अन्तरिक्ष मलबे की रफ़्तार बन्दूक की गोली से भी तेज़, बढ़ रही हैं पर्यावरणीय चुनौतियाँ
पृथ्वी की कक्षा में फैलता मलबा, रॉकेट उत्सर्जन और बढ़ता अन्तरिक्ष प्रदूषण अब पूरी दुनिया के लिए चिन्ता का विषय बनते जा रहे हैं. कुछ अन्तरिक्ष मलबे की रफ़्तार तो 15 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है जो बन्दूक की गोली से भी तेज़ है. अन्तरिक्ष में मानव गतिविधियों में तेज़ वृद्धि के साथ पर्यावरण से जुड़ी नई चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं. आइए समझते हैं कि अन्तरिक्ष में बढ़ती मानव सक्रियता, पृथ्वी और पर्यावरण पर क्या असर डाल रही है, और इससे निपटने के लिए क्या क़दम ज़रूरी हैं.
नासा के ‘आर्टेमिस टू’ दल ने चन्द्रमा की ऐतिहासिक परिक्रमा पूरी करने के बाद, 10 अप्रैल को प्रशान्त महासागर में सुरक्षित वापसी की.
लेकिन चारों अन्तरिक्ष यात्री और उनका ओरायन अन्तरिक्ष यान, पृथ्वी पर लौटने से पहले, वायुमंडल के उस ऊपरी हिस्से से गुज़रे, जहाँ बड़ी मात्रा में अन्तरिक्ष मलबा फैला हुआ है.
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्वी की कक्षा में, मलबे के क़रीब 13 करोड़ टुकड़े मौजूद हैं. इनमें पुराने उपग्रहों के हिस्से और छोड़ दिए गए अन्तरिक्ष यान शामिल हैं. नासा के मुताबिक़, इनमें से कुछ टुकड़े 15 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से तैरते हैं, जो बन्दूक की गोली की गति से लगभग 10 गुना अधिक है.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अन्तरिक्ष में फैला यह कचरा, वहाँ बढ़ती मानव गतिविधियों से पैदा हो रही कई पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है.
आर्टेमिस दल की वापसी और मानव अन्तरिक्ष उड़ान के अन्तरराष्ट्रीय दिवस (12 अप्रैल) के अवसर पर,अ्तरिक्ष प्रदूषण से जुड़े छह अहम सवाल -
1. क्या रॉकेट प्रदूषण फैलाते हैं?
हाँ, रॉकेट प्रदूषण फैलाते हैं. हर प्रक्षेपण के दौरान वायुमंडल में कालिख, एल्युमीनियम के कण, रासायनिक यौगिक और गैसें निकलती हैं. ये उत्सर्जन वायु प्रदूषण बढ़ा सकते हैं, वायुमंडल की रासायनिक संरचना को प्रभावित कर सकते हैं, और ओज़ोन परत को नुक़सान पहुँचा सकते हैं.
केवल अन्तरिक्ष यानों का प्रक्षेपण ही नहीं, बल्कि जब ये यान वायुमंडल में वापिस दाख़िल होते हैं, तब भी वे ऑक्साइड और धातुओं जैसे रासायनिक अवशेष छोड़ते हैं.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और बाह्य अन्तरिक्ष मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई इस संक्षिप्त रिपोर्ट के अनुसार, ये प्रदूषक, ओज़ोन परत को क्षीण कर सकते हैं व सूर्य के प्रकाश के वापस न्तरिक्ष में लौटने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं.
2. अन्तरिक्ष में फैला कचरा ख़तरनाक क्यों है?
पृथ्वी के चारों ओर अन्तरिक्ष मलबा लगातार बढ़ रहा है. पुराने उपग्रह और टक्करों के परिणामस्वरूप टुकड़े जमा होते जा रहे हैं, जिससे और टक्करों का ख़तरा बढ़ता है, व उससे और अधिक मलबा पैदा हो सकता है.
ये टुकड़े उन उपग्रहों से टकरा सकते हैं जिन पर हम संचार, मौसम और मार्ग दिखाने वाली टैक्नॉलॉजी (Navigation) जैसी सेवाओं के लिए निर्भर हैं. अगर इनमें से कुछ टुकड़े वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने के बाद पूरी तरह नष्ट नहीं हों, तो वे धरती पर गिरकर लोगों और पर्यावरण के लिए ख़तरा बन सकते हैं.
इसके अलावा, बड़ी संख्या में उपग्रह और कक्षीय मलबा रात के आकाश को अधिक चमकीला व कोलाहलपूर्ण बना रहे हैं, जिससे खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड के अध्ययन में भी बाधा आ रही है.
3. अन्तरिक्ष गतिविधियों के पर्यावरणीय असर को कैसे कम किया जा सकता है?
सबसे पहले, जानकारी की कमी को दूर करना होगा. इसके लिए और अधिक शोध की ज़रूरत है, ताकि यह समझा जा सके कि अन्तरिक्ष गतिविधियों का वायुमंडल, जलवायु, पारिस्थितिक तंत्रों और लोगों पर क्या असर पड़ता है.
दूसरी बात, निगरानी और आँकड़ों के साझा उपयोग को बेहतर बनाना होगा. विशेषकर प्रक्षेपण और वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान होने वाले उत्सर्जन पर बेहतर जानकारी, जोखिमों को समझने और उनके असर का सही अनुमान लगाने में मदद करेगी.
तीसरा, अन्तरिक्ष यानों का आकार इस तरह तैयार करना होगा कि उनके पूरे जीवनकाल में पर्यावरण पर कम असर पड़े. इनमें ऐसे यान शामिल हैं जो टक्करों से बच सकें, सुरक्षित रूप से कक्षा से बाहर आ सकें, और स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करें.
अन्त में, मज़बूत अन्तरराष्ट्रीय सहयोग बहुत ज़रूरी है. सरकारों, अन्तरिक्ष एजेंसियों, निजी कम्पनियों और वैज्ञानिकों को मिलकर काम करना होगा, ताकि चुनौतियाँ बढ़ने से पहले वैश्विक स्तर पर टिकाऊ मानक तय किए जा सकें और उन्हें लागू किया जा सके.
4. "अन्तरिक्ष स्थिरता" का क्या मतलब है?
अन्तरिक्ष स्थिरता का मतलब है बाह्य अन्तरिक्ष का ऐसा इस्तेमाल, जिससे अन्तरिक्ष लम्बे समय तक अन्तरिक्ष सुरक्षित रहे और पृथ्वी का पर्यावरण भी संरक्षित बना रहे.
सरल शब्दों में कहें तो, इसका अर्थ है अन्तरिक्ष को एक साझा क्षेत्र मानना, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित और उपयोग योग्य रहना चाहिए. इसके लिए ज़रूरी है:
• अन्तरिक्ष मलबे को कम करना.
• उत्सर्जन घटाना.
• अन्धेरे और शान्त आकाश की रक्षा करना.
• संसाधनों का दक्षता के साथ उपयोग करना.
• अन्तरिक्ष यानों की सुरक्षित पुनः प्रविष्टि सुनिश्चित करना.
• अन्तरिक्ष तक सभी की न्यायसंगत पहुँच बनाए रखना.
5. अन्तरिक्ष से जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की ज़िम्मेदारी किसकी है?
यह एक साझा ज़िम्मेदारी है.
बाह्य अन्तरिक्ष सन्धि जैसे अन्तरराष्ट्रीय समझौते, व्यापक सिद्धान्त तय करते हैं, जिनमें हानिकारक प्रदूषण से बचाव भी शामिल है. बाह्य अन्तरिक्ष के शान्तिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र समिति, अन्तरिक्ष गतिविधियों को टिकाऊ बनाने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करती है, जबकि राष्ट्रीय सरकारें प्रक्षेपण, उपग्रह संचालन और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करती हैं.
कम्पनियों अन्तरिक्ष एजेंसियों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें और उनका उपयोग करें, जिससे पर्यावरण को कम नुक़सान पहुँचे.
इसके अलावा, अन्य संस्थाएँ भी अहम भूमिका निभाती हैं. अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU), उपग्रह कक्षाओं और रेडियो आवृत्तियों का प्रबन्धन करता है, जबकि अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) महासागरों पर पड़ने वाले असर का अध्ययन कर रहा है.
फिर भी, अन्तरिक्ष के लिए अब तक कोई व्यापक वैश्विक पर्यावरणीय ढाँचा मौजूद नहीं है.
6. संयुक्त राष्ट्र की क्या भूमिका है?
अन्तरिक्ष गतिविधियों का असर, जैसे-जैसे वायुमंडल, महासागरों, पारिस्थितिक तंत्रों और लोगों पर बढ़ रहा है, संयुक्त राष्ट्र इस चुनौती को समझने और उससे निपटने में मदद कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और बाह्य अन्तरिक्ष मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि पर्यावरणीय जोखिमों को बेहतर ढंग से समझा जा सके, वैज्ञानिक आधार को मज़बूत बनाया जा सके, और यह सुनिश्चित हो कि अन्तरिक्ष शासन में पर्यावरण सम्बन्धी चिन्ताओं को भी बराबर महत्व मिले.
अब अन्तरिक्ष में होने वाली गतिविधियाँ पृथ्वी से अलग नहीं रहीं. लेकिन मज़बूत वैश्विक सहयोग और ठोस क़दमों के ज़रिए, देश इस क्षेत्र को पर्यावरणीय संकट से बचा सकते हैं.
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