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मध्य पूर्व में 40 दिनों के युद्ध के बाद, युद्धविराम की घोषणा का स्वागत

सूर्यास्त के समय तेहरान के क्षितिज का एक मनोरम दृश्य, शहर की कंक्रीट इमारतों के पीछे दूरी में उगते काले धुएं के एक बड़े पंखुड़ी के साथ।
© Contributor
ईरान की राजधानी तेहरान में बम से क्षतिग्रस्त एक इमारत. ईरान के अनेक इलाक़ों और खाड़ी के अन्य देशों में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुक़सान हुआ है.

मध्य पूर्व में 40 दिनों के युद्ध के बाद, युद्धविराम की घोषणा का स्वागत

शान्ति और सुरक्षा

अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 40 दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद, दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की गई है जिससे अस्थाई विराम की उम्मीद जागी है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने युद्धविराम की घोषणा को, व्यापक शान्ति की दिशा में एक सकारात्मक क़दम बताया है, मगर लेबनान में जारी इसराइली हमलों की ख़बरें इस बात को दर्शाती हैं कि स्थिति अब भी बेहद नाज़ुक बनी हुई है.

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यह युद्ध 28 फ़रवरी को, इसराइल व संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर हवाई बमबारी शुरू किए जाने और उसके बाद ईरान के जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमलों के साथ शुरू हुआ था, जिसकी चपेट में खाड़ी क्षेत्र में स्थित देश भी आए हैं. 

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा का स्वागत किया है, और सभी पक्षों से इसके प्रावधानों का सम्मान करने तथा अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों का पालन करने की अपील की है.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि आम नागरिकों की जान की सुरक्षा और बढ़ते मानवीय संकट को कम करने के लिए हिंसा का अन्त बेहद ज़रूरी है. 

साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान सहित उन देशों के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने इस समझौते को सम्भव बनाने में भूमिका निभाई.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा कि "मैं दिल से उम्मीद करता हूँ कि अमेरिका और ईरान द्वारा घोषित युद्धविराम, उन सभी नागरिकों के लिए राहत लेकर आएगा, जो सप्ताहों से इस युद्ध का दर्द झेल रहे हैं और अब भी बड़े ख़तरे में हैं."

"मैं सभी पक्षों से अपील करता हूँ कि वे ईमानदारी से क़दम उठाएँ और सुनिश्चित करें कि यह पहला क़दम, एक व्यापक समझौते में बदले. साथ ही, लेबनान में युद्ध से हो रही पीड़ा और कष्ट को समाप्त करना भी बेहद ज़रूरी है."

उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के सम्मान के साथ एक स्थाई क्षेत्रीय शान्ति बेहद आवश्यक है.

लेबनान में लाखों लोग विस्थापित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र की निदेशक हनान बाल्खी ने दो सप्ताह के युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि लेबनान में भी तुरन्त इसी तरह के युद्धविराम की ज़रूरत है. 

उन्होंने चेतावनी दी कि जारी हिंसा और विस्थापन, पहले से कमज़ोर स्वास्थ्य प्रणाली पर और अधिक बोझ डाल सकते हैं.

निदेशक हनान बाल्खी ने बताया कि युद्ध बढ़ने के बाद से, क़रीब हर 5 में से 1 व्यक्ति विस्थापित है, 5 हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं और 1,500 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

वहीं, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में लैंगिक आधारित हिंसा (GBV) का ख़तरा तेज़ी से बढ़ा है, ख़ासकर लेबनान, सीरिया, इराक़, यमन और क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्रों में.

विस्थापन, असुरक्षा और पहले से कमज़ोर सुरक्षा तंत्र के टूटने के कारण, अब 1.8 करोड़ से अधिक महिलाएँ और लड़कियाँ बढ़ते जोखिम के दायरे में हैं. 

केवल लेबनान में ही विस्थापित लोगों की संख्या 10 लाख के पार पहुँच चुकी है, जिससे असुरक्षा और बढ़ गई है.

बेरूत, लेबनान में 9 मार्च, 2026 को दहीहीह उपनगर में हवाई हमलों के बाद, लेबनान के बेरूत में एक धूल भरे मैदान पर अस्थायी तम्बूओं और आश्रयों में विस्थापित परिवार। लोगों को पृष्ठभूमि में ऊंची इमारतों के साथ एक छोटी सी आग पर खाना पकाने के लिए देखा जाता है।
© WFP/Arete/Ali Yunes
लेबनान में इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच युद्ध के कारण लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.

तेल क़ीमत में गिरावट

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के बाद तेल की क़ीमतों में तेज़ गिरावट देखी गई है. शुरुआती कारोबार में ब्रै़ट क्रूड (Brent Crude) कच्चा तेल क़रीब 13 प्रतिशत गिरकर लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया.

हालाँकि, गिरावट के बावजूद क़ीमतें 28 फ़रवरी से पहले के स्तर से अब भी काफ़ी अधिक हैं, जब कच्चा तेल क़रीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.

विशेषज्ञों के मुताबिक़, इस संकट के व्यापक आर्थिक प्रभाव को लेकर चिन्ताएँ बनी हुई हैं, ख़ासकर प्रेषण (remittance) पर निर्भर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए, जो पहले से ही बढ़ती लागत और वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं.

धरातल पर मौजूद महासचिव के निजी दूत

ईंधन की कमी के संकट के दौरान ईंधन भरने के लिए श्रीलंका में एक पक्की सड़क पर रंगीन ऑटोरिक्शा की एक लंबी कतार इंतजार कर रही है।
© UNICEF/Janaka Weerasinghe

महासचिव के निजी दूत, ज्याँ अरनॉ, इस समय मध्य पूर्व क्षेत्र में मौजूद हैं और व्यापक व स्थाई शान्ति की दिशा में प्रयासों को समर्थन दे रहे हैं. 

ज्याँ अरनॉ के पास अन्तरराष्ट्रीय कूटनीति में लगभग चार दशकों का अनुभव है, जिसमें मध्यस्थता और शान्ति प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान रहा है. उन्होंने अफ़्रीका, एशिया, योरोप और लैटिन अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र मिशनों का नेतृत्व किया है.

हाल के वर्षों में, उन्होंने कोलम्बिया शान्ति वार्ता में महासचिव के प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया और बाद में विशेष प्रतिनिधि के तौर पर 2016 के शान्ति समझौते के बाद, वहां संयुक्त राष्ट्र मिशन की निगरानी की.

इसके अलावा, उन्होंने बोलीविया के लिए महासचिव के निजी दूत के रूप में और अफ़ग़ानिस्तान व क्षेत्रीय मुद्दों पर भी काम किया है.