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WHO: हर स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों का आधार 'विज्ञान' होना चाहिए

सूडान के उत्तरी दारफुर के ताविला में यूनिसेफ द्वारा समर्थित एक स्वास्थ्य सुविधा में टीकाकरण के दौरान एक मां ने अपनी सात महीने की बेटी को अपने हाथों में लिया।
© UNICEF/Mohammed Jamal
उत्तरी दारफ़ूर में, एक 7 महीने की बच्ची को ख़सरा का टीका लगते हुए.

WHO: हर स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों का आधार 'विज्ञान' होना चाहिए

स्वास्थ्य

हर साल 7 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य, वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामूहिक ज़िम्मेदारी को मज़बूत करना है. इस वर्ष, मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए सहयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.

7 अप्रैल 1948 को, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्थापना की वर्षगाँठ के साथ शुरू हुआ यह अभियान पूरे साल चलता है. इस वर्ष का विषय है: “स्वास्थ्य के लिए साथ आएँ, विज्ञान के समर्थन में खड़े हों.”

पिछली एक सदी में विज्ञान की प्रगति और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के कारण, मानव स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव आया है. 

विज्ञान की बदौलत बड़ी उपलब्धियाँ

वर्ष 2000 के बाद से, वैश्विक स्तर पर मातृ मृत्यु दर में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जबकि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौतों में 50 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई है.

तकनीक, वैज्ञानिक ज्ञान और कौशल में प्रगति समेत विभिन्न क्षेत्रों और देशों के बीच सहयोग ने, अनेक जानलेवा बीमारियों को अब नियंत्रित और प्रबन्ध योग्य बना दिया है, जिससे दुनिया भर में लोगों की ज़िन्दगी लम्बी और बेहतर हो रही है. 

इनमें उच्च रक्तचाप, कैंसर और एचआईवी संक्रमण जैसी बीमारियाँ शामिल हैं.

अरबों लोगों को मिला जीवन

WHO के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस का कहना है, “विज्ञान, मानवता के लिए स्वास्थ्य की रक्षा और सुधार के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है."

"आज, हर देश में लोग अपने पूर्वजों की तुलना में औसतन अधिक लम्बा और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, और इसका श्रेय विज्ञान की ताक़त को जाता है.”

उन्होंने कहा कि टीके, पैनिसिलिन, जर्म थ्योरी, एमआरआई मशीनें और मानव जीनोम का मानचित्रण जैसी वैज्ञानिक उपलब्धियों ने, न केवल लाखों जीवन बचाए हैं, बल्कि अरबों लोगों के स्वास्थ्य में क्रान्तिकारी बदलाव लाए हैं.

वैज्ञानिक नवाचार तब सबसे अधिक प्रभावशाली साबित होते हैं, जब उन्हें बड़े पैमाने पर अपनाया और इस्तेमाल किया जाए.

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Photo Aisha Faquir/World Bank

स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रान्तिकारी बदलाव 

मानव स्वास्थ्य में हर सुधार के पीछे वैज्ञानिक संस्थाओं, नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और आम लोगों के सामूहिक प्रयास व सहयोग की भूमिका होती है. 

उदाहरण के तौर पर, आधुनिक एनेस्थीसिया (बेहोश करने की दवा) से पहले सर्जरी का मतलब असहनीय दर्द होता था. आज सुरक्षित दवाओं, किफ़ायती तकनीकों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की बदौलत जीवनरक्षक ऑपरेशन मरीज़ों को नींद में पहुँचाकर आराम के साथ किए जाते हैं.

वैज्ञानिक प्रगति ने, इन सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाया है, जिससे सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों सहित दुनिया के कई हिस्सों में सुरक्षित सर्जिकल चिकित्सा देखभाल सम्भव हो पाई है.

पिछले 50 वर्षों में, वैश्विक टीकाकरण अभियानों ने 15.4 करोड़ से अधिक बच्चों को संक्रामक बीमारियों से बचाया है. 

टीकों की वजह से शिशु मृत्यु दर में 40 प्रतिशत तक कमी आई है, और केवल ख़सरे के टीके ने ही, 9 करोड़ से अधिक बच्चों की जान बचाई है.

वहीं, शुरुआती जाँच (screening) तकनीकों में प्रगति भी स्वास्थ्य परिणामों को बदल रही है. इलैक्ट्रॉनिक रक्तचाप मॉनिटर से लेकर मैमोग्राफ़ी के ज़रिए स्तन कैंसर की जाँच करने वाले उपकरण, लाखों लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रहे हैं.

कुछ ख़तरे...

हालाँकि, स्वास्थ्य क्षेत्र में ख़तरे लगातार बढ़ रहे हैं, जिन्हें जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय क्षरण, भू-राजनैतिक तनाव और बदलती जनसंख्या संरचना और बढ़ा रहे हैं.

इन चुनौतियों में, एक ओर पुरानी बीमारियों का बना रहना और स्वास्थ्य प्रणालियों पर बढ़ता दबाव शामिल है, तो दूसरी ओर महामारी बनने की क्षमता रखने वाली नई बीमारियाँ भी सामने आ रही हैं.

दुनिया भर में हज़ारों वैज्ञानिक, WHO जैसे संस्थानों के साथ मिलकर शोध कर रहे हैं. वे ऐसी नीतियाँ, उपकरण व नवाचार विकसित कर रहे हैं, जो आज समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ, आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकें.

WHO की भूमिका

यूएन स्वास्थ्य संगठन ने, पिछले 78 वर्षों में वैश्विक वैज्ञानिक संगठनों को साथ लाकर, स्वास्थ्य और विज्ञान के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है.

2003 में, WHO ने, SARS यानि अत्यधिक गम्भीर श्वसन समस्या के प्रकोप के दौरान, दुनिया भर की प्रयोगशालाओं का एक नैटवर्क समन्वित किया, जहाँ वास्तविक समय का डेटा साझा किया गया.

इस सहयोग के कारण, केवल दो सप्ताह के भीतर वायरस की पहचान सम्भव हो सकी. इससे वैश्विक स्तर पर बीमारी की पहचान और प्रतिक्रिया के लिए एक मॉडल स्थापित किया गया, और जिसका प्रयोग आज भी किया जा रहा है.

जबकि 2009 में, WHO ने हाथों के लिए स्वच्छता एल्कोहल-आधारित घोल विकसित किए और स्वास्थ्य सेवाओं में इसके वैश्विक उपयोग को बढ़ावा दिया.

हावा युसूफ, 30, नाइजीरिया के सोकोटो राज्य में गागी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सोकोटो राज्य में गगी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूति कक्ष के अंदर अपने नवजात बच्चे को लेकर। दरवाजे के ऊपर एक चिह्न 'LABOUR ROOM' पढ़ता है और USAID और UNICEF के लोगो दिखाता है।
© UNICEF/David Boman

यह नवाचार और इससे जुड़ी संक्रमण-नियंत्रण रणनीतियाँ, दुनिया भर में लाखों मरीज़ों और स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण व जटिलताओं से बचाने में मदद करती हैं, जिसमें coronavirus">COVID-19 महामारी के दौरान भी इसकी अहम भूमिका रही.

इसके साथ ही, WHO लगातार मानव स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती चुनौतियों की पहचान करता है और प्रमुख वैज्ञानिकों व नीति-निर्माताओं को साथ लाकर ऐसे मानक और दिशानिर्देश तैयार करता है, जो समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं.

जैसे, WHO के वैश्विक वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देश यह तय करते हैं कि हवा की गुणवत्ता किस स्तर तक सुरक्षित होनी चाहिए, ताकि श्वसन संक्रमण, अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव हो सके.

इसी तरह, WHO के पेयजल मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि नल से मिलने वाला पानी सुरक्षित हो, जिससे दस्त जैसी बीमारियों की रोकथाम की जा सके, जिनमें हैज़ा जैसी जानलेवा बीमारियाँ भी शामिल हैं.

यूएन स्वास्थ्य संगठन ने इस बात पर बल दिया कि हर स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों का आधार विज्ञान होना चाहिए. 

‘One Health’ सम्मेलन

विश्व स्वास्थ्य संगठन और फ़्रांस की जी7 अध्यक्षता के सहयोग से, ल्यों में ‘One Health’ सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें एक अन्तरराष्ट्रीय सहयोगी मंच के माध्यम से, 80 से अधिक देशों के 800 से ज़्यादा शोध संस्थानों ने शिरकत की.

ग़ौरतलब है कि WHO और उसके साझीदार संगठन, संक्रामक रोगों और दीर्घकालिक बीमारियों से लेकर मानसिक स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरणीय जोखिमों तक, विभिन्न स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर साक्ष्य तैयार करते हैं और उन्हें व्यवहार में लाने में मदद करते हैं.

इस प्रक्रिया के ज़रिए, देशों को प्रभावी और समान स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने में समर्थन मिलता है.

वैश्विक स्वास्थ्य में हुई उपलब्धियाँ दिखाती हैं कि जब देश, विज्ञान के साथ एकजुट होते हैं, तो वे न केवल संकटों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करते हैं, बल्कि भविष्य के लिए अधिक मज़बूत और समान स्वास्थ्य प्रणालियों का निर्माण भी करते हैं.