अमेरिका-ईरान युद्धविराम से होर्मुज़ समुद्री मार्ग के खुलने की उम्मीद बढ़ी
अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के अस्थिर युद्धविराम से यह उम्मीद जागी है कि रणनैतिक रूप से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खोला जा सकेगा. यह एक अहम संकरा समुद्री मार्ग है, जिसके ज़रिये दुनिया के तेल और गैस का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है.
होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक तनाव का एक बड़ा केन्द्र बन गया है. इस संकरे और घुमावदार समुद्री मार्ग में नौवहन बाधित होने के कारण तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जहाज़ों और नाविकों की सुरक्षा पर खतरा मंडराया है, और क्षेत्रीय स्थिरता भी प्रभावित हुई है.
बुधवार रात तक हालात के शुरुआती संकेत मिले-जुले रहे, लेकिन युद्धविराम को मज़बूत बनाने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहान्त में पाकिस्तान में बातचीत होने की उम्मीद है.
यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), ईरान और ओमान के बीच फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. इसी रास्ते से सऊदी अरब, इराक़ और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश बड़ी मात्रा में तेल और गैस का निर्यात करते हैं.
इस मार्ग में थोड़ी-सी रुकावट भी:
• ऊर्जा की क़ीमतों में तेज़ बढ़ोत्तरी कर सकती है.
• वैश्विक आपूर्ति श्रृँखलाओं को प्रभावित कर सकती है.
• भू-राजनैतिक बढ़ा सकती है.
अभी समुद्री आवाजाही की स्थिति क्या है?
अभी इस समुद्री मार्ग से जल परिवहन बुरी तरह प्रभावित है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे हिस्से में केवल 39 किलोमीटर (यानि 21 समुद्री मील) चौड़ा है, और फ़रवरी के अन्त में युद्ध शुरू होने के बाद से यहाँ आवाजाही पर गहरा असर पड़ा है.
संयुक्त राष्ट्र की विशेष समुद्री एजेंसी, अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, युद्ध भड़कने से पहले इस जलमार्ग से हर दिन लगभग 150 जहाज़ गुजरते थे.
लेकिन हमलों के ख़तरे के बाद यह संख्या घटकर सिर्फ़ चार या पाँच जहाज़ प्रतिदिन रह गई, और वे भी केवल वही थे जिन्हें ईरानी अधिकारियों ने शत्रु नहीं माना.
युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह जलडमरूमध्य क्या और कब, सभी जहाज़ों के लिए पूरी तरह फिर से खोला जाएगा.
जहाज़ कितने असुरक्षित हैं?
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, फ़ारस की खाड़ी में लगभग 2,000 जहाज़ फँसे हुए हैं. इनमें तेल और गैस टैंकर, थोक मालवाही पोत, मालवाहक जहाज़ और छह पर्यटन क्रूज़ पोत भी शामिल हैं. ये सभी होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं.
अनुमान के अनुसार इन जहाज़ों पर लगभग 20 हज़ार नाविक मौजूद हैं.
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के मुताबिक, इस क्षेत्र में अन्तरराष्ट्रीय जल परिवहन पर 21 पुष्ट हमले हुए हैं. इनमें 10 नाविकों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं.
IMO के समुद्री सुरक्षा प्रभाग के निदेशक डेमियन शेवेलिये ने कहा, “युद्धविराम, फ़ारस की खाड़ी में फँसे उन 20 हज़ार नाविकों के लिए राहत की ख़बर है, जो निकासी का इन्तज़ार कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि ये नाविक “एक महीने से अधिक समय से तनावपूर्ण और अस्थिर हालात में फँसे हुए हैं और अपने जहाज़ों से उतर भी नहीं पा रहे हैं.”
नाविकों की सुरक्षित निकासी
डेमियन शेवेलिये ने कहा कि IMO, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सम्बन्धित पक्षों के साथ एक “उपयुक्त व्यवस्था” तैयार करने पर पहले से काम कर रहा है.
उन्होंने कहा, “इस समय सबसे ज़रूरी बात यह है कि नौपरिवहन सुरक्षित रहे, ताकि निकासी सम्भव हो सके. हम नहीं चाहते कि हालात फिर से तनावपूर्ण बनें. इसलिए इस समय हमारा पूरा ध्यान निकासी पर है.”
अन्तरराष्ट्रीय क़ानून क्या कहता है?
समुद्री गतिविधियों से जुड़ी एक बहुपक्षीय सन्धि के तहत क़ानूनी ढाँचा तय किया गया है, जिसे समुद्र के क़ानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) कहा जाता है.
इसके मुख्य सिद्धान्त:
• अन्तरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य मार्गों से जहाज़ों को पारगमन का अधिकार है.
• तटीय देशों को जल परिवहन को रोकना या उसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए.
सीधे शब्दों में, इस जलडमरूमध्य को अन्तरराष्ट्रीय नौपरिवहन के लिए खुला रहना चाहिए.
हालाँकि, यहाँ एक अहम बात है. ईरान इस कन्वेंशन का पक्षकार नहीं है. फिर भी, जलडमरूमध्य मार्गों से गुज़रने का अधिकार आमतौर पर परम्पारगत अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का हिस्सा माना जाता है.
क्या नौपरिवहन फिर शुरू होगा, और कैसे?
अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर यह इच्छा मौजूद है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खोला जाए. लेकिन अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के डेमियन शेवेलिये के अनुसार, “जहाज़ संचालकों को पहले सुरक्षा जोखिमों का बहुत सावधानी से आकलन करना होगा. सामान्य व्यापार की बहाली समुद्री सुरक्षा की स्थिति पर निर्भर करेगी.”
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार इस बात पर कूटनैतिक बातचीत कर रहे हैं कि जहाज़ों के लिए इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित, संरक्षित और प्रभावी आवाजाही कैसे सुनिश्चित की जाए.
उम्मीद है कि जल परिवहन पुराने निर्धारित मार्गों से फिर शुरू होगा. इसके लिए मुख्य व्यवस्था समुद्री यातायात पृथक्कीकरण प्रणाली (TSS) होगी.
यह ईरान और ओमान के प्रस्ताव पर तैयार की गई थी, जिसे वर्ष 1968 में अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने अपनाया था. इसके तहत समुद्री यातायात के लिए अलग-अलग मार्ग तय किए गए, ताकि:
• टक्करों का ख़तरा कम किया जा सके
• सुरक्षा बेहतर रखी जा सके
• तनाव के समय भी जहाज़ों की आवाजाही व्यवस्थित और अनुमानित बनी रहे
पिछले एक महीने में जो थोड़े-बहुत जहाज़ ओमान की खाड़ी की ओर निकल पाए, उन्होंने ईरान के निकट उत्तरी मार्ग लिया. ख़बरों के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया ताकि ईरानी अधिकारी उनकी गतिविधियों पर अधिक क़रीब से नज़र रख सकें.
आगे क्या होगा?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना इस बात पर निर्भर करेगा कि युद्धविराम कितने समय तक क़ायम रहता है, कूटनैतिक कोशिशें कितनी सफल होती हैं, समुद्री समन्वय कितना प्रभावी रहता है, और अन्तरराष्ट्रीय जल परिवहन नियमों का कितना पालन किया जाता है.