लेबनान: 10 मिनटों के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले, यूएन ने की कठोर निन्दा
मध्य पूर्व क्षेत्र में युद्धविराम की घोषणा के बीच, लेबनान के अनेक हिस्सों में इसराइल द्वारा की गई बमबारी में सैकड़ों लोगों के हताहत होने की ख़बर है, जिसकी संयुक्त राष्ट्र ने कड़ी निन्दा की है. संयुक्त राष्ट्र ने हिंसक टकराव पर विराम लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा, लेबनान और इसराइल में आम नागरिकों के जीवन की रक्षा का अवसर होना चाहिए.
लेबनान से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इसराइल ने बुधवार को बड़े पैमाने पर सिलसिलेवार ढंग से हवाई हमले किए हैं. इसराइल का कहना है कि लेबनान, युद्धविराम का हिस्सा नहीं हैं, हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच कथित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान ने उसके शामिल होने की बात कही है.
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवीय सहायता अधिकारी इमरान रिज़ा ने राजधानी बेरूत से जानकारी देते हुए इस टकराव को जल्द से जल्द रोके जाने की अपील जारी की है.
इस स्थिति में “कोई भी सैन्य विकल्प नहीं हैं...इसराइल और हिज़बुल्लाह को अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करना होगा और जल्द, बेरोकटोक मानवीय सहायता मार्ग की बहाली की जानी होगी.”
उन्होंने बताया कि बेरूत, दक्षिणी लेबनान समेत अन्य इलाक़ों में तीन घंटों के दौरान लगातार धमाकों, ऐम्बुलेंस की आवाज़ सुनाई देती रही.
बेरूत में अफ़रातफ़री
यूएन मानवतावादी अधिकारी के अनुसार, नए सिरे से हवाई हमले शुरू होने से पहले ही, बुधवार सुबह को एक कैफ़े पर हुए हमले में कम से कम 8 लोग मारे गए थे और 12 से अधिक धमाके सुनाई दिए.
इसके बाद, दोपहर में इसराइली सैन्य बलों ने 10 मिनटों के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए. “यह नाटकीय था. इन हमलों का यह स्तर विकराल था.”
अभी तक हताहतों की संख्या के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन सैकड़ों की संख्या में लोगों के मारे जाने या घायल होने की आशंका है. “अस्पतालों पर भीषण दबाव है, और निसन्देह, पूरे देश में रक्तदान के लिए बड़ी पुकार लगाई गई है.”
लेबनान में मानवीय सहायता प्रमुख इमरान रिज़ा के अनुसार, 2 मार्च को इसराइली सैन्य बलों और हिज़बुल्लाह के बीच लड़ाई भड़की थी, जिसके बाद से अब तक 1,500 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 130 बच्चे हैं. 461 बच्चे घायल हुए हैं.
हवाई हमलों और अपने घर छोड़कर जाने के इसराइली आदेशों की वजह से अब तक 12 लाख लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं, जोकि कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत है.
1.38 लाख लोगों ने 678 सामूहिक आश्रय स्थलों पर शरण ली है और अधिकतर की व्यवस्था स्कूलों में की गई है, जबकि अन्य लोग मेज़बान समुदायों में अनौपचारिक रूप से गुज़र-बसर कर रहे हैं और उनके पास बुनियादी सेवाओं का अभाव है.
मतभेद दूर करने की अपील
शीर्ष मानवीय सहायता समन्वयक इमरान रिज़ा ने चिन्ता जताई कि आम नागरिकों पर हिंसा का बहुत गहरा असर हो रहा है और इसलिए तनाव व टकराव को तुरन्त बन्द करना होगा.
उन्होंने कहा कि यह समय, लम्बित मुद्दों पर बातचीत करने, मतभेदों को सुलझाने, एक स्थाई युद्धविराम की दिशा में प्रयास करने और हिंसक टकराव का दीर्घकालिक समाधान निकालने का है.
मानवीय सहायता समन्वयक ने ज़ोर देकर कहा कि अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का सम्मान करना होगा, नागरिक प्रतिष्ठानों, आम लोगों, स्वास्थ्यकर्मियों की हर हाल में रक्षा की जानी होगी और मानवीय सहायता मार्ग को मुहैया कराया जाना ज़रूरी है.
इमरान रिज़ा ने मानवीय सहायता अभियान के लिए और अधिक मात्रा में धनराशि उपलब्ध कराए जाने की अपील की है.