सूडान: भीषण युद्ध के 3 साल, लोग नारकीय स्थिति में जीने को विवश
सूडान में भीषण युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है और तीन वर्ष के बाद भी आम लोग, क्रूर हिंसा और गहरी पीड़ा झेलने को मजबूर हैं. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) आगाह किया है कि इस युद्ध में अनगिनत आम लोग हताहत हो रहे हैं, और लाखों लोग भोजन, आश्रय व स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं.
सूडान की सशस्त्र सेना और RSF के बीच अप्रैल 2023 में, देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था, जिससे एक गहरा मानवीय संकट उपजा है.
सूडान, आज दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट बना हुआ है, जहाँ लगभग दो-तिहाई आबादी जीवित रहने के लिए तत्काल सहायता पर निर्भर है.
देश में अब भी 1.9 करोड़ से अधिक लोग गम्भीर भूख का सामना कर रहे हैं, और हिंसा, विस्थापन व आर्थिक पतन के बीच देश के अनेक हिस्सों में अकाल का ख़तरा बना हुआ है.
अनेक समुदाय भोजन, बाज़ारों और सहायता से कट चुके हैं, जबकि बच्चों की 3 साल की शिक्षा प्रभावित हुई है और उनका भविष्य अधर में लटका है.
मध्य पूर्व संकट का असर
सूडान का खाद्य संकट, मध्य पूर्व में बढ़ते टकराव के कारण और गहरा सकता है. लाल सागर में व्यवधान के कारण ज़रूरी चीज़ों के आयात में देरी हो रही है, जिससे खाद्य पदार्थों, ईंधन और उर्वरकों की क़ीमतें बढ़ रही हैं.
सूडान में ईंधन की क़ीमतें 24 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं, जिससे भोजन महँगा हो गया है और लाखों लोग बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं.
इन व्यवधानों का सीधा असर मानवीय राहत कार्यों पर भी पड़ रहा है, सामग्री की आपूर्ति में देरी और परिवहन लागत बढ़ने से हालात और मुश्किल हो गए हैं.
इसका संयुक्त प्रभाव देशभर के परिवारों को और गहरी खाद्य असुरक्षा की ओर धकेल सकता है.
नारकीय परिस्थितियाँ
WFP के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा है कि “अन्तरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्ध को रोकने और समाप्त करने में, तथा सूडानी लोगों को अत्याचारों से बचाने में विफल रहा है.”
कार्ल स्काउ ने हाल ही में सूडान का दौरा किया है. उन्होंने कहा कि “मैंने शिविरों में जिन लोगों से मुलाक़ातें कीं, उन्होंने नरक जैसी परिस्थितियाँ झेली हैं. वे अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं और अब बेहद दयनीय हालात में जी रहे हैं.
“वे इससे कहीं बेहतर जीवन के हक़दार हैं. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें फिर से निराश नहीं किया जाए और उन्हें वह बुनियादी सहायता मिले, जिसकी उन्हें ज़रूरत है.”
उन्होंने चेतावनी दी कि “सूडान भर में, जिन महिलाओं से मैंने बात की, उन्होंने बताया कि उनके पास अपने बच्चों को खिलाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है और उन्हें सबसे बुनियादी सेवाओं तक भी पहुँच नहीं मिल रही है.”
कार्ल स्काउ ने कहा कि “WFP और मानवीय समुदाय के पास सहायता बढ़ाने का अनुभव और क्षमता है, लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि मानवीय मदद को सुरक्षित, बेरोकटोक और बड़े स्तर पर पहुँचने दिया जाए, और इसके लिए हमें कहीं अधिक वित्तीय की ज़रूरत है.”
WFP की खाद्य सहायता
WFP, अकाल-प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए, हर महीने 35 लाख लोगों तक आपात खाद्य, नक़दी और पोषण सहायता पहुँचा रहा है.
जिन लोगों की मदद की जा रही है, उनमें से दो-तिहाई लोग दारफ़ूर और कोर्दोफ़ान क्षेत्रों में हैं, जहाँ अकाल की पुष्टि हो चुकी है और लड़ाई सबसे तेज़ है.
पिछले साल, 5 वर्ष से कम उम्र के 20 लाख से अधिक बच्चों और 5 लाख से ज़्यादा गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं और लड़कियों को पोषण सहायता मुहैया कराई गई.
कार्ल स्काउ ने कहा कि “हमें सूडान के लोगों के भविष्य में निवेश जारी रखना होगा, लेकिन इसके लिए हमें वित्तीय सहायता की ज़रूरत है.”
WFP की खाद्य सहायता में, जनवरी 2026 से, पिछले वर्ष की तुलना में संसाधनों की कमी के कारण14 प्रतिशत की गिरावट आई है.
एजेंसी को अगले छह महीनों तक जीवनरक्षक अभियान जारी रखने के लिए तत्काल 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की आवश्यकता है.