जाता है.
इसमें घोड़े पर सवार एक महिला को दिखाया गया है, जिसके हाथ में ज़ैतून की शाखा और एक ग्लोब है. यह दुनिया को शान्ति की दिशा में ले जाने वाले नेतृत्व का प्रतीक है.
कलाकार का मानना था कि अगर शान्ति की ज़िम्मेदारी महिलाओं के हाथ में हो, तो उसकी रक्षा और अधिक बेहतर ढंग से हो सकती है. फिर भी, उन्होंने स्पष्ट कहा था कि “शान्ति के लिए संघर्ष करना ज़रूरी है.”
केप वर्डे की प्रभाववादी कला: मिंडेलो बन्दरगाह के रंग
यह फ़्रेम की गई पेंटिंग मिंडेलो का दृश्य दिखाती है. मिंडेलो, साओ विसेंट द्वीप के उत्तरी हिस्से में स्थित एक बन्दरगाह शहर है, जो अफ़्रीका के पश्चिम में बसे द्वीपीय देश केप वर्डे में है. इस चित्र को केप वर्डे के प्रसिद्ध कलाकार डेविड लेवी लीमा ने बनाया था.
1968 में लीमा पुर्तगाल के लिस्बन चले गए थे. उस समय केप वर्डे, पुर्तगाल का उपनिवेश था. इसके बावजूद, उनका देश उनकी कला के लिए हमेशा एक बड़ा प्रेरणा स्रोत बना रहा. लीमा का मानना था कि लोगों का जीवन और उनकी गतिविधियाँ ही कला का सबसे अहम हिस्सा हैं.
इस पेंटिंग में उनकी ख़ास शैली साफ़ दिखाई देती है. उन्होंने गीले रंगों पर बारीक ब्रश स्ट्रोक की परतें चढ़ाकर एक नरम, चमकदार और रंगों से भरा दृश्य तैयार किया. यही वजह है कि इस कृति को प्रभाववादी शैली का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है.
यह पेंटिंग केप वर्डे के प्रधानमंत्री जोज़े मारिया नेविस ने संयुक्त राष्ट्र को भेंट की थी, और इसे उस समय के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने स्वीकार किया था.
यमन का 'रेगिस्तान का मैनहैटन'
'रेगिस्तान का मैनहैटन' शीर्षक वाली यह तस्वीर, प्राचीन शहर शिबाम को दिखाती है, जो तीसरी सदी से चली आ रही मिट्टी-ईंटों की ऊँची इमारतों के लिए प्रसिद्ध है.
इस तस्वीर का फ्रेम भी अपने आप में एक कलाकृति है. इसे यमन के कलाकार अतीफ़ अल सआदी ने तैयार किया है. इस पर स्थानीय पेड़-पौधों और जीव-जन्तुओं से प्रेरित पारम्परिक नक़्क़ाशी की गई है, जो वहाँ की साँस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को ख़ूबसूरती से सामने लाती है.
कला के ज़रिये अफ़ग़ानिस्तान की मज़बूती
“अनदेखा अफ़ग़ानिस्तान” (The Unseen Afghanistan) कलाकृति, कविता और चित्रों को एक साथ लाकर अफ़ग़ानिस्तान की समृद्ध साँस्कृतिक विरासत और उम्मीद भरे भविष्य को सामने लाती है.
इसमें रूमी की एक पंक्ति भी शामिल है. “आइए, इस पवित्र धरती पर हम केवल प्रेम और मित्रता ही बोएँ.”
इस कलाकृति में पहाड़ों को मज़बूती और धैर्य के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है. साथ ही स्कूल का बस्ता लिए बच्चे और कृत्रिम पैर के सहारे खुलकर दौड़ता एक लड़का भी नज़र आता है.
ये सभी चित्र मिलकर साहस, सहनसक्षमता और उम्मीद का सन्देश देते हैं.
सऊदी अरब का किस्वाह: आस्था का पवित्र वस्त्र
किस्वाह काले रेशम का वह पवित्र कपड़ा है, जिस पर सोने और चाँदी के धागों से क़ुरआन की आयतें काढ़ी जाती हैं. परम्परा के अनुसार, यह मक्का में स्थित काबा को ढकती है, जिसे इस्लाम का आध्यात्मिक केन्द्र माना जाता है.
1983 में संयुक्त राष्ट्र को भेंट किया गया यह किस्वाह, संयुक्त राष्ट्र के सिद्धान्तों के प्रति सऊदी अरब की प्रतिबद्धता का प्रतीक है.
साथ ही, यह इस्लामी कला, शिल्पकला और गहरी आस्था की एक बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति भी है.
मॉरीशस का डोडो: नाज़ुकता और चेतावनी का प्रतीक
मॉरीशस का मूल निवासी डोडो पक्षी, मानव गतिविधियों के कारण 17वीं सदी में विलुप्त हो गया.
2002 में संयुक्त राष्ट्र को भेंट की गई इसकी एक प्रतिकृति मूर्ति, पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी और संरक्षण की ज़रूरत की अहम याद दिलाती है.
सीरिया की इश्तार: प्रेम और युद्ध की देवी
प्राचीन देवी इश्तार की एक प्रतिकृति सीरिया ने संयुक्त राष्ट्र को भेंट की थी. इश्तार मेसोपोटामिया की सबसे महत्वपूर्ण देवियों में गिनी जाती हैं.
इश्तार को प्रेम, युद्ध और न्याय की देवी माना जाता है. बाद की कई पौराणिक परम्पराओं पर भी उनका गहरा प्रभाव पड़ा.
यह कलाकृति दजला - फ़रात नदियों के बीच विकसित उस प्राचीन सभ्यता की ऐतिहासिक गहराई को सामने लाती है, जिसे अक्सर सभ्यता की जन्मस्थली कहा जाता है.
इन सभी कलाकृतियों से स्पष्ट होता है कि संयुक्त राष्ट्र केवल कूटनीति का केन्द्र नहीं है. यह एक ऐसा जीवन्त स्थल है, जहाँ दुनिया की पहचान, इतिहास व उम्मीदें एक साथ नज़र आती हैं, और जहाँ कला, ख़ामोशी से शान्ति का सन्देश देती है.