ईरान: युद्ध के क्रूर परिणाम भुगतने को मजबूर लाखों नन्ही ज़िन्दगियाँ
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने चेतावनी दी है कि ईरान और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में, बच्चे शारीरिक नुक़सान और मानसिक तनाव के ख़तरे का सामना कर रहे हैं. वे उन ज़रूरी बुनियादी ढाँचों पर हमलों और बढ़ते ख़तरों से भी जूझ रहे हैं, जिन पर उनके जीवन का सहारा टिका है.
ईरान में बच्चे, पहले से ही इस युद्ध का सबसे अधिक असर झेल रहे हैं. लगातार हमलों, अस्थिरता और ज़रूरी सेवाओं में बाधा का संयुक्त प्रभाव, उनकी तत्काल सुरक्षा, दीर्घकालिक स्वास्थ्य, विकास और समग्र कल्याण को प्रभावित कर रहा है.
यूनीसेफ़ के मुताबिक़, बच्चे घायल व विस्थापित हो रहे हैं, और वे डर व अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर हैं. बच्चों की मौतें भी हो रही हैं. उन्हें सुरक्षा और स्थिरता देने वाले स्कूल, घर और समुदाय भी इस संकट से प्रभावित हैं.
लाखों बच्चों की पहुँच से बाहर स्वास्थ्य सेवा
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय और ईरानी रैड क्रेसेंट सोसाइटी (IRCS) के अनुसार, अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएँ लगातार बढ़ते दबाव में हैं, जहाँ बाधाओं के कारण गम्भीर उपचार (critical care) की उपलब्धता प्रभावित हो रही है.
देशभर में 442 स्वास्थ्य सुविधाओं को हुए नुक़सान के कारण, 22 लाख बच्चों समेत लगभग 1 करोड़ लोगों की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच प्रभावित हुई है.
ईरान में पाश्चर संस्थान को भारी नुक़सान हुआ है. दशकों से यह देश का प्रमुख वैक्सीन टीका उत्पादन केन्द्र रहा है, और इस क्षति के कारण टीकों का उत्पादन रुक गया है, जिससे बच्चों के लिए जीवनरक्षक टीकों तक पहुँच बाधित होने का जोखिम बढ़ गया है.
वहीं, कैंसर जैसी जटिल और दीर्घकालिक बीमारियों की दवाएँ बनाने वाली प्रमुख फ़ार्मा कम्पनी तोफ़ीग दारौ के पूरी तरह नष्ट हो जाने से, जीवनरक्षक इलाजों की गम्भीर कमी हो गई है, जिससे मरीज़ो, ख़ासकर बच्चों, की जान पर तत्काल ख़तरा मंडरा रहा है.
शिक्षा पर हमला
ख़बरों के अनुसार, 760 से अधिक स्कूल नष्ट या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे अनेक बच्चे मारे गए हैं और घायल हुए हैं.
इनमें युद्ध के पहले दिन ईरान के एक स्कूल पर हुआ विनाशकारी मिसाइल हमला भी शामिल है, जिसमें 168 लड़के और लड़कियों की मौत हो गई थी.
इस युद्ध से मध्य पूर्व क्षेत्र के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं. अनेक देशों में हमलों ने, बच्चों की ज़िन्दगी को तबाह कर दिया है और उन सुविधाओं व बुनियादी ढाँचों को नुक़सान पहुँचाया है. बहरीन, इसराइल, जॉर्डन, कुवैत और लेबनान में भी बच्चे मारे गए हैं या घायल हुए हैं.
बच्चों के जीवन के लिए आवश्यक नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमलों को, अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून, सख़्ती से प्रतिबन्धित करता है.
क्योंकि, जल और स्वच्छता प्रणालियों को नुक़सान पहुँचने से बच्चों में बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाएगा, बिजली आपूर्ति बाधित होने से नवजात और कमज़ोर बच्चों से जुड़ी आवश्यक सेवाएँ और प्रभावित होंगी.