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सूडान युद्ध: 1.4 करोड़ लोग विस्थापित, गम्भीर भूख संकट, और स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त

एड्रे, चाड में एक खाद्य सहायता वितरण केंद्र पर, WFP लोगो वाले बेज रंग के जैकेट में पहने विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के एक सहायता कर्मचारी रंगीन हिजाब पहने महिलाओं की एक पंक्ति से बात कर रहे हैं। सहायता के लिए अपनी पहचान की पुष्टि करने के लिए बायोमेट्रिक परीक्षण के बाद महिलाएं इंतजार कर रही हैं। तिथि: 18 मार्च 2026।
© WFP/Arete/Salamon Djek सूडान में महिलाएँ और लड़कियाँ, युद्ध से जुड़ी यौन हिंसा के विशेष ख़तरे में हैं.

सूडान युद्ध: 1.4 करोड़ लोग विस्थापित, गम्भीर भूख संकट, और स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सूडान में जारी भीषण गृहयुद्ध के 3 साल पूरे होने के पड़ाव से ठीक पहले आगाह किया है कि लाखों लोग अब भी विस्थापन और भूख से जूझ रहे हैं, देश की स्वास्थ्य व्यवस्था बर्बाद हो चुकी है और हिंसा थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं.

सूडान में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की प्रतिनिधि मैरी-हेलेने वर्ने ने राजधानी ख़ारतूम से पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि हिंसक टकराव की वजह से, क़रीब 1.4 करोड़ लोग यानि देश की एक-चौथाई आबादी अपने घर छोड़ने को मजबूर हुई है. 

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इनमें 90 लाख लोग अब भी सूडान के भीतर विस्थापित हैं, जबकि 44 लाख लोगों ने सीमाएँ पार करके अन्य देशों में शरण ली है, जिनमें अधिकतर चाड, दक्षिण सूडान और मिस्र पहुँचे हैं.

15 अप्रैल 2023 को, परस्पर विरोधी सैन्य बलों, सूडानी सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों की वजह से हिंसक टकराव भड़क उठा था. उन्होंने बताया कि कोर्दोफ़ान, दारफ़ूर और ब्लू नाइल प्रान्त समेत देश के बड़े हिस्सों में अब भी लड़ाई जारी है.

UNHCR प्रतिनिधि ने कहा कि “दुर्भाग्यवश, फ़िलहाल किसी समाधान की दिशा में स्पष्ट प्रगति नहीं दिख रही है…ध्यान देने वाली एक बात यह है कि हवाई बमबारी और ड्रोन हमलों का इस्तेमाल बढ़ गया है.” 

उन्होंने कहा कि हवाई हमलों में बिना किसी चेतावनी के नागरिक बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया जा रहा है. साथ ही, बड़े पैमाने पर हत्याओं, सैनिकों के रूप में जबरन भर्ती और मनमाने ढंग से गिरफ़्तारियों सहित गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघन लगातार जारी हैं.

साथ ही, महिलाएँ और लड़कियाँ, युद्ध के दौरान यौन हिंसा की चपेट में आने का ख़तरा झेल रही हैं, जिन्हें अक्सर अपनी जान बचाने के लिए भागने की कोशिश कर रही महिलाओं के विरुद्ध अंजाम दिया जाता है.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने इस साल फ़रवरी में जानकारी दी थी कि केवल 2025 में ही यौन हिंसा के 500 से अधिक भुक्तभोगियों की पहचान की गई, जबकि उसी वर्ष रिकॉर्ड 11,300 नागरिक मारे गए.

इसके अलावा, हज़ारों लोग अब भी लापता हैं या उनकी पहचान नहीं हो सकी है.

गम्भीर भूख संकट

सूडान में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के प्रतिनिधि होंगजी यैंग ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन संकट अब गहरे खाद्य संकट में भी बदल चुका है. अब 2.1 करोड़ सूडानी लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जिनमें 63 लाख लोग खाद्य आपात स्थिति के सबसे भयावह स्तर पर हैं.

उन्होंने कहा कि दारफ़ूर और कोर्दोफ़ान जैसे युद्धग्रस्त इलाक़ों में ग्रामीण परिवारों पर विशेष तौर पर भारी दबाव है. खाद्य उत्पादन की क्षमता बड़े स्तर पर तबाह हो चुकी है, विशेष रूप से ख़ारतूम प्रान्त में. वहीं, क्षतिग्रस्त पशु चिकित्सा प्रयोगशाला अब पशुधन के लिए टीके भी नहीं बना पा रही है.

सूडान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉ. शिबले सहबानी ने कहा कि देश की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह चरमरा गई हैं.

उन्होंने बताया कि देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी को तत्काल स्वास्थ्य सहायता की ज़रूरत है. अस्पताल मरीज़ो से भरे हुए हैं और संक्रामक बीमारियों का प्रकोप व्यापक रूप से फैल रहा है.

स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई

सूडान में संघर्ष के कारण विस्थापित हुए लोग चाड में एड्रे इस्साखा हारून स्थल पर एक अस्थायी आश्रय के तहत इकट्ठे होते हैं।
© IOM/François-Xavier Ada सूडान में युद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं.

डॉक्टर शिबले सहबानी ने बताया कि बीते 3 साल के युद्ध के दौरान WHO ने स्वास्थ्य सेवाओं पर 200 से अधिक हमलों को दर्ज किया है, जिनमें 2,052 लोगों की मौत हुई है.

इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों की हत्या, घायल करने, हिरासत में लेने और यातना देने की घटनाएँ भी सामने आई हैं. यूएन अधिकारी ने सूडान के लिए मानवीय सहायता पहुँचाने पर मध्य पूर्व युद्ध के हालिया असर का भी ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा, “WHO जैसी अधिकांश एजेंसियों का मुख्य लॉजिस्टिक्स केन्द्र संयुक्त अरब अमीरात में है और मध्य पूर्व में मौजूदा हालात हमारी मानवीय सहायता क्षमता को गम्भीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं, क्योंकि आपूर्ति मार्ग बाधित हो गए हैं और राहत सामग्री भेजना धीमा व महँगा हो गया है.”

“हमारे पास देश के भीतर कुछ भंडार मौजूद थे, जिससे हम तुरन्त प्रतिक्रिया दे सके… लेकिन अब हम उन्हीं भंडार का इस्तेमाल कर रहे हैं और हमें अतिरिक्त आपूर्ति की तत्काल ज़रूरत है.”